Explainer: स्पेन में 50 हजार लोगों की घुसपैठ से क्यों टेंशन में आया यूरोप, इटली-फ्रांस समेत कई देशों पर खतरा
बेहतर नौकरी के मौकों और रहने-सहने की अच्छी स्थितियों का आकर्षण इन प्रवासियों को अफ्रीका और दूसरे देशों से मुश्किल और खतरनाक सफर करने के लिए मजबूर करता है. मगर अभी जो स्थिति है वो भयानक है.
अचानक किसी दूसरे देश के हजारों लोग आपके देश में घुस आएं तो क्या होगा? कुछ ऐसा ही स्पेन में हुआ है. लोग जबरन किसी के भी घर में घुस जा रहे हैं. सड़क पर खड़ी गाड़ियों को आग के हवाले कर दे रहे हैं. सड़कों का मंजर ऐसा है कि हर जगह लोग ही लोग नजर आ रहे हैं. भूख से बेहाल ये लोग कुछ भी करने को तैयार हैं. ऐसे में स्पेन के लोग न तो घर पर सुरक्षित महसूस कर रहे हैं और न सड़क पर.
ये सब हुआ है कल मोरक्को से 49,000 प्रवासियों के तैरकर सेउटा पहुंचने के बाद. आज स्पेन ने उत्तरी अफ्रीका में अपने इस इलाके की सुरक्षा बढ़ाने के लिए सैनिक भेजे हैं. भारी भीड़ के अचानक पहुंचने के बाद, अफ्रीका के इस छोटे से इलाके में रात भर अफरातफरी मची रही; गाड़ियां जलाई गईं और प्रवासियों ने जबरन इमारतों में घुसने की कोशिश की.
इटली और फ्रांस ने दी वार्निंग
वीडियो फुटेज में बड़ी संख्या में लोग समुद्र तटों पर दौड़ते, तैरकर किनारे आते और स्पेन के इस छोटे से इलाके की सड़कों पर फैलते हुए दिखे. यह इलाका मोरक्को की सीमा से सटा है, मगर स्पेन के कंट्रोल में है. स्पेन यूरोप का सदस्य देश है. मतलब एक बार स्पेन में एंट्री हो गई तो अब ये गैर-कानूनी रूप से घुसे लोग किसी भी यूरोप के देश में बगैर किसी कागज आ-जा सकते हैं. यही कारण है कि आज सुबह इटली की सरकार ने कहा कि वह 'खास कदम' उठाने पर विचार कर रही है, जिसमें स्पेन के साथ खुली सीमा वाले शेंगेन समझौते को बंद करना भी शामिल है. प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी ने कहा, 'सेउटा से आ रही तस्वीरें चौंकाने वाली हैं और एक बार फिर दिखाती हैं कि अनियंत्रित अवैध आप्रवासन यूरोप की सीमाओं की सुरक्षा के लिए एक वास्तविक खतरा है.' फ्रांस ने कहा कि वह स्पेन के साथ अपनी सीमाओं पर सख्ती बढ़ाएगा. गृह मंत्री ने दोनों देशों की सीमा वाले इलाकों में तुरंत नियंत्रण बढ़ाने के निर्देश दिए हैं.

सुप्रीम कोर्ट का एक फैसला पड़ा भारी
सेउटा के राष्ट्रपति जुआन जीसस विवा्स ने पूरी तरह से मानवीय और सामाजिक आपातकाल की घोषणा की है और स्पेन के इमिग्रेशन ढांचे में बदलाव की मांग की. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले से सामने आई कानूनी कमियों को दूर करने की जरूरत है. दरअसल, इस महीने की शुरुआत में, सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया था कि सेउटा या मेलिला पहुंचने की कोशिश करते समय समुद्र में पकड़े गए प्रवासियों को इन इलाकों के खास सीमा-अस्वीकृति नियम के तहत तुरंत वापस नहीं भेजा जा सकता. फैसले में यह तय किया गया कि समुद्र के रास्ते आने वाले प्रवासियों को बिना उचित प्रक्रिया के तुरंत सीमा के उस पार वापस नहीं भेजा जा सकता, जबकि जमीन के रास्ते स्पेन में घुसने वालों (जैसे सीमा की बाड़ फांदकर आने वालों) के मामले में ऐसा किया जा सकता है. यही कारण है कि इतनी बड़ी संख्या में लोग तैरकर स्पेन पहुंच गए.

सेउटा वाला मेलिला में भी होगा
मोरक्को और स्पेन के बीच बेनी-एन्जा बॉर्डर को कल रात बंद कर दिया गया, क्योंकि सैकड़ों उत्तरी अफ्रीकी लोग मेलिला पहुंच गए थे. मेलिला, सेउटा से हवाई मार्ग से 140 मील और सड़क मार्ग से 240 मील पूर्व में है. मेलिला के राष्ट्रपति जुआन होजे इम्ब्रूडा ने कहा कि माना जा रहा है कि 300 से 400 मोरक्को के लोगों ने बॉर्डर पार किया है. उन्होंने कहा, "सिवल गार्ड, नेशनल पुलिस और स्थानीय पुलिस मिलकर काम कर रहे हैं और उनके काम मिसाल कायम करने वाले हैं. वे बहुत अच्छे से काम कर रहे हैं और स्थिति को काफी हद तक काबू में कर लिया गया है." उन्होंने यह भी माना कि सेउटा जैसी बॉर्डर इमरजेंसी की स्थिति 'यहां भी हो सकती है'.

