तिरुवनंतपुरम: केरल में मुख्यमंत्री पद को लेकर चले लंबे राजनीतिक ड्रामे के बाद आखिरकार कांग्रेस ने वीडी सतीशन के नाम पर मुहर लगा दी. लेकिन इस पूरी प्रक्रिया में एक बड़ा सवाल बना रहा- क्या केसी वेणुगोपाल का नाम सिर्फ एक ‘ट्रायल बैलून' था, जिसे राजनीतिक माहौल भांपने के लिए उछाला गया?
वेणुगोपाल क्यों पीछे रह गए
सूत्रों के मुताबिक, केसी वेणुगोपाल के नाम पर गंभीर विचार जरूर हुआ, लेकिन उनके मुख्यमंत्री बनने में दो बड़े व्यावहारिक अड़चनें थीं.
पहली- वे लोकसभा सांसद हैं, ऐसे में उन्हें इस्तीफा देना पड़ता.
दूसरी- किसी विधायक को भी सीट खाली करनी पड़ती, जिससे उपचुनाव की स्थिति बनती.
कांग्रेस आलाकमान और गांधी परिवार ने इस विकल्प को राजनीतिक तौर पर जोखिम भरा और अनावश्यक माना. ऐसे में वेणुगोपाल की दावेदारी धीरे‑धीरे कमजोर पड़ती गई.
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सतीसन की सियासी जिद और दबाव की राजनीति
दूसरी तरफ, 62 वर्षीय वीडी सतीशन पूरे घटनाक्रम में अपने रुख पर डटे रहे. उन्होंने साफ संदेश दे दिया था कि अगर उन्हें मुख्यमंत्री नहीं बनाया गया, तो वे किसी और सरकार में शामिल नहीं होंगे. उनके समर्थकों ने राज्यभर में प्रदर्शन शुरू कर दिए थे, जिससे पार्टी नेतृत्व पर दबाव बढ़ा. यह दबाव सिर्फ संगठन के अंदर ही नहीं, बल्कि सड़कों पर भी दिखाई देने लगा.
IUML का समर्थन बना गेमचेंजर
इस पूरे समीकरण में सबसे निर्णायक फैक्टर बना इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) का समर्थन. IUML ने खुलकर सतीसन को CM बनाने की वकालत की. गठबंधन के दूसरे दल भी उनके पक्ष में आए. वायनाड जैसे क्षेत्रों में IUML का प्रभाव देखते हुए कांग्रेस के लिए इसे नजरअंदाज करना मुश्किल था. जनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, अगर सतीशन को नजरअंदाज किया जाता, तो कांग्रेस के गठबंधन समीकरण बिगड़ सकते थे.
जनता बनाम विधायक: किसकी चली?
दिलचस्प बात यह है कि कांग्रेस के कई विधायक केसी वेणुगोपाल के पक्ष में बताए जा रहे थे. लेकिन हाईकमान ने अंत में जनता की धारणा, संगठन के मूड और चुनावी प्रदर्शन को ज्यादा महत्व दिया. सतीशन को 2026 चुनाव में UDF की जीत का मुख्य चेहरा माना गया, और यही उनकी सबसे बड़ी ताकत बनी.
वीडी सतीशन: एक नजर में प्रोफाइल
राजनीतिक सफर
- NSUI और छात्र राजनीति से शुरुआत
- केरल हाईकोर्ट में प्रैक्टिसिंग वकील
- 2001 में पहली बार परवूर से विधायक
- 6 बार लगातार विधानसभा चुनाव जीते (2001-2026)
- 2021-2026: नेता विपक्ष
2026 चुनाव में प्रदर्शन
परवूर सीट से CPI के ई.टी. टैसन मास्टर को ~20,600 वोटों से हराया. वे UDF की बड़ी जीत में प्रमुख रणनीतिकार और चेहरा माने जा रहे हैं.
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