Military Exercise Pragati 2026: मेघालय के उमरोई में चल रहे बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास प्रगति 2026 में इस बार सिर्फ सैनिक ही नहीं, बल्कि भारतीय सेना के खास ‘K9 योद्धा' भी चर्चा में रहे. इन प्रशिक्षित सैन्य डॉग्स ने अपने कौशल से विदेशी सैनिकों और अधिकारियों को प्रभावित किया. अभ्यास के दौरान सेना के डॉग स्क्वॉड ने बम खोजने, दुश्मन का पीछा करने और हमले जैसी कई गतिविधियों का प्रदर्शन किया. भारतीय सेना का कहना है कि आधुनिक युद्ध में ये K9 टीमें बेहद अहम भूमिका निभाती हैं.

कौन-कौन से डॉग्स शामिल रहे?
अभ्यास में तीन खास सैन्य डॉग्स ने हिस्सा लिया.
- पहला था ‘एलन', जो बेल्जियन मेलिनोइस नस्ल का हमला करने वाला डॉग है.
- दूसरा था ‘विक्टर', जो रामपुर हाउंड नस्ल का ट्रैकर डॉग है.
- तीसरा था ‘देओ', जो लैब्राडोर नस्ल का विस्फोटक खोजने वाला डॉग है. इन सभी ने अलग-अलग तरह की सैन्य क्षमताओं का प्रदर्शन किया.
किसी ने छिपे विस्फोटकों का पता लगाया, तो किसी ने संदिग्ध गतिविधियों को ट्रैक किया. सेना के अधिकारियों के मुताबिक युद्ध जैसे हालात में ऐसे प्रशिक्षित डॉग्स कई बार सैनिकों की जान बचाने में मदद करते हैं.
#WATCH | Amid tactical drills and multinational training at Exercise PRAGATI 2026, the Indian Army's four-legged warriors added a distinctive and powerful dimension to the exercise. Army dogs trained alongside troops from friendly foreign countries, showcasing their role in… pic.twitter.com/6XSiDacpiR
— ANI (@ANI) May 26, 2026
रामपुर हाउंड बना आकर्षण
इस अभ्यास में भारत की देसी नस्ल ‘रामपुर हाउंड' ने सबसे ज्यादा ध्यान खींचा. ‘विक्टर' नाम के इस ट्रैकर डॉग ने अपनी तेज सूंघने की क्षमता और फुर्ती का प्रदर्शन किया. रामपुर हाउंड को उत्तर भारत की पुरानी और मजबूत नस्ल माना जाता है. यह कठिन मौसम और मुश्किल इलाकों में भी आसानी से काम कर सकता है. सेना का कहना है कि देसी नस्लों में बीमारी से लड़ने की क्षमता ज्यादा होती है और वे भारतीय मौसम के मुताबिक जल्दी ढल जाती हैं.
इसी वजह से अब भारतीय सेना स्वदेशी नस्लों को ज्यादा बढ़ावा दे रही है. इसे सरकार के ‘आत्मनिर्भर भारत' अभियान का हिस्सा भी माना जा रहा है.
हर इलाके में काम करने की क्षमता
भारतीय सेना के K9 योद्धा सिर्फ मैदानों तक सीमित नहीं हैं. ये रेगिस्तान, जंगल और बर्फीले ग्लेशियर जैसे कठिन इलाकों में भी काम कर सकते हैं. इनका इस्तेमाल आतंकवाद विरोधी अभियानों, विस्फोटक खोजने और दुश्मन की गतिविधियों का पता लगाने में किया जाता है. सेना के मुताबिक इन डॉग्स की सबसे बड़ी ताकत उनकी सूंघने की क्षमता, तेजी और वफादारी है.

रोबोटिक डॉग्स भी बने चर्चा का विषय
अभ्यास में रोबोटिक डॉग्स का प्रदर्शन भी किया गया. इससे यह दिखाने की कोशिश हुई कि भविष्य के युद्ध में तकनीक और पारंपरिक सैन्य कौशल साथ-साथ काम करेंगे. सेना मानती है कि आने वाले समय में रोबोटिक सिस्टम और K9 टीमें मिलकर सैन्य अभियानों को और प्रभावी बना सकती हैं. PRAGATI 2026 में भारतीय सेना के ये ‘चार पैरों वाले योद्धा' साहस, अनुशासन और भरोसे का प्रतीक बनकर सामने आए.
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