CJP के जुलाई में हुए विरोध-प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में FIR वापस लेने की दिशा में केंद्र के कदम के बाद अब चार और राज्यों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. बिहार, असम, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल की पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में अलग-अलग आवेदन दाखिल कर संबंधित FIR को रद्द करने की मांग की है.इन राज्यों की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि चार अलग-अलग आवेदन दाखिल किए गए हैं.उन्होंने सभी मामलों को एक साथ दोपहर 2 बजे सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया.
CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सभी मामलों को साथ सुनने पर सहमति जताई है. यह घटनाक्रम दिल्ली पुलिस के सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल आवेदन के एक दिन बाद सामने आया है. दिल्ली पुलिस ने 20 से 25 जुलाई के CJP प्रदर्शनों से जुड़ी 13 FIR को आगे नहीं बढ़ाने की बात कहते हुए संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत उन्हें रद्द करने की मांग की है. साथ ही 2,873 ऐसे लोगों के खिलाफ एक नई FIR दर्ज करने की अनुमति मांगी गई है, जिनके बारे में पुलिस ने गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि होने की बात कही है. चार राज्यों का सुप्रीम कोर्ट पहुंचना इसलिए अहम है, क्योंकि FIR वापस लेना CJP की प्रमुख मांगों में शामिल रहा है.
CJP ने आरोप लगाया है कि जुलाई में आंदोलन वापस लेने के दौरान केंद्र की ओर से प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने का आश्वासन दिया गया था. संगठन ने इसी मुद्दे को लेकर 5 सितंबर को दिल्ली में मार्च का ऐलान किया है. ऐसे में दिल्ली के बाद बिहार, असम, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल की ओर से FIR रद्द करने की मांग को 5 सितंबर के प्रस्तावित CJP मार्च से पहले सरकार की ओर से बड़ा कदम माना जा रहा है. गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को CJP के 5 सितंबर के प्रस्तावित मार्च पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था.अदालत ने कहा था कि फिलहाल ऐसी कोई ठोस परिस्थिति नहीं है जिसके आधार पर यह माना जाए कि कुछ अप्रिय होगा और कानून-व्यवस्था बनाए रखना सरकार और पुलिस का विषय है .
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