- उम्मीदवारों की सूची घोषित होने से पहले ममता बनर्जी ने पार्टी का बैज लगाकर विक्ट्री साइन दिखाया.
- ममता का यह अंदाज तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं के मनोबल को ऊंचा रखने और आत्मविश्वास दिखाने का प्रयास माना जाता.
- विश्लेषकों के अनुसार यह रणनीति चुनाव से पहले जीत का संकेत देने, पार्टी में विश्वास बनाए रखने के लिए अपनाई गई.
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए उम्मीदवारों की सूची घोषित करने से ठीक पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का अंदाज एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया. उम्मीदवारों के नाम सामने आने से पहले ही ममता बनर्जी पार्टी का बैज लगाए, हाथ में विक्ट्री साइन दिखाते हुए नजर आईं. यह सिर्फ एक तस्वीर नहीं थी, बल्कि एक ऐसा राजनीतिक संकेत था जिसे तृणमूल कांग्रेस के नेता आत्मविश्वास का प्रतीक बता रहे हैं, जबकि विपक्ष इसे अति-आत्मविश्वास कह रहा है.
राजनीति में प्रतीकों का अपना महत्व होता है और ममता बनर्जी इसे अच्छी तरह समझती हैं. साधारण सफेद साड़ी, चप्पल, कंधे पर बैग और अब चुनाव से पहले पार्टी का बैज लगाकर विक्ट्री साइन दिखाना—ये सब उनकी उसी राजनीतिक शैली का हिस्सा है, जिसने उन्हें आम लोगों के बीच अलग पहचान दी है. तृणमूल के नेता मानते हैं कि ममता का यह अंदाज कार्यकर्ताओं को संदेश देने के लिए था कि पार्टी चुनाव को लेकर पूरी तरह आश्वस्त है.
TMC कार्यकर्ताओं का मनोबल ऊंचा रखना चाहती है?
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक उम्मीदवारों की घोषणा से पहले ही जीत का संकेत देना एक सोची-समझी रणनीति भी हो सकती है. पिछले कुछ महीनों से राज्य की राजनीति में जिस तरह का मुकाबला देखने को मिल रहा है, उसमें तृणमूल कांग्रेस अपने कार्यकर्ताओं का मनोबल ऊंचा रखना चाहती है. ममता बनर्जी का यह अंदाज़ सीधे तौर पर जमीनी कार्यकर्ताओं को यह संदेश देता है कि नेतृत्व को जीत पर भरोसा है और उसी भरोसे के साथ चुनाव मैदान में उतरना है.
ममता बनर्जी की राजनीति हमेशा से जनता से सीधे संवाद पर आधारित रही है. चाहे सड़क पर धरना हो, प्रशासनिक बैठक हो या चुनावी मंच—वह अक्सर ऐसे संकेत देती हैं जो सीधे आम लोगों तक पहुंचते हैं. पार्टी का बैज लगाना और विक्ट्री साइन दिखाना भी उसी शैली का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें वह खुद को नेता से ज्यादा एक कार्यकर्ता के रूप में पेश करती हैं.
विपक्ष इसे अलग नजर से देख रहा है. भाजपा नेताओं का कहना है कि चुनाव से पहले ही जीत का दावा करना लोकतांत्रिक प्रक्रिया को हल्के में लेने जैसा है, जबकि तृणमूल का कहना है कि यह आत्मविश्वास उस काम का है जो सरकार ने पिछले वर्षों में किया है.
जो भी हो, उम्मीदवारों की सूची जारी होने से पहले ममता बनर्जी की यह एक झलक फिर साबित करती है कि बंगाल की राजनीति में चुनाव सिर्फ भाषणों से नहीं, बल्कि प्रतीकों, भावनाओं और जनता से सीधे जुड़ाव से भी लड़ा जाता है — और इस खेल की सबसे अनुभवी खिलाड़ी अब भी ममता बनर्जी ही मानी जाती हैं.
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