राजस्थान में सोमवार को 5 निगमों समेत 273 निकायों मेयर और सभापति-चेयरमैन के चुनाव हुए. ज्यादातर जगह पर बीजेपी की जीत हुई है. हैरान करने वाली बात यह है कि जिन जगहों पर कांग्रेस आसानी से जीत सकती थी, वहां भी बीजेपी ही जीत गई. 7 नगर निगमों में से सिर्फ एक ही जगह कांग्रेस अपना मेयर बनवा पाई है, जबकि बाकी जगह बीजेपी जीती है.
बहुमत होने के बाद भी कांग्रेस को अजमेर और पाली के मेयर चुनाव में हार का सामना करना पड़ा. कांग्रेस सिर्फ बीकानेर में अपना मेयर बना पाई. बीकानेर में कांग्रेस के अनिल कल्ला मेयर बने हैं.
अजमेर और पाली में बीजेपी ने बड़ा उलटफेर किया. उदयपुर और अलवर में भी बीजेपी का मेयर बना है. दो निगमों में बीजेपी के मेयर पहले ही निर्विरोध जीत चुके हैं. इस तरह से 7 निगमों में से 6 पर बीजेपी का दबदबा हो गया है.
कहां-कैसे हुआ खेल?
अजमेर-पाली में बड़ा उलटफेर
राजस्थान में कुल 7 निगमों में मेयर पद के लिए चुनाव होने थे. भीलवाड़ा और भरतपुर में बीजेपी के मेयर को निर्विरोध चुन लिया गया था. इसलिए सोमवार को 5 निगमों के मेयर के लिए चुनाव हुए.
सबसे चौंकाने वाले नतीजे अजमेर और पाली के रहे. अजमेर में बीजेपी की अनामिका शर्मा को 43 वोट मिले, जबकि यहां बीजेपी के 32 पार्षद जीते थे.
पाली में मेयर चुनी गईं नमिता बुबकिया को 33 वोट मिले हैं, जबकि बीजेपी के यहां 21 पार्षद ही थे. कांग्रेस की सुमित्रा जैन को सिर्फ 3 वोट ही मिले हैं, जबकि कांग्रेस के पास 29 पार्षद थे.

पाली से नमिता बुबकिया और अजमेर से अनामिका शर्मा जीतीं.
उदयपुर-अलवर भी बीजेपी के पास
उदयपुर में बीजेपी के पारस सिंघवी ने मेयर का चुनाव जीता. यहां बीजेपी की जीत लगभग तय थी, क्योंकि उसके पास 53 पार्षद थे. अलवर में भी बीजेपी की सुमनलता अग्रवाल जीतीं. सुमनलता को 32 जबकि कांग्रेस की कमलेश शर्मा को 23 वोट मिले.
कांग्रेस सिर्फ बीकानेर में जीती
कांग्रेस का मेयर सिर्फ बीकानेर में बना है. यहां पूर्व मंत्री बीडी कल्ला के भतीजे और कांग्रेस नेता अनिल कल्ला मेयर चुने गए. बीकानेर में कांग्रेस के पास 42 पार्षद हैं.
क्रॉस वोटिंग ने कर दिया खेला
मेयर चुनाव में क्रॉस वोटिंग ने कांग्रेस का खेल बिगाड़ दिया. अजमेर में कांग्रेस के पास 37 तो बीजेपी के पास 32 पार्षद थे. लेकिन तब भी बीजेपी उम्मीदवार को 42 वोट मिल गए.
पाली में भी कांग्रेस के 29 तो बीजेपी के 21 पार्षद थे, लेकिन चुनाव में बीजेपी को 33 वोट मिले. हैरान करने वाली बात है कि 29 पार्षद होने के बावजूद कांग्रेस उम्मीदवार को सिर्फ 3 वोट ही मिले.
उदयपुर और अलवर में तो बीजेपी के पास बहुमत था. बीकानेर के मेयर चुनाव में क्रॉस वोटिंग नहीं हुई. अगर यहां भी क्रॉस वोटिंग हो जाती तो कांग्रेस यहां भी अपना मेयर नहीं बना पाती.
जयपुर, जोधपुर और कोटा... अगली चुनौती
अब अगली चुनौती जयपुर, जोधपुर और कोटा की है. यहां पर 25 सितंबर को मेयर पद के लिए चुनाव होने हैं. जयपुर में बीजेपी का मेयर आसानी से बन सकता है. जबकि, जोधपुर में कांटे का मुकाबला है. कोटा में भी बीजेपी की जीत लगभग तय है.
जयपुर में बीजेपी ने सुनील कोठारी तो कांग्रेस ने सुनीता मावर को उम्मीदवार बनाया है. जोधपुर में बीजेपी ने प्रसन्नचंद मेहता और कांग्रेस ने राजेंद्र सोलंकी मैदान में हैं. जबकि, कोटा में बीजेपी ने अनुसुईया गोस्वामी और कांग्रेस ने सुनीता सुमन को उम्मीदवार बनाया है.
जयपुर की 150 सीटों में से बीजेपी के पास 78 और कांग्रेस के पास 57 पार्षद हैं. यहां बीजेपी आसानी से जीत सकती है. जोधपुर में बीजेपी के 45 और कांग्रेस के 44 पार्षद हैं. कोटा की 100 सीटों में से बीजेपी के पास 57 और कांग्रेस के पास 39 पार्षद हैं.
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