धान कटाई के मौजूदा सीजन के दौरान हरियाणा और यूपी में पराली जलाने की घटनाएं सामने आने और मध्य प्रदेश-राजस्थान में पराली जलाने की घटनाओं में हो रही बढ़ोतरी को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है. मंगलवार को केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह और पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने मंगलवार को पराली प्रबंधन पर एक महत्वपूर्ण बैठक की. बैठक में मुख्य तौर पर प्रभावित राज्यों में पराली (फसल अवशेष) प्रबंधन को मिशन मोड में आगे बढ़ाने की रणनीति पर चर्चा हुई.
बैठक में दोनों केंद्रीय मंत्रियों ने अधिकारियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिया - फसल कटाई और रबी बुवाई के बीच समय बहुत कम बचा है, इसलिए अब जमीन पर उतारकर युद्ध स्तर पर काम करना जरूरी हो गया है. जिला स्तर पर जिलाधिकारियों (कलेक्टर्स) से सख्त निगरानी और पराली का व्यावहारिक समाधान निलकने को लेकर निर्देश जारी करने का भी फैसला किया गया है.
पराली खेत में बनती है जैविक खाद
कृषि मंत्रालय द्वारा जारी एक नोट के मुताबिक, "बैठक में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि धान की कटाई चल रही है और किसान को अगली फसल की बुवाई की जल्दी है. ऐसे में केवल यह कह देना कि पराली मत जलाओ, काफी नहीं होगा. हमें किसान को आसान, सुलभ और सस्ता विकल्प देना होगा. पराली जलाने से न सिर्फ वायु प्रदूषण होता है, बल्कि मिट्टी के मित्र कीट और पोषक तत्व जलकर राख हो जाते हैं. पराली खेत में मिले तो जैविक खाद बनती है और खेत से बाहर जाए तो बायो-सीएनजी, बायो-इथेनॉल, बिजली और चारे के रूप में किसान की अतिरिक्त आमदनी का जरिया बनती है'.
कृषि मंत्रालय के पास मौजूद आकड़ों के मुताबिक, 15 सितंबर से 12 अक्टूबर के बीच पिछले साल की तुलना में हरियाणा में पराली जलाने की घटनाओं में 53.3% और उत्तर प्रदेश में लगभग 32% की कमी आई है. पंजाब में भी कुछ गिरावट दर्ज हुई है.
लेकिन इस अवधी के दौरान मध्य प्रदेश में पराली जलाने के मामले 55 से बढ़कर 277 (452% की वृद्धि) और राजस्थान में 20 से बढ़कर 60 (200% की वृद्धि) हो गए हैं, जिसको लेकर चिंता बढ़ रही है. कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने इन दोनों राज्यों की सरकारों को आगाह करते हुए कहा है कि प्रभावित जिलों और गांवों की पहचान कर तत्काल पहल शुरू की जाये.
पराली संकट से निपटने की मुहीम शुरू
केंद्र सरकार द्वारा अब तक राज्यों को 3.54 लाख से अधिक फसल अवशेष प्रबंधन मशीनें उपलब्ध कराई गयी हैं
चालू वित्त वर्ष 2026-27 में 26,109 और नई मशीनें दी गई हैं.
केंद्रीय सर्वेक्षण में पंजाब में लगभग 40% और हरियाणा में 48% पुरानी मशीनें बंद या गैर-कार्यशील पाई गई हैं.
नई मशीनें बांटने के साथ-साथ पुरानी बंद पड़ी मशीनों की तत्काल मरम्मत कराकर उन्हें चालू करना जारी कर दिया गया है
छोटे और सीमांत किसानों को सस्ती दरों पर मशीनें मुहैया करने की तैयारी है.
अब तक फसल अवशेष प्रबंधन योजना के तहत साल 2018-19 से 2025-26 के बीच केंद्र सरकार राज्यों को 4,266.47 करोड़ रुपये राशि जारी कर चुकी है. इस दौरान पंजाब को ₹2,056.50 करोड़, हरियाणा को ₹1,171.71 करोड़, उत्तर प्रदेश को ₹868.67 करोड़ और मध्य प्रदेश को ₹59 करोड़ रुपये जारी किये गए. मौजूदा वित्तीय साल 2026-27 के लिए 592.57 करोड़ रुपये का आवंटन तय किया गया है, और अब तक 430.87 करोड़ रुपये जारी भी किए जा चुके हैं.
कृषि मंत्रालय ने ये आंकड़े जारी करते हुए मंगलवार को कहा, "केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने निर्देश दिए हैं कि जिन क्षेत्रों में सूखे की स्थिति है, वहां पराली को चारे के रूप में सुरक्षित संग्रहित कर मवेशियों तक पहुंचाया जाए. इसके साथ ही, थर्मल पावर प्लांट्स में पराली पेलेट्स की को-फायरिंग, कंप्रेस्ड बायो गैस (CBG) और 2G बायो-इथेनॉल संयंत्रों से किसानों की सीधी सप्लाई चेन जोड़ी जाए. पूसा-44 जैसी अधिक समय लेने वाली किस्मों के स्थान पर कम अवधि वाली उन्नत किस्मों (जैसे पूसा 2090, PR126 आदि) को बढ़ावा दिया जाए ताकि कटाई के बाद खेत खाली करने का पर्याप्त समय मिल सके".
इस बैठक में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी, दिल्ली-एनसीआर सहित प्रमुख राज्यों- पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कृषि मंत्री, केंद्रीय कृषि सचिव अतीश चंद्रा, केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन सचिव नरेंद्र भूषण सहित केंद्र और प्रभैत राज्यों के वरिष्ठ अधिकारीयों ने भाग लिया.
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