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This Article is From Nov 24, 2025

उज्जैन : महाकाल ने धारण किया सुदर्शन चक्र और त्रिशूल, भस्म आरती में भक्तों का तांता लगा

सोमवार को श्रृंगार विशेष रूप से इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा क्योंकि बाबा ने सुदर्शन चक्र और त्रिशूल धारण किए हुए मनोहारी स्वरूप में दर्शन दिए. यह अद्वितीय अलंकरण जैसे ही सामने आया, श्रद्धालुओं में हर्ष की लहर दौड़ गई और सभी ने हाथ जोड़कर बाबा का आशीर्वाद लेकर प्राप्त किया और अपनी मनोकामना मांगी.

उज्जैन : महाकाल ने धारण किया सुदर्शन चक्र और त्रिशूल, भस्म आरती में भक्तों का तांता लगा
  • बाबा महाकालेश्वर मंदिर में सोमवार सुबह विशेष पूजा और श्रृंगार के दौरान भक्तों ने दिव्य दर्शन किए और जयघोष किया
  • पुजारियों ने बाबा महाकाल का हरि ओम जल से अभिषेक कर पंचामृत से पारंपरिक विधि से पूजन संपन्न कराया
  • बाबा महाकाल ने सुदर्शन चक्र और त्रिशूल धारण करते हुए मनोहारी स्वरूप में दर्शन दिए, जिससे भक्त खुश हुए

विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग बाबा महाकालेश्वर के दरबार में सोमवार प्रातःकाल एक विशेष आध्यात्मिक माहौल देखने को मिला, जब मंदिर के पट खुलते ही पूरा परिसर 'जय श्री महाकाल' के जयघोष से गूंज उठा. सोमवार होने के कारण तड़के से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा और सभी ने उत्साहपूर्वक बाबा के दिव्य दर्शन किए. भस्म आरती के दौरान श्रद्धालुओं की भीड़ और अधिक बढ़ गई, जिससे उज्जैन की गलियां भी भक्तिमय रंग में रंग गईं. मंदिर के साथ ही आस-पास भी जय श्री महाकाल' के जयघोष से गूंज उठा.

पहले अभिषेक फिर श्रृंगार

सुबह सबसे पहले पुजारियों की ओर से बाबा महाकाल का हरि ओम जल से अभिषेक किया गया. इसके उपरांत पंचामृत दूध, दही, घी और शहद से पारंपरिक विधि-विधान के अनुसार पूजन सम्पन्न हुआ. अभिषेक के बाद बाबा का भव्य श्रृंगार किया गया, जिसने उपस्थित भक्तों का मन मोह लिया. हर कोई बाबा महाकाल का एक दर्शन करने के लिए लाइन में खड़ा रहा.

सोमवार को श्रृंगार विशेष रूप से इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा क्योंकि बाबा ने सुदर्शन चक्र और त्रिशूल धारण किए हुए मनोहारी स्वरूप में दर्शन दिए. यह अद्वितीय अलंकरण जैसे ही सामने आया, श्रद्धालुओं में हर्ष की लहर दौड़ गई और सभी ने हाथ जोड़कर बाबा का आशीर्वाद लेकर प्राप्त किया और अपनी मनोकामना मांगी.

फिर हुई भस्म आरती

श्रृंगार के बाद महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा को भस्म अर्पित की गई, जो उज्जैन की महाकाल परंपरा का सबसे महत्वपूर्ण और प्राचीन अनुष्ठान माना जाता है. भस्म आरती के मंत्रोच्चार, ढोल-नगाड़ों और शंखध्वनि ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया. आरती के दौरान उपस्थित श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो उठे और ‘महाकाल की जय' और ‘जय श्री महाकाल' के नारे पूरे परिसर में गूंजने लगे.

विशेष आरती में स्थानीय भक्तों के साथ-साथ दूर-दूर से आए यात्रियों ने भी हिस्सा लिया. कई श्रद्धालुओं ने कहा कि महाकाल बाबा के इस अलौकिक स्वरूप ने उनके मन को शांति और ऊर्जा से भर दिया.

मंदिर प्रशासन के अनुसार, त्योहारों के दिनों के समान ही सोमवार को भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे, जिससे महाकाल नगरी में धार्मिक माहौल पूरे दिन बना रहा.

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