- दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक के खिलाफ छात्रों का आंदोलन हुआ था, जिससे धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हुआ
- छात्र झारखंड लोक सेवा आयोग में भ्रष्टाचार के खिलाफ अनुशासित आंदोलन कर रहे हैं और पुलिस ने बल प्रयोग भी किया है
- रांची के आंदोलन में अभद्र भाषा या गाली-गलौज का प्रयोग नहीं हुआ
जुलाई में दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक के खिलाफ छात्रों का जमावड़ा हुआ था. करीब सवा महीने चले आंदोलन के बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हुआ और तब जाकर प्रदर्शन समाप्त हुआ. इस प्रदर्शन के बाद से ही जेन जी की चर्चाएं तेज हैं. लेकिन अगस्त महीना झारखंड में हो रहे आंदोलन के चलते चर्चा में है. राजधानी रांची में छात्रों ने झारखंड लोक सेवा आयोग में भ्रष्टाचार और अनियमितता के खिलाफ आंदोलन छेड़ रखा है. सोमवार को तो छात्रों ने झारखंड विधानसभा के बाहर ही डेरा डाल दिया. इस घेराव को हटाने के लिए पुलिस ने बल प्रयोग भी किया है. लेकिन यहां का आंदोलन जंतर-मंतर के मुकाबले एक मामले में अलग है.
रांची में प्रदर्शन करने वाले भी Gen-Z हैं और दिल्ली में भी जेन जी ही थे. लेकिन बड़ा अंतर यह है कि दिल्ली में जहां गाली-गलौज और अभद्र भाषा का प्रयोग भी देखा गया, लेकिन रांची में ऐसा कुछ नहीं है. यहां परंपरागत छात्र प्रदर्शन दिखा और वे पूरी तरह अपने आंदोलन पर फोकस कर रहे हैं. उनके टारगेट पर कोई व्यक्ति, सरकार नहीं है बल्कि उनकी मांग व्यवस्था में बदलाव की है. यहां जंतर मंतर के आंदोलन की तरह किसी का इस्तीफा भी नहीं मांगा गया है. अब तक आंदोलन अनुशासित रहा है. इसके अलावा यह आंदोलन सोनम वांगचुक जैसी किसी चर्चित हस्ती के अनशन के चलते चर्चा में नहीं आया है बल्कि पूरी तरह छात्र नेता ही इसे लीड कर रहे हैं.

शिबू सोरेन की तस्वीरें लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्र
इस आंदोलन के अनुशासन की देश भर में चर्चा हो रही है. कई बार पुलिस-प्रशासन की ओर से बल प्रयोग भी हुआ है, लेकिन अब तक छात्रों ने कोई उग्रता नहीं दिखाई है. यही नहीं जिस हेमंत सोरेन सरकार के खिलाफ वे प्रदर्शन कर रहे हैं, उसी के दिवंगत नेता शिबू सोरेन की तस्वीरें भी सम्मान के साथ लहरा रहे हैं. इसके अतिरिक्त अपनी मांगों के अलावा कोई अन्य बात नहीं कही गई है. किसी समाज, वर्ग को भी टारगेट नहीं किया गया है. दिल्ली के आंदोलन के दौरान सीधे पीएम नरेंद्र मोदी पर भी आपत्तिजनक टिप्पणियां हुईं, लेकिन रांची में ऐसा अब तक नहीं दिखा है. हेमंत सोरेन का नाम भी छात्र सम्मान से ले रहे हैं.
प्रदर्शन के दौरान ही हेमंत सोरेन को बधाई भी दी
उनकी बस इतनी अपील है कि सिस्टम में सुधार की मांग को स्वीकार किया जाए. सोनम वांगचुक वहां अनशन के लिए नहीं हैं, लेकिन खुद छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने मोर्चा संभाल रखा है. यहां किसी नेता के लिए अभद्र भाषा वाले पोस्टरों के बिना भी प्रभावी संदेश दिया जा रहा है. कभी ठेठ झारखंडी में तो कभी सहज हिंदी में बात करते छात्र अपनी मर्यादा लांघते नहीं दिखे हैं. यहां तक कि इन छात्रों ने हेमंत सोरेन को जन्मदिन पर बधाई भी दी.
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