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'हम पाकिस्तान की तरह दलाल देश नहीं', ईरान-US के बीच PAK की मध्यस्थता के सवाल पर बोले जयशंकर

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच हुई ऑल पार्टी मीटिंग खत्म हो गई है. इस मीटिंग की अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की. बैठक में गृह मंत्री अमित शाह और विदेश मंत्री जयशंकर भी मौजूद रहे.

'हम पाकिस्तान की तरह दलाल देश नहीं', ईरान-US के बीच PAK की मध्यस्थता के सवाल पर बोले जयशंकर
विदेश मंत्री जयशंकर. (फाइल फोटो)
IANS
  • रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई ऑल पार्टी मीटिंग में पश्चिम एशिया के हालात पर चर्चा हुई
  • सरकार ने मीटिंग में कहा कि देश में ऊर्जा की कोई कमी नहीं है और एलपीजी उत्पादन में वृद्धि हुई है
  • विदेश मंत्री जयशंकर ने बताया कि होर्मुज स्ट्रेट में फंसे चार जहाज सुरक्षित लौट चुके हैं और और जहाज आ रहे हैं
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नई दिल्ली:

पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच बुधवार को ऑल पार्टी मीटिंग हुई. इस मीटिंग में सरकार ने पश्चिम एशिया के हालात और सरकार की तैयारियों के बारे में बताया. बैठक के दौरान जब विपक्ष ने ईरान और अमेरिका के बीच पाकिस्तान की मध्यस्थता के ऑफर पर सवाल किया तो विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा कि हम पाकिस्तान की तरह 'दलाल देश' नहीं हैं.

दरअसल, पाकिस्तान ने ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता की भूमिका निभाने की पेशकश की है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने X पर पोस्ट कर कहा था कि संघर्ष को खत्म करने के लिए सार्थक और निर्णायक वार्ता की मेजबानी करने के लिए उनका देश तैयार है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी उनकी इस पोस्ट का स्क्रीनशॉट शेयर किया था.

इसी बारे में विपक्षी सांसद धर्मेंद्र यादव और मुकुल वासनिक ने सवाल किया था. इस पर जवाब देते हुए सरकार ने कहा कि पाकिस्तान 1981 से ऐसा करता आ रहा है, इसमें कोई नई बात नहीं है. बैठक में मौजूद एक सदस्य ने बताया कि जयशंकर ने कहा कि 'भारत, पाकिस्तान की तरह बिचौलिए और दलाल देश के तौर पर काम नहीं करेगा.'

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ऑल पार्टी मीटिंग में क्या हुआ?

पश्चिम एशिया के हालात पर लगभग दो घंटे तक ऑल पार्टी मीटिंग चली. बैठक के बारे में संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजीजू ने कहा कि जितने भी सवाल थे और जो भी भ्रम था, उन सभी को सरकार ने पूरी तरह से स्पष्ट कर दिया. 

उन्होंने बताया कि कई सदस्य होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते गैस और पेट्रोलियम की आपूर्ति से जुड़ी जानकारी जानना चाहते थे, और वे सभी इस बात से संतुष्ट थे कि भारत ने पहले ही चार जहाज सुरक्षित कर लिए हैं. इसलिए विपक्षी सदस्य सरकार के काम से संतुष्ट थे. 

उन्होंने कहा कि विपक्षी सदस्यों ने कई सवाल पूछे कि ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच संघर्ष से पश्चिम एशिया में पैदा हुई स्थिति का भारत पर क्या असर पड़ेगा, और भारत के लोगों के लिए सरकार ने क्या कदम उठाए हैं. सरकार ने इन सवालों के विस्तृत और पूरी तरह से जवाब दिए. मुझे यह बताते हुए संतोष हो रहा है कि सरकार ने पूरे विपक्ष के सभी सवालों के जवाब दिए हैं.

रिजिजू ने बताया कि आखिर में विपक्ष के सभी साथियों ने कहा है कि संकट की इस घड़ी में, सरकार जो भी फैसला लेगी, मौजूदा हालात के हिसाब से जो भी कदम उठाएगी, सभी उसका एकजुट होकर समर्थन करेंगे.

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सरकार ने क्या कहा?

