सुप्रीम कोर्ट में चुनाव मतगणना के दौरान 'टोटलाइज़र मशीन' के इस्तेमाल को लेकर लगाई गई याचिका पर अहम सुनवाई हुई है. जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार से राय मांगी है. सर्वोच्च न्यायालय का कहना है कि वह इस मामले में सरकार का रुख भी समझना चाहती है. बता दें कि 2014 में दाखिल की गई जनहित याचिका में अलग-अलग ईवीएम के वोटों की वार्ड के हिसाब से गिनती करने की जगह, पूरे संसदीय क्षेत्र के वोटों की गणना एक साथ टोटलाइजर से कराने की मांग की गई थी. इसी याचिका पर सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से राय मांगी है.
'केंद्र सरकार की राय जानना जरूरी'
चुनाव में मतगणना के लिए टोटलाइजर मशीन के उपयोग की याचिका पर सुनवाई के दौरान CJI ने कहा कि हम टोटलाइज़र इंट्रोड्यूस करने के नियमों में बदलाव पर केन्द्र सरकार का रूख जानना चाहेंगे. क्योंकि उसमें उनका पक्ष भी जरूरी है. वहीं सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि इसके लिए कानूनी बदलाव की जरूरत है. जो आयोग के दायरे में नहीं है, शुरू में आयोग ने सरकार से गुहार लगाई थी, सरकार ने एक्सपर्ट कमिटी बनाई थी, वह राजी नहीं हुई. ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स ने भी इसका विरोध किया था.
जिस पर CJI ने कहा कि मेरे हिसाब से चुनावों की निष्पक्षता के लिए नुकसानदायक भी हो सकता है? जब वे मैन्युअल रूप से गिनती करते हैं, या मशीन में भी, तो आप देख सकते हैं कि कहां छेड़छाड़ हुई है या नहीं, बदकिस्मती से टोटलाइज़र के मामले में यह इतना ट्रांसपेरेंट नहीं होगा. इससे डेमोक्रेसी को क्या बड़ा फायदा होगा?
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क्या है याचिकाकर्ता की मांग
याचिकाकर्ता अश्विनी उपाध्याय ने कहा कि इससे चुनाव के बाद की हिंसा को रोकने का काम करेगा। यह वोटर्स के फायदे मे होगा। कोई नहीं जान सकता कि मुझे किस बूथ से कितना वोट मिला है, कई देश सिर्फ प्राइवेसी के अधिकार को सुरक्षित रखने, चुनाव के बाद की हिंसा से बचने के लिए टोटलाइजर का इस्तेमाल कर रहे हैं. चुनाव आयोग ने 2007 में टोटलाइज़र का सपोर्ट किया था.
क्या होती है टोटलाइजर मशीन
दरअसल, टोटलाइजर मशीन एक ऐसा इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है, जो मतदाताओं की गोपनीयता की रक्षा करता है. क्योंकि यह मशीन एक साथ कई मतदान केंद्रों की ईवीएम मशीनों को आपस में जोड़कर उनके वोटों को आपस में मिला देती है, वर्तमान व्यवस्था में वोटों की गिनती बूथ-दर-बूथ होती है, जिससे राजनीतिक दलों को आसानी से पता चल जाता है कि किस विशिष्ट मोहल्ले या गांव से उन्हें कितने वोट मिले हैं. टोटलाइजर मशीन इस बूथ-वार वोटिंग पैटर्न को छिपा देती है. जिससे किसी को यह पता नहीं चल पाता है कि किस बूथ से कितना वोट मिला है. इसी मशीन के इस्तेमाल को लेकर अलग-अलग याचिकाएं लगी हैं. जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने अब केंद्र सरकार की राय भी मांगी है.
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