- पीयूष गोयल ने कहा है कि अमेरिका के साथ बातचीत में भारत ने अपने जरूरी सेक्टर पूरी तरह से सुरक्षित रखे हैं.
- उन्होंने विपक्षी आरोपों का भी जवाब दिया, जिनमें कहा गया था कि यह डील किसानों के खिलाफ है.
- गोयल ने साफ किया कि कृषि और किसानों का हित हमेशा सरकार की प्राथमिकता है.
लोकसभा में बुधवार को केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने इंडिया-यूएस ट्रेड डील की जानकारी देते हुए कहा कि इस डील के तहत भारत के किसानों और संवेदनशील सेक्टर जैसे कृषि और डेयरी का पूरा ध्यान रखा गया है. गोयल ने कहा कि अमेरिका के साथ बातचीत में भारत ने अपने जरूरी सेक्टर पूरी तरह से सुरक्षित रखे हैं.
अपने संबोधन के दौरान पीयूष गोयल ने कहा कि अमेरिका के साथ बातचीत में भारतीय पक्ष ने खास तौर पर कृषि और डेयरी सेक्टर की सुरक्षा सुनिश्चित करने में सफल रहा है. उन्होंने कहा कि 140 करोड़ भारतीयों की आवश्यकताओं की सुरक्षा करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है.
पीयूष गोयल ने कहा, "भारत और अमेरिका इस डील को लेकर नियमित रूप से चर्चा कर रहे हैं. दोनों पक्षों ने विभिन्न स्तरों पर गहन बातचीत की है."
उनका कहना था कि दोनों पक्ष अपनी-अपनी अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों की रक्षा करते हुए इस समझौते को अंतिम रूप देने में सफल रहे हैं.
टैरिफ घट कर 18% होने पर बोले पीयूष गोयल
वाणिज्य मंत्री ने कहा, "प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फोन पर चर्चा की और इसके बाद ट्रंप ने अमेरिका के टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत करने की घोषणा की. मैं इस बात पर जोर देना चाहता हूं कि यह अमेरिका द्वारा कई प्रतिस्पर्धी देशों पर लगाए गए शुल्क से कम है."
उन्होंने विपक्षी आरोपों का भी जवाब दिया, जिनमें कहा गया था कि यह डील किसानों के खिलाफ है. गोयल ने साफ किया कि कृषि और किसानों का हित हमेशा सरकार की प्राथमिकता है. इसके अलावा, उन्होंने कहा कि यह डील नए कारोबार और रोजगार के मौके भी देगी.
पीयूष गोयल बोले, "विमानन, डेटा केंद्र और परमाणु ऊर्जा समेत विभिन्न क्षेत्रों में हमें अपनी क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता होगी. अमेरिका इन क्षेत्रों में अग्रणी देश है."
गोयल ने यह भी कहा कि विपक्ष ने संसद में हंगामा करके डील पर सही चर्चा नहीं होने दी. उनका कहना था कि इस तरह का व्यवधान देश के हित में नहीं है.

लोकसभा में गतिरोध
बता दें कि बुधवार को भी लोकसभा में विपक्ष के हंगामे के बीच गतिरोध बरकरार रहा. यह गतिरोध संसद के इस बजट सत्र में लगातार चल रहा है और इसके केंद्र में पूर्व सेना प्रमुख नरवणे की एक किताब है.
आज राहुल गांधी ने ये भी कहा कि प्रधानमंत्री यदि लोकसभा में आए तो मैं उन्हें पूर्व सेनाध्यक्ष नरवणे की किताब भेंट करूंगा. उन्होंने नरवणे के ‘संस्मरण' का हवाला देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई और पूरी जिम्मेदारी तत्कालीन सेना प्रमुख पर डाल दी.
विपक्षी सदस्यों के हंगामे के कारण बुधवार को लोकसभा की बैठक एक बार के स्थगन के बाद दोपहर दो बजे तक फिर स्थगित कर दी गई.
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