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नाम हटाएं, फिर सुनेंगे...हेट स्पीच के खिलाफ गाइडलाइन की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या-क्या कहा

सुप्रीम कोर्ट ने संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों की कथित हेट स्पीच के खिलाफ गाइडलाइन बनाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए कहा कि इसमें किसी व्यक्ति को निशाना न बनाया जाए.

नाम हटाएं, फिर सुनेंगे...हेट स्पीच के खिलाफ गाइडलाइन की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या-क्या कहा
  • SC ने संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों द्वारा हेट स्पीच के खिलाफ याचिका की सुनवाई से इनकार कर दिया है
  • SC ने कहा कि याचिका में किसी व्यक्ति विशेष का नाम नहीं होना चाहिए बल्कि सभी राजनीतिक दलों के लिए होनी चाहिए
  • 12 पूर्व नौकरशाहों, राजनयिकों और सिविल सोसायटी के लोगों ने हेट स्पीच रोकने के लिए गाइडलाइन की मांग की है
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नई दिल्ली:

संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों द्वारा हेट स्पीच के खिलाफ सख्त गाइडलाइन बनाने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये याचिका किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाते हुए दाखिल की गई है. CJI सूर्य कांत ने कहा कि याचिकाकर्ता एक संशोधित याचिका दाखिल करें, जिसमें किसी का नाम ना हो. ये सभी राजनीतिक पार्टियों के लिए हो. 

याचिकाकर्ता के वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि वो एक हफ्ते में संशोधित याचिका दाखिल करेंगे. 12 पूर्व नौकरशाहों, राजनयिकों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, उद्यमियों और सिविल सोसायटी के लोगों ने सुप्रीम कोर्ट मे याचिका दाखिल कर गाइडलाइन बनाने की मांग की है. 

याचिका में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और अन्य संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों के हेट स्पीच का उदाहरण देते हुए चिंता जताई गई है. याचिका में असम सीएम के ‘मुस्लिम' समुदाय को लेकर हालिया टिप्पणियों का हवाला दिया गया है. याचिका में कहा गया कि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बार-बार ‘लैंड जिहाद' और ‘लव जिहाद' जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हैं. 

वहीं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री उर्दू भाषा के समर्थकों के लिए अपमानजनक शब्दों का प्रयोग का भी उदाहरण दिया गया. इसके अलावा याचिका में कुछ केंद्रीय मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के बयानों का जिक्र किया गया है. सुप्रीम कोर्ट से मांग की गई कि कारगर गाइडलाइन बनाकर इस तरह के बयानों पर रोक लगाई जाए.

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