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कौन हैं भारत रत्न लालकृष्ण आडवाणी के बेटे जयंत? राजनीति की चकाचौंध से दूर रहकर करते हैं यह काम

जयंत आडवाणी ने गांधीनगर लोकसभा सीट से लालकृष्ण आडवाणी के चुनाव अभियान में भी सक्रिय भूमिका निभाई थी. जब लालकृष्ण आडवाणी को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया गया, तब जयंत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार का आभार जताया था.

कौन हैं भारत रत्न लालकृष्ण आडवाणी के बेटे जयंत? राजनीति की चकाचौंध से दूर रहकर करते हैं यह काम
जयंत आडवाणी BJP के वरिष्ठ नेता और देश के पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी के पुत्र हैं
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पूर्व उप प्रधानमंत्री और भारत रत्न एल.के. आडवाणी की 100वीं जयंती के अवसर पर, उनके बेटे जयंत आडवाणी ने कहा कि मुझे बहुत खुशी है कि आडवाणी जी ने 99 साल पूरे कर लिए हैं और आज वे अपने 100वें साल में प्रवेश कर रहे हैं. मैं आज यहां आए सभी पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं को दिल से धन्यवाद देता हूं. हमने उनके लिए हवन किया और प्रार्थना की. मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि आडवाणी जी के पास आगे जितना भी समय है, वह अच्छे स्वास्थ्य के साथ बीते.

कौन हैं जयंत आडवाणी?

जयंत आडवाणी BJP के वरिष्ठ नेता और देश के पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी के पुत्र हैं. वे लालकृष्ण आडवाणी और उनकी दिवंगत पत्नी कमला आडवाणी की संतान हैं. उनकी एक बहन प्रतिभा आडवाणी हैं. जयंत पेशे से एक व्यवसायी हैं और अपने पिता के विपरीत सक्रिय राजनीति से दूर रहे हैं. माना जाता है कि लालकृष्ण आडवाणी परिवारवाद के आरोपों से बचना चाहते थे. इसलिए उन्होंने अपने बेटे को चुनावी राजनीति में आगे नहीं बढ़ाया. हालांकि, जयंत ने एक इंटरव्यू में राजनीति में आने की इच्छा जताई थी.

राजनीति में सक्रिय भूमिका न निभाने के बावजूद जयंत आडवाणी कई बार अपने पिता के साथ सार्वजनिक कार्यक्रमों और चुनाव प्रचार में नजर आए हैं. उन्होंने गुजरात के गांधीनगर लोकसभा क्षेत्र में लालकृष्ण आडवाणी के लिए घर-घर जाकर प्रचार भी किया था. अपने पिता के लंबे राजनीतिक सफर के दौरान वे हमेशा परिवार के मजबूत सहारे के रूप में मौजूद रहे. जब लालकृष्ण आडवाणी को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न' से सम्मानित किया गया था, तब जयंत आडवाणी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार का आभार व्यक्त किया था.

लालकृष्ण C का जन्म 8 नवंबर 1927 को कराची में हुआ था. बचपन में ही मां का साया सिर से उठ गया. उनके व्यक्तित्व में पिता की झलक अधिक दिखाई देती थी. आडवाणी के दादा संस्कृत के विद्वान थे. उस परिवेश का प्रभाव उनके व्यक्तित्व पर भी पड़ा. 20 साल की उम्र में आडवाणी भारत आ गए. पहले राजस्थान और फिर दिल्ली में रहे. आडवाणी को याद कीजिए तो एक काले फ्रेम का चश्मा, खादी का कुर्ता और सादगी भरा व्यक्तित्व सामने आता है. लेकिन इस सादगी के पीछे एक ऐसा राजनीतिक मस्तिष्क था, जिसने दशकों तक भारतीय राजनीति को प्रभावित किया.

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