विज्ञापन

नफरत, जंग की सनक और नजरअंदाज अवाम... आजादी के 79 साल बाद कितना पीछे छूट गया पाकिस्तान?

पाकिस्तान आज भी दुनिया भर में आतंकवाद की नर्सरी के रूप में जाना जाता है जबकि भारत को स्पेस टेक पावर के रूप में जाना जाता है. आखिर एक साथ आजाद हुए दोनों देशों के बीच इतना बड़ा फासला कैसे पैदा हुआ?

नफरत, जंग की सनक और नजरअंदाज अवाम... आजादी के 79 साल बाद कितना पीछे छूट गया पाकिस्तान?
भारत औ पाकिस्तान, एक साथ आजाद हुए दो देशों के बीच इतना बड़ा फासला कैसे पैदा हुआ?
  • पाकिस्तान के PM शहबाज शरीफ ने भारत को कड़ा जवाब देने की चेतावनी दी है और सैन्य संघर्ष की बातें कही हैं
  • वही भारत के PM नरेंद्र मोदी ने सद्भाव और भाईचारे को बढ़ावा देने और विकसित भारत के निर्माण का आह्वान किया है
  • दोनों बयान के बीच का फर्क भारत और पाकिस्तान की सोच के बड़े फासले को दिखाता है

बयान नंबर 1- “हमारे लिए पानी की हर बूंद लाल रेखा है. अगर भारत सही रास्ते पर नहीं चलता है, तो हम उसे सीधा जवाब देंगे... अगर कोई पाकिस्तान की संप्रभुता और सुरक्षा को चुनौती देता है, तो उसे मई 2025 से भी ज्यादा कड़ा जवाब दिया जाएगा.”--- पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ

बयान नंबर 2- "यह दिन हमारे देश में सद्भाव और भाईचारे को बनाए रखने के हमारे संकल्प को और मज़बूत करे. हम सब मिलकर विकसित भारत के निर्माण की दिशा में काम करें."--- भारत के पीएम नरेंद्र मोदी

दोनों बयान कुछ ही घंटों के अंतर में आए, लेकिन दोनों के बीच का फर्क भारत और पाकिस्तान की सोच के बड़े फासले को दिखाता है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ आजादी दिवस के एक दिन पहले भी जहर उगल रहे थे, जंग की बात कर रहे थे, खून खराबे का सपना देख रहे थे. दूसरी तरफ भारत के प्रधानमंत्री ने जब बंटवारे की दर्दनाक याद दिलाने वाले विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर पोस्ट भी किया तो उसमें सद्भभावना की बात थी, विकसित भारत के निर्माण का सपना था.

सच्चाई यह है कि भारत और पाकिस्तान को एक ही वक्त आजादी मिली थी, लेकिन 79 साल बाद दोनों की तस्वीर बिल्कुल अलग है. भारत दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में अपनी जगह बना रहा है, टेक्नोलॉजी से लेकर अंतरिक्ष तक आगे बढ़ रहा है. वहीं पाकिस्तान आज भी राजनीतिक अस्थिरता, आतंकवाद, सेना के दखल महंगाई और कर्ज जैसी समस्याओं से जूझ रहा है. आखिर एक साथ आजाद हुए दोनों देशों के बीच इतना बड़ा फासला कैसे पैदा हुआ? आइए, इसी पर एक नजर डालते हैं.

