- तेलंगाना के हैदराबाद में माओवादी कमांडर पसुनूरी नरहारी और उनकी पत्नी ने सरेंडर कर दिया है.
- नरहारी 1982 से नक्सली आंदोलन में एक्टिव था.
- मेदरा दानम्मा, जो माओवादी संगठन की स्टेट कमेटी मेंबर थी, पहले गिरफ्तार होकर जमानत पर वापस आई थी.
तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में मंगलवार को प्रतिबंधित माओवादी संगठन को बड़ा झटका लगा, जब बिहार-झारखंड स्पेशल एरिया कमेटी के सचिव और केंद्रीय कमेटी सदस्य पसुनूरी नरहारी उर्फ विष्णनाथ उर्फ सलई दा और उनकी पत्नी मेदरा दानम्मा उर्फ लता उर्फ पूनम ने डीजीपी सीवी आनंद के सामने आत्मसमर्पण कर दिया.
पुलिस के मुताबिक, यह सरेंडर संगठन के ईस्टर्न रीजनल ब्यूरो के लिए बड़ा नुकसान माना जा रहा है, जो पहले ही इस साल गिरफ्तारी, मुठभेड़ों और सरेंडर की वजह से कमजोर पड़ा है.
चार दशक से सक्रिय था नरहारी
64 वर्षीय नरहारी तेलंगाना के हनुमकोंडा जिले के काजीपेट मंडल के सोमिडी गांव का रहने वाला है. वह 1982 में रेडिकल स्टूडेंट्स यूनियन और वरिष्ठ माओवादी नेता पुली अंजैया से प्रभावित होकर नक्सली आंदोलन में शामिल हुआ था. बाद में उसने CPI (ML) पीपुल्स वॉर के तहत छत्तीसगढ़ के सुकमा क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाई और धीरे-धीरे संगठन में शीर्ष पदों तक पहुंच गया. 2017 में उसे केंद्रीय कमेटी सदस्य बनाया गया.
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हथियार बनाने में था माहिर
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, नरहारी तकनीकी यूनिट का विशेषज्ञ सदस्य था. उसे बंदूक, रॉकेट, ग्रेनेड, मोर्टार और बूबी ट्रैप बनाने और मेंटेनेंस में महारत हासिल थी. वह माओवादी कैडर को हथियार निर्माण और तकनीकी ऑपरेशन की ट्रेनिंग भी देता था. उसने साउथ बस्तर और नागपुर की तकनीकी टीमों में भी काम किया.
पत्नी भी थी टॉप माओवादी नेता
55 वर्षीय मेदरा दानम्मा आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले की रहने वाली है. वह भी बिहार-झारखंड स्पेशल एरिया कमेटी में स्टेट कमेटी मेंबर थी. दानम्मा लंबे समय तक माओवादी संगठन के तकनीकी और संगठनात्मक विंग में सक्रिय रही. वर्ष 2004 में उसे नागपुर में गिरफ्तार किया गया था, लेकिन 2011 में जमानत मिलने के बाद वह फिर संगठन में लौट आई थी.
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दोनों पर था भारी इनाम
पुलिस ने बताया कि नरहारी पर 25 लाख रुपये और दानम्मा पर 20 लाख रुपये का इनाम घोषित था. सरेंडर के बाद तेलंगाना सरकार ने अपनी पुनर्वास नीति के तहत दोनों को पात्र इनाम राशि सौंप दी है.
माओवादी नेटवर्क को गहरा झटका
अधिकारियों के मुताबिक, इस सरेंडर से खासकर बिहार-झारखंड स्पेशल एरिया कमेटी और ईस्टर्न रीजनल ब्यूरो को बड़ा झटका लगा है. पिछले कुछ समय में इन इलाकों में लगातार मुठभेड़ों, गिरफ्तारियों और सरेंडर के कारण माओवादी नेटवर्क कमजोर हुआ है. पुलिस का मानना है कि शीर्ष स्तर के नेताओं के इस तरह आत्मसमर्पण करने से संगठन के मनोबल पर असर पड़ेगा और आने वाले समय में और कैडर मुख्यधारा में लौट सकते हैं.
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