पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती जिलों में होल्डिंग सेंटर्स के निर्माण और मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के 'डिटेक्ट-डिलीट-डिपोर्ट' यानी पता लगाओ-हटाओ-वापस भेजो के सख्त रुख के बाद, भारत-बांग्लादेश सीमा से सटे इलाकों में नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) सर्टिफिकेट के लिए आपाधापी मच गई है. अवैध प्रवासियों पर होने वाले एक्शन के डर और नागरिकता को सुरक्षित करने की छटपटाहट के बीच जिला मुख्यालयों में बने CAA वेरिफिकेशन सेंटर्स पर इन दिनों आवेदकों की भारी भीड़ उमड़ रही है.
मां-बाप का वोट कटा, अब CAA सर्टिफिकेट के लिए लगा रहे चक्कर
हबरा के रहने वाले 40 साल के संतोष दास मंगलवार को CAA वेरिफिकेशन सेंटर पर पहुंचे. यह सेंटर उत्तरी 24 परगना जिले के बारासात में पोस्ट ऑफिस सुपरिटेंडेंट के दफ्तर में बनाया गया है. दास अपने बुजुर्ग माता-पिता के लिए CAA वेरिफिकेशन सेंटर गए थे. उन्हें अभी तक CAA सर्टिफिकेट नहीं मिला है, जो दिसंबर 2025 से पेंडिंग है.
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NDTV से बात करते हुए संतोष ने कहा, 'हमने अपने माता-पिता दोनों के लिए भारतीय नागरिकता जारी करवाने के लिए अर्जी दी थी. वे 90 के दशक में बांग्लादेश से आए थे. उन्होंने कहा कि उनका परिवार भारत में आने के बाद खेती करके अपना गुजारा कर रहा है. मेरे माता-पिता इस चुनाव में वोट नहीं डाल पाए, लेकिन मैंने डाला. अब मौजूदा हालात को देखते हुए हमें एहसास हो गया है कि जो लोग बांग्लादेश से भारत आए हैं, उनके लिए CAA सर्टिफिकेट लेना बहुत जरूरी है.'

'हमारे लिए नागरिकता लेने जरूरी हो गया'
गोपाल दास ने कहा, '1993 में जब से मैं भारत आया हूं, तब से वोट डाल रहा हूं. हमारे नाम पर वोटर कार्ड, आधार कार्ड और राशन कार्ड जारी किए गए हैं. लेकिन मैं इस विधानसभा चुनाव में वोट नहीं डाल पाया, क्योंकि SIR के बाद हम दोनों के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए थे. CAA के तहत नागरिकता लेना अब हमारे लिए जरूरी हो गया है, वरना हम सभी सरकारी फायदों से वंचित रह जाएंगे.'

'पत्नी को नहीं मिली नागरिकता'
मतुआ समुदाय के सदस्य, 76 साल के हरकांत गायेन काफी खुशकिस्मत रहे, क्योंकि वे इस बार वोट डाल पाए. उन्हें चुनाव से पहले ही CAA सर्टिफिकेट मिल गया था. लेकिन हरकांत अपनी 65 वर्षीय पत्नी विचित्र के लिए CAA वेरिफिकेशन सेंटर के सामने लाइन में लगे थे. विचित्र चांदपारा की रहने वाली हैं और उन्हें अभी तक नागरिकता नहीं मिली है. मंगलवार को ये सभी लोग CAA वेरिफिकेशन की सुनवाई के लिए यहां आए थे.
गायेन ने NDTV को बताया, 'हम इंदिरा गांधी की हत्या से एक साल पहले साल 1983 में बांग्लादेश से आए थे. मुसलमानों के अत्याचारों के कारण हमें अपने गांव छोड़कर भागना पड़ा था. हम नहीं जानते कि अगर हमारे पास नागरिकता कार्ड नहीं होगा तो भविष्य में हमारे साथ क्या होगा.' उन्होंने यह भी कहा कि भारत में स्थायी नागरिकता मिलने के बाद वे खुश हैं.

'यह TMC सरकार द्वारा फैलाई गलतफहमी का नतीजा'
उत्तर 24 परगना के रहने वाले देबप्रसाद गायेन को भी नागरिकता मिल चुकी है. उन्होंने कहा, 'CAA वेरिफिकेशन सेंटर पर हम जिस तरह की भीड़ देख रहे हैं, वह पिछली TMC के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा फैलाई गई गलतफहमी का नतीजा है. उन्होंने गलत तरीके से मतुआ समुदाय के लोगों में डर पैदा कर दिया था. अब लोगों को एहसास हो गया है कि नागरिकता कितनी जरूरी है. इसीलिए वे सेंटरों की ओर जा रहे हैं.'
उत्तर 24 परगना के बागदा के एक और निवासी महानंद बिस्वास ने कहा, 'हां, हम भारतीय नागरिकता पाने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. लेकिन हम अधिकारियों से गुजारिश करेंगे कि नागरिकता प्रमाण पत्र पाने की प्रक्रिया को थोड़ा आसान बनाया जाए.'
उत्तर 24 परगना CAA वेरिफिकेशन सेंटर के एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि CAA आवेदनों की संख्या में अचानक आई तेजी को देखते हुए, हम सुनवाई के लिए आने वाले लोगों को सुविधा देने की पूरी कोशिश कर रहे हैं. फिलहाल बारासात दफ्तर में चार काउंटर बनाए गए हैं और कल से एक और काउंटर काम करना शुरू कर देगा. हमारे दफ्तर में पीने के पानी और शौचालयों की उचित व्यवस्था की जा रही है, ताकि खराब मौसम की स्थिति में लोगों को कम से कम दिक्कतों का सामना करना पड़े.
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