आतंकवाद

पाकिस्तान आज भी दुनिया भर में आतंकवाद की नर्सरी के रूप में जाना जाता है. इस देश ने आतंकवाद को स्टेट पॉलिसी जैसा इस्तेमाल किया है. पाकिस्तान की सेना और सरकार इन आतंकवादियों का इस्तेमाल दूसरे देशों में अपने नापाक हितों को साधने के लिए करती रही है. लेकिन उसने यह सब किया अपनी अवाम के खून की कीमत पर. इन आतंकवादियों ने सबसे अधिक खून पाकिस्तान के लोगों का ही बहाया है. आंकड़े इसकी भयावहता बयान करते हैं. इस्लामाबाद स्थित थिंक टैंक, 'पाकिस्तान इंस्टीट्यूट फॉर कॉन्फ्लिक्ट एंड सिक्योरिटी स्टडीज़' (PICSS) की रिपोर्ट के अनुसार जुलाई का महीना 2026 का सबसे घातक महीना साबित हुआ. इस दौरान एक महीने में ही पाकिस्तान भर में कम से कम 606 लोग मारे गए और 232 घायल हुए. जुलाई में पाकिस्तान सुरक्षा बलों के कम से कम 112 जवान मारे गए. यह जनवरी 2023 के बाद से एक महीने में हुई मौतों की सबसे बड़ी संख्या है और पिछले एक दशक से ज्यादा समय में दर्ज की गई दूसरी सबसे बड़ी संख्या है.

पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने बताया है कि 2026 की शुरुआत से अब तक पाकिस्तान में 3145 आतंकवादी घटनाएं दर्ज की गई हैं. इन हमलों में आत्मघाती बम धमाके, कामिकाजे ड्रोन, छोटे हथियारों से घात लगाकर किए गए हमले या इन तीनों का मिला-जुला रूप शामिल है.

बड़े पैमाने पर सैन्य अभियानों के बाद कई सालों तक गिरावट देखने के बाद, 2022 से पाकिस्तान में हिंसा लगातार बढ़ी है. आतंकवाद से जुड़ी कुल मौतों की संख्या 2022 में 971 से बढ़कर 2025 में 4,001 हो गई, जिससे पाकिस्तान दुनिया भर में आतंकवाद से जुड़ी सबसे ज्यादा मौतों वाला देश बन गया है.

गरीबी और कर्ज का बोझ

'डॉन' की एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, 2024-25 में पाकिस्तान में गरीबी दर बढ़कर 28.9 प्रतिशत हो गई है, जो 2018-19 में 21.8 प्रतिशत थी. इसका मतलब है कि अब हर 10 में से लगभग 3 पाकिस्तानी गरीबी रेखा से नीचे रह रहे हैं. वहीं भारत में अत्‍यधिक गरीबी की दर वर्ष 2022-23 में 5.3 प्रतिशत है और निम्‍न, मध्‍यम आय गरीबी दर 23.9 प्रतिशत है. विश्‍व बैंक के अनुसार भारत में गैर-मौद्रिक गरीबी को कम करने के लिए उल्‍लेखनीय कदम उठाए हैं. विश्‍व बैंक के गरीबी अनुमानों के साथ-साथ गरीबी रेखा पर तेंदुलकर कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार गरीबी अनुमान भारत में तेजी से कम होती गरीबी को दर्शाते हैं.

वर्ल्ड बैंक के ताजा GDP डेटा के मुताबिक, भारत की अर्थव्यवस्था लगभग 3.96 ट्रिलियन डॉलर की है, जबकि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था करीब 407 अरब डॉलर की है. इसका मतलब है कि भारत की अर्थव्यवस्था पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था से लगभग 10 गुना बड़ी है. 

स्पेस एंड टेक की बात करें तो भारत की पहचान स्पेस पावर के रूप में है और पाकिस्तान उससे दशकों पीछे. भारत के चंद्रयान प्रोग्राम को शुरू करने और चंद्रमा की खोज में बड़ी उपलब्धियां हासिल करने के दो दशक से भी ज्यादा समय बाद, पाकिस्तान 2029 में अपना पहला लूनर रोवर, 'जिन्ना-1', चंद्रमा पर भेजने की तैयारी कर रहा है. लेकिन वह इसके लिए चीन के रॉकेट की सवारी करेगा. जबकि भारत आज दूसरे देशों के सैटेलाइट को अंतरिक्ष में पहुंचाता है. भारत में तो प्राइवेट स्पेस कंपनी भी अंतरिक्ष में पहुंच गई है.

