- पेंशन नहीं मिली तो ट्रिपुरा ट्राइबल काउंसिल का बड़ा एक्शन, ग्रुप A और B अधिकारियों का वेतन रोका
- हाईकोर्ट के आदेश के बाद बड़ा फैसला, पेंशन भुगतान में देरी पर सख्ती
- पेंशन भुगतान विवाद ने बढ़ाई मुश्किलें, 5 अक्टूबर की सुनवाई पर नजर
त्रिपुरा ट्राइबल एरियाज ऑटोनॉमस डिस्ट्रिक्ट काउंसिल (TTAADC) ने एक पूर्व कर्मचारी की लंबित पेंशन और सेवानिवृत्ति लाभों के मामले में बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है. काउंसिल ने ग्रुप A और ग्रुप B श्रेणी के अधिकारियों का वेतन अगली सूचना तक रोकने का आदेश जारी कर दिया है. यह कार्रवाई त्रिपुरा हाईकोर्ट के निर्देश के बाद की गई है. मामला एक सेवानिवृत्त कर्मचारी से जुड़ा है, जिसने आरोप लगाया था कि रिटायरमेंट के कई महीने बाद भी उसे करीब 16.03 लाख रुपये के पेंशन और अन्य लाभ नहीं मिले हैं.
हाईकोर्ट के आदेश के बाद हुई कार्रवाई
त्रिपुरा ट्राइबल एरियाज ऑटोनॉमस डिस्ट्रिक्ट काउंसिल (TTAADC) ने 23 सितंबर को सार्वजनिक किए गए आदेश में ग्रुप A और ग्रुप B अधिकारियों का वेतन रोकने का फैसला लिया. यह कदम 9 सितंबर को त्रिपुरा हाईकोर्ट द्वारा दिए गए आदेश के बाद उठाया गया. अदालत में एक पूर्व कर्मचारी ने याचिका दाखिल कर शिकायत की थी कि 31 जनवरी 2025 को सेवानिवृत्त होने के बावजूद उसे पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभ नहीं मिले.
16.03 लाख रुपये के बकाये का मामला
याचिकाकर्ता का कहना था कि उसके पेंशन और अन्य रिटायरमेंट लाभों के रूप में लगभग 16.03 लाख रुपये लंबित हैं. मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने निर्देश दिया था कि जब तक इस समस्या का समाधान नहीं होता, तब तक ग्रुप C और ग्रुप D कर्मचारियों को छोड़कर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए.
17 सितंबर को जारी हुआ वेतन रोकने का आदेश
TTAADC के मुख्य कार्यकारी सदस्य चैतन्य मूर्ति ने कहा कि परिषद ने 17 सितंबर को आदेश जारी कर सभी ग्रुप A और ग्रुप B अधिकारियों का वेतन रोक दिया था. आदेश में स्पष्ट किया गया है कि अगली सूचना तक वेतन जारी नहीं किया जाएगा.
राज्य सरकार की भूमिका पर भी सवाल
हाईकोर्ट ने इस मामले में TTAADC के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, राज्य के वित्त सचिव और संबंधित जिला कोषागार अधिकारियों को भी मामले की जांच कर आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया है. हालांकि परिषद का कहना है कि जब तक राज्य के वित्त सचिव आवश्यक धनराशि जारी नहीं करते, तब तक लंबित भुगतान करना संभव नहीं है.
त्रिपुरा विधानसभा में विपक्ष के नेता और CPI(M) विधायक ने कहा 'यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और शर्मनाक है कि टीएमपी (TMP) द्वारा संचालित जनजातीय परिषद धन की कमी के कारण अधिकारियों को मासिक वेतन देने में विफल रही है. यह दर्शाता है कि पार्टी एक स्वायत्त जनजातीय परिषद तक को चलाने में सक्षम नहीं है.' उन्होंने कहा कि फंड की कमी के चलते अधिकारियों का वेतन रोकना परिषद के प्रशासनिक और वित्तीय प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
5 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई
मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर को प्रस्तावित है. यह सुनवाई ऐसे समय होगी जब TTAADC के अंतर्गत आने वाली 587 ग्राम समितियों के चुनाव भी होने वाले हैं. इसलिए इस मामले को राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
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