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क्या होता है साइबर क्राइम का 'गोल्डन ऑवर'? गाजियाबाद पुलिस ने 2.5 घंटे में बचाए 5 करोड़ रुपये

गाजियाबाद पुलिस ने साइबर फ्रॉड की शिकायत मिलने पर महज ढाई घंटे में 5 करोड़ रुपये होल्ड करवा दिए. बाद में पता चला कि यह फ्रॉड नहीं बल्कि गलत ट्रांजेक्शन का मामला था, जिससे 'गोल्डन ऑवर' की अहमियत सामने आई.

क्या होता है साइबर क्राइम का 'गोल्डन ऑवर'? गाजियाबाद पुलिस ने 2.5 घंटे में बचाए 5 करोड़ रुपये
गाजियाबाद पुलिस ने शख्स के 5 करोड़ रुपये बचाए
  • गाजियाबाद पुलिस ने NCRB पोर्टल पर दर्ज 5 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की शिकायत पर तुरंत कार्रवाई की
  • पुलिस ने घटना के चार घंटे के भीतर ICICI बैंक खाते में पूरी रकम को होल्ड करा दिया था
  • जांच में पता चला कि मामला साइबर फ्रॉड नहीं बल्कि पीड़ित द्वारा हुई गलत ट्रांजैक्शन था
नई दिल्ली:

साइबर अपराधियों के खिलाफ गाजियाबाद पुलिस ने गोल्डन ऑवर का सही इस्तेमाल करते हुए एक मिसाल पेश की है. NCRB पोर्टल पर 5 करोड़ रूपये की धोखाधड़ी की शिकायत मिलते ही पुलिस ने तत्परता दिखाई और महज ढाई घंटे के भीतर पूरी रकम को बैंक खाते में होल्ड करवा दिया. हालांकि, अगले दिन जब पुलिस ने पीड़ित से संपर्क किया, तो मामले में एक अलग ही मोड़ सामने आया कि ये साइबर फ्रॉड नही गलत ट्रॉजैक्शन का मामला था.

पुलिस ने तुरंत लिया एक्शन

ADCP क्राइम ब्रांच गाजियाबाद के अनुसार 2 जुलाई को NCRB पोर्टल पर 5 करोड़ रूपये के साइबर फ्रॉड की एक शिकायत दर्ज हुई थी. रकम बड़ी होने के कारण पुलिस ने तुरंत एक्शन लिया. I4C (इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर) के जरिए गाजियाबाद पुलिस के दो सब-इंस्पेक्टरों को तुरंत एक्टिव किया. रात के वक्त ही ICICI बैंक के नोडल ऑफिसर से संपर्क साधा गया.

रात करीब 2:30 बजे, पीड़ित द्वारा बताए गए खाते में पूरी की पूरी 5 करोड़ रुपये की रकम को होल्ड करवा दिया गया. पीड़ित की तरफ से पूरा ट्रांजेक्शन एक ही अकाउंट में गया था.

फ्रॉड नहीं, गलत ट्रांजेक्शन का था मामला 

ADCP क्राइम गाजियाबाद पीयूष सिंह ने जानकारी दी कि अगले दिन पीड़ित से बात करने पर जानकारी मिली कि उनकी तरफ से गलत ट्रांजेक्शन हुआ था. यानी कोई साइबर फ्रॉड नहीं हुआ था, बल्कि उसकी खुद की गलती से वह भारी-भरकम रकम किसी दूसरे खाते में ट्रांसफर  हो गई थी. चूंकि पोर्टल पर शिकायत दर्ज थी और रकम बहुत बड़ी थी, इसलिए हमने इसे शुरुआती तौर पर साइबर फ्रॉड मानकर तुरंत अटेंड किया और पैसे सुरक्षित कर दिए.

क्या होता है साइबर क्राइम में गोल्डन ऑवर? 

गाजियाबाद पुलिस ने इस मामले के जरिए आम जनता को साइबर फ्रॉड से बचने के लिए 'गोल्डन ऑवर' के महत्व को समझाया है. ADCP क्राइम पीयूष सिंह का कहना है कि साइबर फ्रॉड होने के बाद के शुरुआती 1 से 2 घंटे को गोल्डन ऑवर कहा जाता है. इस दौरान अगर पीड़ित तुरंत अपनी शिकायत दर्ज करा देता है, तो बैंकिंग सिस्टम के भीतर पैसे को फ्रॉडस्टर्स के खातों में जाने या विड्रॉ होने से पहले होल्ड कराने के चांस सबसे ज्यादा होते हैं.

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