विपक्ष ने सरकार की विदेश नीति की आलोचना की थी. कांग्रेस समेत विपक्षी पार्टियों ने विदेश नीति पर सवाल उठाए थे. ऑल पार्टी मीटिंग में सरकार ने इन सभी आरोपों को खारिज कर दिया. सरकार ने पश्चिम एशिया संकट से निपटने के अपने तरीके का जोरदार बचाव किया. 

पाकिस्तान की ओर से की गई मध्यस्थता की पेशकश पर सरकार ने तर्क दिया कि अगर अमेरिका को पाकिस्तान के जरिए बातचीत करना उपयोगी लगता है तो भारत उसे नियंत्रित नहीं कर सकता. साथ ही सरकार ने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत वैश्विक कूटनीति में 'दलाल देश' की भूमिका नहीं निभाएगा.

विदेश नीति की आलोचनाओं का जवाब देते हुए सराकर ने कहा कि भारत लगातार सक्रिय रहा है. बयानों, कूटनीतिक पहलों और सभी संबंधित पक्षों के साथ लगातार बातचीत कर रहा है. सरकार ने कभी-कभी 'खामोशी' को एक रणनीतिक हथियार बताया लेकिन इस बात पर भी जोर दिया कि भारत चुपचाप नहीं रहा है.

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मीटिंग में कौन-कौन मौजूद रहा?

पश्चिम एशिया के हालातों पर जानकारी देने के लिए सरकार की ओर से ये ऑल पार्टी मीटिंग बुलाई गई थी. इस मीटिंग की अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की. बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी और विदेश सचिव विक्रम मिस्री मौजूद रहे.

वहीं, विपक्ष की ओर से इसमें बीजेडी सांसद सस्मित पात्रा, जेडीयू से ललन सिंह, कांग्रेस से मुकुल वासनिक और तारिक अनवर, समाजवादी पार्टी से धर्मेंद्र यादव और सीपीएम से जॉन ब्रिटास समेत कई सांसद मौजूद थे. हैदराबाद से AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी भी इस बैठक में शामिल हुए.

ऑल पार्टी मीटिंग को लेकर आरोप-प्रत्यारोप

ऑल पार्टी मीटिंग के फैसले को कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने 'देर से उठाया गया कदम' बताते हुए सरकार की विदेश नीति की आलोचना की और सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस अहम चर्चा में शामिल क्यों नहीं हो रहे हैं.

विपक्षी दलों ने कहा था कि यह बैठक बहुत पहले ही हो जानी चाहिए थी और उन्होंने प्रधानमंत्री की 'गैरमौजूदगी' पर सवाल उठाया था. उन्होंने कहा कि बड़े वैश्विक संकटों के दौरान ऐसी चर्चाओं का नेतृत्व पारंपरिक रूप से प्रधानमंत्री ही करते आए हैं.

कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने कहा कि 'जब भी किसी गंभीर मुद्दे पर ऐसी बैठकें होती हैं, तो प्रधानमंत्री चाहे वे मनमोहन सिंह हों, अटल बिहारी वाजपेयी हों, या पी.वी. नरसिम्हा राव... हमेशा उनमें शामिल हुए हैं. यह पहली बार है जब प्रधानमंत्री इसमें हिस्सा नहीं ले रहे हैं, जो कि दुर्भाग्यपूर्ण है.'

समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने कहा कि ईरान के प्रति सरकार के रवैये से देश में ही संकट पैदा हो गया है. उन्होंने कहा कि 'हम शुरू से ही यह कहते आ रहे हैं कि इस पर चर्चा होनी चाहिए और सरकार को युद्ध की वजह से देश को जिन भी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है, उनके लिए तैयार रहना चाहिए.'

BJP ने विपक्ष के आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया दी और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर निशाना साधा. केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि सरकार सभी जरूरी कदम उठा रही है और उन्होंने एकता बनाए रखने की अपील की. उन्होंने कहा, 'कुछ लोग गैर-जिम्मेदाराना बयान दे रहे हैं. वे इसे एक नाकाम विदेश नीति या एक ठप पड़ी अर्थव्यवस्था बता रहे हैं. यह एक बड़ा सवाल है कि राहुल गांधी लोकसभा में विपक्ष के नेता हैं या फिर वे खुद देश के ही खिलाफ विपक्ष के नेता बन गए हैं. वे देश और देश की जनता के ही खिलाफ खड़े हो गए हैं.'

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