अपने ही लोगों को बनाया दुश्मन

पाकिस्तान के कई इलाकों में बढ़ती अस्थिरता से जूझ रही शहबाज सरकार भारत को धमकाकर अपनी सख्ती दिखाने की कोशिश कर रही है. जबकि उसके अपने नागरिक बढ़ते आर्थिक दबाव और अस्थिरता के बीच हिंसा, राजनीतिक दमन और असुरक्षा का सामना कर रहे हैं. पाकिस्तान की राष्ट्रीय एकता की जो छवि उसने बहुत जतन से बनाई थी, उसे बलूचिस्तान में सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक का सामना करना पड़ रहा है. वहां के लोग पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस, यानी 14 अगस्त को "काला दिवस" ​​के तौर पर मना रहे हैं. पाकिस्तान की सेना यहां के लोगों पर फाइटर जेट से हमले करती है, उनके साथ दोयम दर्जे के नागरिकों की तरह बर्ताव करती है. इसी तरह पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में लंबे समय से विरोध-प्रदर्शन और झड़पें हो रही हैं. साथ ही वहां सेना की गोलीबारी में सैकड़ों आम लोगों की मौत और 2026 के धांधली वाले "तथाकथित" विधानसभा चुनावों के संचालन को लेकर गंभीर सवाल भी उठ रहे हैं. 

यह भी पढ़ें: पाकिस्तान में आजादी का जश्न या ‘गोलीबारी फेस्टिवल'? कराची में 1 की मौत, 94 घायल

राजनीतिक संकट

पाकिस्तान का राजनीतिक संकट भी उतना ही गंभीर है. सेना का दबदबा चरम पर है. शहबाज शरीफ को पीछे छोड़कर आर्मी चीफ मुनीर ही विदेश नीति तय कर रहे हैं. पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान जेल में हैं, जबकि उनके बेटों, सुलेमान खान और कासिम खान ने अपने पिता की परिवार, वकीलों और डॉक्टरों तक पहुंच को लेकर चिंता जताई है.

कई मामलों में दोषी ठहराए जाने के बाद से इमरान खान 2023 से जेल में हैं. उन्होंने और उनके समर्थकों ने बार-बार आरोप लगाया है कि उन पर चल रहे मामले राजनीतिक कारणों से प्रेरित हैं और उनका मकसद उन्हें राजनीति में वापसी करने से रोकना है. कई बार उनकी मौत की अफवाह भी उड़ी है. पाकिस्तान के सबसे प्रमुख विपक्षी नेता की लगातार जेल में कैद और उनकी पार्टी 'पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ' (PTI) पर की गई कार्रवाई ने लोकतांत्रिक विश्वसनीयता के मामले में इस्लामाबाद के दावों को और कमजोर कर दिया है.

ऐसा नहीं है कि भारत ने सबकुछ पा लिया है. भारत के सामने आज भी कई बड़ी चुनौतियां हैं, लेकिन फर्क यह है कि भारत आगे की ओर देख रहा है. वह अपनी कमियों को पहचानकर उन्हें दूर करने की कोशिश कर रहा है और आने वाले कल की तैयारी कर रहा है. वहीं पाकिस्तान अभी भी राजनीतिक अस्थिरता, आर्थिक संकट, आतंकवाद और सेना के दबदबे के पुराने चक्र से बाहर नहीं निकल पाया है. उसकी जुबान पर भारत के खिलाफ नफरत है, नई जंग शुरू करने की ख्वाहिश है. सवाल सिर्फ यह नहीं कि दोनों देशों ने 79 साल में क्या हासिल किया, बल्कि यह भी है कि आगे बढ़ने के लिए किसने क्या सीखा.

यह भी पढ़ें: पाकिस्तान आजादी के जश्न में भी उगल रहा जहर, गीदड़भभकी बता रही ऑपरेशन सिंदूर की चोट अबतक दे रही दर्द

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
India Independence Day, Pakistan Independence Day, India Pakistan
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com