सेउटा और मेलिला क्या स्पेन में हैं
सेउटा और मेलिला स्पेन के दो स्वायत्त शहर हैं मगर अफ्रीका में स्थित हैं. मोरक्को के उत्तरी तट पर बसा सेउटा, जिब्राल्टर जलडमरूमध्य (स्ट्रेट) के जरिए मुख्य स्पेन से अलग होता है. असल में, सेउटा ही यूरोप और अफ्रीका के बीच जमीन से जुड़ी एकमात्र सीमा है. इसी वजह से, यूरोप पहुंचने का सपना देखने वाले प्रवासियों के लिए यह प्रवेश का एक आकर्षक जरिया बन गया है. प्रवास का मुद्दा लंबे समय से मोरक्को और स्पेन के बीच विवाद की वजह रहा है. सेउटा, जिसकी आबादी मुश्किल से 80,000 है, 1580 से स्पेन के शासन में है. हालांकि, मोरक्को सेउटा और मेलिला को स्पेन के कब्जे वाले इलाके मानता है. ऐसा पहली बार नहीं है जब स्पेन को ऐसे संकट का सामना करना पड़ा है. प्रवासियों, खासकर लैटिन अमेरिकियों को अपनाने की उसकी दशकों पुरानी नीति पिछले कुछ सालों में कई बार उसके लिए मुसीबत बन चुकी है.

जमकर मची है अराजकता
स्पेन के सरकारी ब्रॉडकास्टर RTVE ने झड़पों की खबरों के बाद बॉर्डर के मोरक्को वाले हिस्से में जली हुई कारों की तस्वीरें दिखाईं. सिवल गार्ड अधिकारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले स्थानीय कर्मचारी संघ के प्रमुख रशीद स्बिही ने स्थिति को गंभीर मानवीय संकट बताया. उन्होंने कहा कि हजारों प्रवासी, जिनमें अकेले बच्चे भी शामिल थे, पार्कों और फुटपाथों पर सोने को मजबूर थे, जबकि अन्य लोग बिना किसी मकसद के सड़कों पर घूम रहे थे. उन्होंने कहा, "लोग अभी भी आ रहे हैं. जो अतिरिक्त बल आए हैं, वे सिर्फ घायलों की मदद और मानवीय प्रयासों में लगे हैं. यहां अफरा-तफरी मची हुई है." स्बिही ने बताया कि मरने वाले 18 लोगों में से कई डूब गए थे, लेकिन कुछ लोग मोरक्को के साथ बॉर्डर चेकपॉइंट के पास स्थित शहरी समुद्र तट, ताराजल बीच पर ब्रेकवॉटर बाड़ को पार करने की कोशिश में मची भगदड़ में भी मारे गए. स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने कहा कि उनकी सरकार स्थिति पर तत्काल प्रतिक्रिया देगी. यह स्थिति 2021 के सीमा संकट की याद दिलाती है जब केवल दो दिनों में 8,000 से अधिक लोग वहां पहुंच गए थे.

आखिर क्यों रहना चाहते हैं यूरोप में
बेहतर नौकरी के मौकों और रहने-सहने की अच्छी स्थितियों का आकर्षण इन प्रवासियों को अफ्रीका और दूसरे देशों से मुश्किल और खतरनाक सफर करने के लिए मजबूर करता है. बहुत से लोगों के लिए, यह उनके अपने देशों में हिंसा और गरीबी से बचने का एक जरिया है. यूरोप बेहतर जिंदगी की तलाश में आने वाले प्रवासियों और शरण चाहने वालों के लिए एक मुख्य जगह रहा है. 2015 के बाद से यूरोप में काफी बदलाव आया है; उस समय दस लाख से ज्यादा शरणार्थी यूरोप आए थे, जिससे बॉर्डर और शरण देने वाले सिस्टम पर बहुत ज्यादा दबाव पड़ा था और इस गुट के अंदर राजनीतिक मतभेद पैदा हो गए थे. तब से, कई यूरोपीय देशों में दक्षिणपंथी पार्टियों का उभार हुआ है, जिन्होंने प्रवासन पर कड़े नियंत्रण लागू किए हैं. 2015 के बाद से, यूरोप आने वाले प्रवासियों की संख्या में भारी कमी आई है. UNHCR के अनुसार, यूरोप आने वाले लोगों की औसत संख्या हर साल लगभग 2,00,000 रही है. 2025 में, लगभग 1,54,000 प्रवासी यूरोप आए. स्पेन का अब दावा है कि उसने आधे प्रवासियों को वापस भेज दिया है.
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