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This Article is From Oct 08, 2025

ब्रिटिश PM स्टार्मर ने मुंबई में पढ़े भारत के कसीदे, '2028 तक तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होगा देश'

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री पद का कार्यभार संभालने के बाद यह कीर स्टार्मर की पहली भारत यात्रा है.

ब्रिटिश PM स्टार्मर ने मुंबई में पढ़े भारत के कसीदे, '2028 तक तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होगा देश'
  • ब्रिटेन के PM ने अपनी पहली भारत यात्रा के दौरान द्विपक्षीय व्यापार समझौते को आर्थिक विकास का लॉन्चपैड बताया
  • 125 सदस्यों का प्रतिनिधिमंडल मुंबई पहुंचा है, जिसमें प्रमुख ब्रिटिश कंपनियों के शीर्ष अधिकारी भी शामिल हैं
  • दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने और व्यापार को बढ़ावा देने के उपायों पर चर्चा होगी
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ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर बुधवार को अपनी दो दिवसीय भारत यात्रा के लिए मुंबई पहुंचे. प्रधानमंत्री पद का कार्यभार संभालने के बाद यह उनकी पहली भारत यात्रा है. यहां उन्होंने कहा कि भारत और ब्रिटेन के बीच हुआ व्यापार समझौता 2028 तक तीसरी सबसे बड़ी वैश्विक अर्थव्यवस्था बनने को तैयार भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापार और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए एक ‘‘लॉन्चपैड'' है.

स्टार्मर ब्रिटेन के व्यापार जगत के शीर्ष नेताओं, उद्यमियों और विश्वविद्यालय के कुलपतियों समेत 125 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ मुंबई पहुंचे हैं. स्टार्मर और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्विपक्षीय संबंधों को और बढ़ावा देने के तरीकों का पता लगाने के लिए बृहस्पतिवार को व्यापक वार्ता करेंगे.

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘हमने जुलाई में भारत के साथ एक बड़ा व्यापार समझौता किया था-जो किसी भी देश द्वारा किया गया सबसे अच्छा समझौता है लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती... यह केवल एक कागज का टुकड़ा नहीं है, यह विकास का एक ‘लॉन्चपैड' है. भारत 2028 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने वाला है और उसके साथ व्यापार तेज एवं सस्ता होने वाला है तो ऐसे में जो अवसर पैदा होने वाले हैं, वे अद्वितीय हैं.

स्टार्मर ने कहा कि भारत में विकास का मतलब ब्रिटिश लोगों के लिए देश में अधिक विकल्प, स्थिरता और रोजगार है.

ब्रिटिश प्रधानमंत्री की भारत यात्रा से ढाई महीने पहले दोनों देशों ने ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए थे. इस समझौते से बाजार तक पहुंच बढ़ेगी, शुल्कों में कटौती होगी और 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार दोगुना हो जाएगा. जुलाई में प्रधानमंत्री मोदी की लंदन यात्रा के दौरान इस ऐतिहासिक व्यापार समझौते पर मुहर लगी थी.

स्टार्मर की भारत यात्रा को लेकर एक ब्रिटिश विज्ञप्ति में कहा गया है कि इस यात्रा का लक्ष्य ब्रिटेन-भारत व्यापार समझौते से मिली गति को और आगे बढ़ाना है क्योंकि इससे दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल अर्थव्यवस्था तक ब्रिटिश व्यवसायों की पहुंच के द्वार खुल जाएंगे. इसमें कहा गया है कि जुलाई में ऐतिहासिक ब्रिटेन-भारत व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर के बाद भारत में आयातित ब्रिटिश वस्तुओं पर शुल्क कम हो जाएगा, दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल अर्थव्यवस्था के साथ व्यापार को ‘‘तेज गति'' देने के ‘‘दरवाजे'' ब्रिटिश व्यवसायों के लिए ‘‘अब खुल गए हैं."

रोल्स रॉयस, ब्रिटिश टेलीकॉम, डियाजियो, लंदन स्टॉक एक्सचेंज और ब्रिटिश एयरवेज जैसी प्रमुख कंपनियों के शीर्ष अधिकारी स्टार्मर के प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा हैं. ब्रिटेन के व्यापार एवं वाणिज्य मंत्री पीटर काइल ने कहा, ‘‘हमने दिखा दिया है कि भारत के साथ व्यापार बढ़ाने की हमारी महत्वाकांक्षा की कोई सीमा नहीं है - हम एक साल से भी कम समय में एक समझौते पर बातचीत फिर से शुरू करने से लेकर व्यापार जगत के 125 प्रतिभाशाली नेताओं को उसकी वित्तीय राजधानी में ले जाने तक पहुंच गए हैं.''

उन्होंने कहा , ‘‘हमारा समझौता भारत के साथ किसी भी देश द्वारा किया गया अब तक का सबसे अच्छा समझौता है और यह ब्रिटिश व्यवसायों को एक विशाल एवं निरंतर बढ़ते बाजार तक पहुंचने की कतार में सबसे आगे रखता है." उन्होंने कहा, ‘‘अब हम जमीनी स्तर पर काम कर रहे हैं और व्यवसायों को इस समझौते के लागू होने के बाद प्राप्त हुई बड़ी सफलताओं का पूरा लाभ उठाने के लिए तैयार करने के मकसद से हर संभव प्रयास कर रहे हैं ताकि हम घरेलू स्तर पर विकास, रोजगार और समृद्धि ला सकें.''

विज्ञप्ति के अनुसार, ब्रिटिश उत्पादों पर भारत का औसत शुल्क 15 प्रतिशत से घटकर तीन प्रतिशत हो जाएगा, जिसका अर्थ है कि भारत में शीतल पेय और सौंदर्य प्रसाधनों से लेकर कारों और चिकित्सा उपकरणों तक, उत्पाद बेचने वाली ब्रिटिश कंपनियों के लिए भारतीय बाजार में बिक्री करना आसान हो जाएगा. इसमें कहा गया है कि शुल्क को 150 प्रतिशत से घटाकर 75 प्रतिशत करने और फिर अगले 10 वर्षों में इसे और घटाकर 40 प्रतिशत करने से व्हिस्की उत्पादकों को विशेष रूप से लाभ होगा, जिससे ब्रिटेन को अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धियों पर बढ़त मिलेगी.

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

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