क्रेडिट कार्ड (Credit Card) से पेमेंट करने का चलन तेजी से बढ़ रहा है. शॉपिंग से लेकर हर तरह के बिल का पेमेंट क्रेडिट कार्ड से किया जा रहा है. क्रेडिट कार्ड से पेमेंट करना आसान भी होता है. हालांकि जब बैंक द्वारा क्रेडिट कार्ड का बिल दिया जाता है तो उन्हें पता चलता है कि पिछले महीने उन्होंने कितना खर्च कर दिया. वहीं बैंक क्रेडिट कार्ड यूजर्स को अपने पूरे बिल को भरने के साथ मिनिमम ड्यू का विकल्प भी देते हैं. ऐसे में लोग पूरा बिल भरने के बजाए मिनिमम ड्यू पेमेंट कर खुद को सुरक्षित समझते हैं. लेकिन उन्हें नहीं पता कि यह आदत उनके सिबिल स्कोर (Cibil Score) के गिरने की वजह बनेगा और बड़े कर्ज में फंसाएगा.
मिनिमम ड्यू उन लोगों के लिए अच्छा होता है जिनके पास अचानक से पैसे कम पड़ने के बाद वह उस महीने पूरा पेमेंट नहीं कर पाते. वहीं बैंक आपको मिनिमम ड्यू पेमेंट का विकल्प इसलिए देता है कि आपका अकाउंट डिफॉल्ट न हो जाए. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आपका कर्ज खत्म हो गया है.
क्या है मिनिमम ड्यू का खेल
बैंक आपको क्रेडिट कार्ड बिल पर मिनिमम ड्यू भरने का विकल्प देती है. जो आपके कुल बिल का करीब 5 प्रतिशत होता है. कुछ लोगों को लगता है मिनिमम ड्यू भर कर जुर्माने से बच गए, लेकिन इसका खेल यही से शुरू होता है. क्योंकि आपने जब मिनिमम ड्यू जमा किया तो बचा हुआ अमाउंट अब भी कर्ज है और इस पर बैंक भारी भरकम ब्याज वसूलना शुरू करता है. अगर आप हर महीने ही मिनिमम ड्यू जमा कर रहे हैं और सोचते हैं कि बाद में सारी रकम चुका देंगे, तो क्रेडिट कार्ड का ब्याज 30 से 40 प्रतिशत तक सालाना पहुंच सकता है. यानी जितना देर भुगतान में करेंगे आगे ब्याज जुटता जाएगा.
आप धीरे-धीरे कर्ज चुकाने के बजाए ब्याज चुकाने लगते हैं, इस तरह से आप कर्ज के जाल में फंसते चले जाते है.
सिबिल स्कोर पर पड़ता है असर
एक निजी बैंक में कार्यरत क्रेडिट कार्ड मैनेजर राहुल कुमार बताते हैं कि मिनिमम ड्यू भरने से भले ही आपका कार्ड डिफॉल्ट नहीं होता है. लेकिन लगातार ऐसा करने से बैंक को लगने लगता है कि आप कर्ज का भुगतान नहीं कर पा रहे हैं. इससे सिबिल यूटिलाइजेशन रेसीयो बढ़ जाता है और बैंक आपको रिस्की ग्राहक समझने लगता है. इसके साथ आपका सिबिल स्कोर भी घटने लगता है. वहीं जब आपको लोन की जरूरत होती है तो इसमें आपको दिक्कत आने लगती है.
ग्राहकों को सलाह दी जाती है कि क्रेडिट कार्ड के इस्तेमाल सही तरीके से की जाए तो यह फायदे का सौदा होता है. क्योंकि इससे कैशबैक और रिवार्ड प्वाइंट्स मिलते हैं. लेकिन जब लापरवाही की जाती है तो यह घाटे का सौदा हो जाता है.
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