- लालकृष्ण आडवाणी ने 12 सितंबर 1947 को कराची छोड़कर भारत आना तय किया था और एक महीने बाद परिवार भी आया था
- आडवाणी ने 2010 में ब्लॉग में सितंबर महीने के अपने जीवन में विशेष महत्व के बारे में विस्तार से लिखा था
- आडवाणी ने जनरल मुशर्रफ से दिल्ली में मुलाकात के दौरान दाऊद इब्राहिम की पाकिस्तान में मौजूदगी पर सवाल उठाए थे
लालकृष्ण आडवाणी. यह नाम ऐसी शख्सियत का है, जिसने भारत का स्वतंत्रता आंदोलन देखा, आजादी देखी और देश के बंटवारे का दर्द भी सहा. इसी कष्ट के साथ वह कराची से भारत आए थे. 12 सितंबर, 1947 को वह पाकिस्तान से निकल आए थे और फिर एक महीने बाद उनका परिवार आया था. वह सितंबर का महीना था. यही वजह थी कि उनके जेहन में सितंबर की एक खास जगह थी. उन्होंने वर्ष 2010 में एक ब्लॉग में अपनी जिंदगी में सितंबर का महत्व भी बताया था. उस ब्लॉग का शीर्षक ही था- 'THE IMPORTANCE OF SEPTEMBER'.
उन्होंने लिखा था, 'मेरे लिए आज का दिन बहुत यादगार है. 1947 में ठीक इसी दिन मैंने अपनी जन्मभूमि कराची को हमेशा के लिए छोड़ दिया था. तब से लेकर आज तक मैं केवल दो बार कराची गया हूं- पहली बार 1978 में, और दूसरी बार 2005 में.' वह लिखते हैं कि पाकिस्तान के जनरल मुशर्रफ का जन्म दिल्ली में हुआ था, जब वह 2001 में दिल्ली आए तो आज़ादी के बाद यह उनका यहां पहला दौरा था. राष्ट्रपति भवन में उनसे हुई अपनी पहली ही बातचीत में मैंने इस बात का जिक्र किया था. मैंने कहा, 'क्या आपको यह दुर्भाग्यपूर्ण नहीं लगता कि 1947 के बाद पांच दशकों से भी अधिक समय बीत जाने पर आप पहली बार अपनी जन्मभूमि पर आए हैं? और मैं भी अपने गृह-नगर कराची केवल एक बार ही जा पाया हूँ (जैसा कि पहले बताया गया है, मेरी दूसरी यात्रा बाद में हुई थी)!'
जनरल के साथ उस पहली मुलाकात में कराची के सेंट पैट्रिक्स हाई स्कूल की भी बातें हुई थीं. यहां हम दोनों ने पढ़ाई की थी. इन बातों से कुछ आत्मीयता बढ़ी थी, लेकिन जब मैंने दाऊद को सौंपे जाने की मांग उठा दी तो माहौल बदल गया. इस पर जनरल मुशर्रफ ने कहा, 'देखिए मिस्टर आडवाणी, मैं आपको बता दूँ कि दाऊद इब्राहिम पाकिस्तान में नहीं है.' बैठक में मौजूद भारत और पाकिस्तान के लगभग एक दर्जन अधिकारियों में से हर कोई जानता था कि पाकिस्तानी राष्ट्रपति ने सरासर झूठ बोला है.
वह लिखते हैं कि मेरी जिंदगी में सितंबर महीने का एक और खास महत्व है. जैसा कि मैंने अकसर कहा है कि अगर कोई ऐसा व्यक्ति है, जिसके साथ मैं सीधे तौर पर जुड़ा रहा हूं. जिसे मैंने सभी राजनीतिक कार्यकर्ताओं के लिए एक आदर्श रोल मॉडल के रूप में देखा है तो वे पंडित दीनदयाल उपाध्याय हैं. उनका जन्मदिन 25 सितंबर को आता है. 1990 में जब मैंने सोमनाथ से अयोध्या तक एक रथ यात्रा निकालने का फैसला किया था तो वह भी सितंबर ही था. मैंने 25 सितंबर से यात्रा शुरू करने का फैसला लिया था और 30 अक्तूबर को अयोध्या पहुंचना तय था. हालांकि बिहार में मुझे गिरफ्तार कर लिया गया. इसके आगे आडवाणी ने कहा कि 1990 से मैं हर साल 25 सितंबर को सोमनाथ जाता हूं ताकि भगवान सोमनाथ का आशीर्वाद ले सकूं.
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