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केरल पर अहम बैठक से गायब रहे थरूर, बार-बार जा रहे पार्टी लाइन से अलग, फिर भी एक्शन लेने से क्यों कतरा रही है कांग्रेस?

शशि थरूर कांग्रेस के उन नेताओं में हैं जिनकी अंतरराष्ट्रीय पहचान, बौद्धिक क्षमता और वैश्विक मंचों पर स्वीकार्यता है. संयुक्त राष्ट्र में लंबा अनुभव, धारदार लेखन और सार्वजनिक संवाद में दक्षता उन्हें पार्टी के बाकी नेताओं से अलग बनाती है. कांग्रेस जानती है कि थरूर जैसे नेता पर कार्रवाई का मतलब सिर्फ एक सांसद पर एक्शन नहीं, बल्कि पार्टी की एक मजबूत वैचारिक छवि को झटका देना होगा.

केरल पर अहम बैठक से गायब रहे थरूर, बार-बार जा रहे पार्टी लाइन से अलग, फिर भी एक्शन लेने से क्यों कतरा रही है कांग्रेस?
  • केरल विधानसभा चुनाव की तैयारियों के दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने अहम बैठक में भाग नहीं लिया.
  • शशि थरूर को लेकर पार्टी में असहजता बनी हुई है लेकिन कांग्रेस उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई से बच रही है.
  • थरूर की अंतरराष्ट्रीय पहचान और वैश्विक मंचों पर स्वीकार्यता कांग्रेस के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संसाधन है.

केरल विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच शशि थरूर की नाराजगी की खबर सामने आई है. चुनावी तैयारियों को लेकर आज होने वाली कांग्रेस की अहम बैठक में थरूर शामिल नहीं हुए. आज राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे के साथ दिल्ली में बैठक प्रस्तावित थी. लेकिन इसमें केरल के फायरब्रांड नेता शशि थरूर नहीं पहुंचे और वे फिलहाल केरल में ही मौजूद हैं.

कांग्रेस में शशि थरूर को लेकर असहजता कोई नई बात नहीं है, लेकिन 2026 के केरल विधानसभा चुनाव नज़दीक आते ही यह सवाल और तीखा हो गया है कि पार्टी उनके खिलाफ सख़्त कार्रवाई करने से क्यों हिचकिचा रही है.

थरूर: सिर्फ नेता नहीं, एक ब्रांड

शशि थरूर कांग्रेस के उन नेताओं में हैं जिनकी अंतरराष्ट्रीय पहचान, बौद्धिक क्षमता और वैश्विक मंचों पर स्वीकार्यता है. संयुक्त राष्ट्र में लंबा अनुभव, धारदार लेखन और सार्वजनिक संवाद में दक्षता उन्हें पार्टी के बाकी नेताओं से अलग बनाती है.

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कांग्रेस जानती है कि थरूर जैसे नेता पर कार्रवाई का मतलब सिर्फ एक सांसद पर एक्शन नहीं, बल्कि पार्टी की एक मजबूत वैचारिक छवि को झटका देना होगा.

केरल की राजनीतिक मजबूरी

केरल में कांग्रेस 2016 से सत्ता से बाहर है और अप्रैल‑मई 2026 के चुनाव उसके लिए करो या मरो जैसी स्थिति हैं. ऐसे समय पर पार्टी कोई नया आंतरिक विवाद मोल नहीं लेना चाहती.

शशि थरूर पर सख्ती से कांग्रेस के भीतर गुटबाज़ी खुलकर सामने आ सकती है, जिसका सीधा नुकसान चुनावी तैयारियों पर पड़ेगा.

थरूर गए तो कांग्रेस को सबसे बड़ा झटका

पार्टी के रणनीतिकार इस बात को लेकर भी सतर्क हैं कि अगर शशि थरूर कांग्रेस छोड़ते हैं, तो बीजेपी और एलडीएफ जैसे दल उन्हें अपनाने में खुशी‑खुशी आगे आएंगे. खासतौर पर तिरुवनंतपुरम की 14 विधानसभा सीटों पर थरूर की व्यक्तिगत पकड़ कांग्रेस की सबसे बड़ी ताकत मानी जाती है. उनका बाहर जाना कांग्रेस के लिए यहां राजनीतिक तबाही साबित हो सकता है.

पार्टी लाइन से अलग सुर

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शशि थरूर अक्सर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर कांग्रेस की आधिकारिक लाइन से अलग नजर आते रहे हैं. हाल ही में उन्होंने 21 जनवरी 2026 को भारतीय क्रिकेट टीम के कोच गौतम गंभीर (पूर्व बीजेपी सांसद) की खुलकर तारीफ की. उन्होंने गंभीर के लिए कहा, 'प्रधानमंत्री के बाद भारत में सबसे मुश्किल काम करने वाला व्यक्ति…लाखों आलोचनाओं के बावजूद शांत और निडर नेतृत्व.' कांग्रेस के भीतर इसे राजनीतिक संदेश के तौर पर भी देखा गया.

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कोच्चि ‘महा पंचायत' से बढ़ी नाराजगी

सूत्रों के मुताबिक, कोच्चि में हुई KPCC की ‘महा पंचायत' के दौरान शशि थरूर को अपेक्षित सम्मान नहीं मिला. बताया जाता है कि मंच संचालन और भाषण क्रम को लेकर वे राज्य और केंद्रीय नेतृत्व दोनों से नाराज हुए. इसी नाराजगी के चलते 2026 में दिल्ली में प्रस्तावित कांग्रेस की अहम बैठक में वो शामिल नहीं हुए.

कांग्रेस का डर: नुकसान किसका ज्यादा?

कांग्रेस के सामने दुविधा साफ है- थरूर पर कार्रवाई की तो आंतरिक कलह होगी. अगर कार्रवाई नहीं की तो अनुशासन पर सवाल उठ ही रहे हैं. फिलहाल पार्टी नेतृत्व मानकर चल रहा है कि शशि थरूर को नाराज करने का जोखिम, उन्हें खुली छूट देने से कहीं ज़्यादा खतरनाक है.

कांग्रेस जानती है कि शशि थरूर कोई डिस्पोज़ेबल नेता नहीं हैं. इसलिए पार्टी फिलहाल संघर्ष नहीं, संतुलन की राह पर है. कम से कम तब तक, जब तक केरल चुनाव निपट नहीं जाते.

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सत्यम बघेल
chief sub editor
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