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फ्रीबीज का मामला: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को भेजा नोटिस, CAG और चुनाव आयोग से भी मांगा जवाब

फ्रीबीज को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक और याचिका दाखिल हुई है. इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के साथ-साथ CAG और चुनाव आयोग को नोटिस भेजकर जवाब मांगा है.

फ्रीबीज का मामला: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को भेजा नोटिस, CAG और चुनाव आयोग से भी मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने फ्रीबीज को लेकर नोटिस जारी किया है.
PTI
  • सुप्रीम कोर्ट ने चुनावों में फ्रीबीज के ऐलान पर कई याचिकाओं के बीच नई याचिका को भी शामिल कर सुनवाई शुरू की है
  • नई याचिका में चुनाव से पहले सरकारी फंड से मुफ्त सुविधाएं देने को भ्रष्ट आचरण मानने की मांग की गई है
  • याचिका में चुनावी वादों पर रोक लगाने और नियम तोड़ने वाली पार्टियों पर कार्रवाई की मांग की गई है
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नई दिल्ली:

चुनावों में फ्रीबीज के ऐलान को लेकर सुप्रीम कोर्ट में पहले से ही कई याचिकाएं दायर हैं. अब एक और याचिका दायर हो गई. इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है. साथ ही CAG और चुनाव आयोग भी नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. याचिका में फ्रीबीज की घोषणाओं का CAG से ऑडिट करवाने की मांग भी की गई है.

दरअसल, चुनाव आते ही राजनीतिक पार्टियों की ओर से मुफ्त की सुविधाओं के तमाम वादे किए जाते हैं. कोई फ्री बिजली देने की बात करता है तो कोई फ्री पानी. इसे 'फ्रीबीज' कहा जाता है. फ्रीबीज पर रोकने लगाने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में पहले से ही कई याचिकाएं लंबित हैं.

अब इसी मामले को लेकर नरेंद्र कुमार गोस्वामी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है. इस पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि इइस मामले में पहले ही कई याचिकाएं लंबित हैं. अदालत ने इस याचिका को पहले से ही चल रहे मामलों के साथ टैग कर दिया है. अब इसकी सुनवाई भी बाकी याचिकाओं के साथ ही होगी.

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याचिका में क्या की गई है मांग?

इस नई याचिका में कई अहम मांगें की गई हैं. उन्होंने मांग है कि चुनव से पहले सरकारी पैसों से मुफ्त की चीजों का वादा करना गलत और भ्रष्ट आचरण माना जाए. 

उन्होंने यह भी मांग की कि चुनाव आयोग को ऐसे चुनावी वादों पर रोक लगाने और नियम तोड़ने वाली पार्टियों पर कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है. 

याचिका में मांग की गई है कि अगर कोई राजनीतिक दल अपने घोषणापत्र में वादा करता है तो वह यह भी बताए कि इसके लिए पैसा कहां से आएगा. याचिका में ऐसी घोषणाओं का CAG से ऑडिट करवाने की मांग की है.

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फ्रीबीज पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई थी फटकार

फ्रीबीज बांटने को लेकर सुप्रीम कोर्ट कई बार फटकार लगा चुका है. फरवरी में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अगर इसी तरह से मुफ्त खाना और मुफ्त बिजली जैसी सुविधाएं देते रहे तो डेवलपमेंट के लिए पैसा कहां से बचेगा? 

कोर्ट ने ज्यादातर सरकारें घाटे में हैं. इसके बावजूद विकास की अनदेखी करते हुए फ्रीबीज बांटी जा रही हैं. कोर्ट ने कहा था कि इस तरह की मुफ्त की सुविधाएं देने से आर्थिक विकास में बाधा आती है. सभी लोगों को मुफ्त खाना, साइकिल या बिजली देने की बजाय रोजगार देने पर जोर दिया जाना चाहिए.

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