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अब सुप्रीम कोर्ट में वकील के रूप में दिखेंगी CM ममता बनर्जी, SIR के खिलाफ खुद संभालेंगी मोर्चा

उच्चतम न्यायालय की वेबसाइट के अनुसार प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत , न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ मोस्तरी बानू और टीएमसी सांसदों डेरेक ओ ब्रायन व डोला सेन की तीन याचिकाओं पर सुनवाई करेगी.

अब सुप्रीम कोर्ट में वकील के रूप में दिखेंगी CM ममता बनर्जी, SIR के खिलाफ खुद संभालेंगी मोर्चा
  • सुप्रीम कोर्ट बुधवार को पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण के खिलाफ ममता बनर्जी की याचिका पर सुनवाई करेगा.
  • ममता बनर्जी खुद सुप्रीम कोर्ट में उपस्थित होकर इस मामले में अपनी दलीलें पेश कर सकती हैं.
  • तृणमूल कांग्रेस ने ममता बनर्जी को जनता का वकील और विपक्षी रुख को शैतानी वकील बताया है.
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नई दिल्ली:

सुप्रीम कोर्ट पश्चिम बंगाल में जारी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के खिलाफ राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की याचिका पर बुधवार को सुनवाई करेगा. बनर्जी इसी मामले में दायर अन्य याचिकाओं पर बुधवार को होने वाली अहम सुनवाई के दौरान उच्चतम न्यायालय में मौजूद रह सकती हैं.

तृणमूल कांग्रेस ने अपने आधिकारिक 'X' (पूर्व में ट्विटर) हैंडल पर एक पोस्ट साझा की है, जिसमें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी फाइलों के साथ सुप्रीम कोर्ट की ओर बढ़ती दिखाई दे रही हैं. इस पोस्ट के कैप्शन में उन्हें 'People's Advocate' (जनता का वकील) बताते हुए विपक्षी रुख को 'Devil's Advocate' करार दिया गया है. साथ ही, तस्वीरों पर संदेश लिखा है कि वह सुप्रीम कोर्ट में SIR (Special Intensive Revision) के खिलाफ अपनी याचिका और इस कानूनी चुनौती को स्वीकार करती हैं.

उच्चतम न्यायालय की वेबसाइट के अनुसार प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत , न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ मोस्तरी बानू और टीएमसी सांसदों डेरेक ओ ब्रायन व डोला सेन की तीन याचिकाओं पर सुनवाई करेगी.

सूत्रों ने कहा कि एलएलबी की डिग्री धारक मुख्यमंत्री बनर्जी सुनवाई में उपस्थित होकर अपनी दलीलें पेश कर सकती हैं. बनर्जी ने यह याचिका 28 जनवरी को दायर की थी. इस मामले में उन्होंने निर्वाचन आयोग (ईसी) और पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को पक्ष बनाया था. बनर्जी ने इससे पहले मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) को पत्र लिखकर चुनाव से पहले राज्य में जारी “मनमाने और खामियों से भरे” एसआईआर को रोकने का आग्रह किया था.

उच्चतम न्यायालय ने 19 जनवरी को विभिन्न निर्देश जारी करते हुए कहा था कि पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और किसी को असुविधा नहीं होनी चाहिए.

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