- राहुल गांधी ने केरलम के सीएम पर फैसले से पहले केसी वेणुगोपाल से लंबी बात की थी
- वीडी सतीशन को कांग्रेस का नया सीएम बनाया है, विधानसभा रिजल्ट के 10 दिन बाद फैसला
- सूत्रों का कहना है कि राहुल गांधी केसी वेणुगोपाल को मिशन 2029 पर लगाने की तैयारी में हैं
केरलम में सीएम की कुर्सी बड़ी रस्साकशी के बाद वीडी सतीशन के हिस्से में गई. केसी वेणुगोपाल यहां खाली हाथ रहे. हालांकि, कांग्रेस में ये फैसला करना आसान नहीं रहा. इसके लिए राहुल गांधी को काफी मशक्कत करनी पड़ी. दिल्ली में जब आज राहुल गांधी की मुलाकात के सी वेणुगोपाल के साथ हुई तब प्रियंका गांधी भी मौजूद थीं.
घंटों तक चली बैठक
वैसे तो यह बैठक थोड़ी देर के लिए होनी थी मगर ये बैठक घंटों चली. तब तक यह खबर भी आ गई कि दो पर्यवेक्षक जो पिछली बार भी तिरुवनंतपुरम गए थे वो एक बार फिर जाएंगे और साथ में केरल की प्रभारी दीपा दासमुंशी भी रहेंगी. जब निजी चार्टर्ड विमान में जाने वाले यात्रियों की सूची आई उसमें से के सी वेणुगोपाल का नाम गायब था. दिल्ली में इस यात्रा की सूची घूमने लगी. जब यह यब हो रहा था तब राहुल गांधी, प्रियंका और के सी वेणुगोपाल की मुलाकात चल रही थी.
केसी को नहीं छोड़ना चाहते हैं राहुल
उधर के सी वेणुगोपाल के लोदी इस्टेट के आवास पर सन्नाटा पसरा हुआ था. कुछ ऐसा ही नजारा एक दिन पहले भी के सी वेणुगोपाल के घर पर दिखाई दिया था खासकर राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे की मुलाकात के बाद. वैसे तो कांग्रेस के नेता जो दिल्ली या अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी में हैं सब चाहते थे कि के सी वेणुगोपाल केरल चले जाएं मगर राहुल गांधी के मन में कुछ और था. सूत्रों के मुताबिक राहुल गांधी के सी को संगठन महासचिव बनाए रखना चाहते हैं और यह भी कहा जा रहा है कि जिस ढंग से के सी ने राहुल गांधी को साधा है या कहें राहुल का विश्वास जीता है आगे चल कर वे कांग्रेस के अध्यक्ष की कुर्सी तक जा सकते हैं.
एंटनी की सलाह काम कर गई
जहां तक के सी वेणुगोपाल के मुख्यमंत्री ना बनने की बात है तो यह कहा जा रहा है कि जिस तरह से राहुल गांधी ने विचार विमर्श के लिए केरल के और भी नेताओं को संर्पक करना शुरू किया तभी लग गया था कि वो किसी भी निर्णय से पहले सब को सुन लेना चाहते हैं. सबकी फीडबैक यही था कि विधायक में से किसी को मुख्यमंत्री बनना चाहिए. यहां पर पूर्व रक्षा मंत्री और केरल के पूर्व सीएम ए के एंटनी की राय भी महत्वपूर्ण रही जो सोनिया गांधी के विश्वस्त रहे हैं. उनका भी मानना था कि कांग्रेस को दो उपचुनाव से बचना चाहिए क्योंकि के सी के मुख्यमंत्री बनने पर लोकसभा और विधानसभा दोनों का चुनाव करवाना पड़ता, किसी विधायक को कुर्सी छोड़नी पड़ती.
मुस्लिम लीग वाला पेच भी था
यहां पर वायनाड सीट का भी मामला था जहां से प्रियंका गांधी सांसद है. वहां पर कांग्रेस को मुस्लिम लीग के समर्थन की जरूरत रहती है. वैसे भी मुस्लिम लीग के 22 विधायक हैं और कांग्रेस की सरकार उन पर निर्भर कर रही है और मुस्लिम लीग वी डी सतीशन के पक्ष में थी. यह भी कहा जा रहा है कि 2029 के लोकसभा चुनाव को देखते हुए राहुल गांधी ने के सी वेणुगोपाल को रोका ताकि केरल, तमिलनाडु, कनार्टक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में कांग्रेस मजबूती से चुनाव लड़े और इसकी जिम्मेदारी के सी की होगी.
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