- AIMPLB ने सुप्रीम कोर्ट में महिलाओं के मस्जिद में प्रवेश पर कोई रोक न होने की दलील दी.
- बोर्ड के वकील ने बताया कि मस्जिदों में कोई पवित्र स्थल की अवधारणा नहीं होती, इसलिए प्रवेश पर प्रतिबंध नहीं है.
- संविधान पीठ ने सबरीमाला मामले के साथ मस्जिदों में महिलाओं के प्रवेश से जुड़े अनुच्छेदों पर सवाल उठाए.
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि महिलाओं के मस्जिद में नमाज़ पढ़ने के लिए प्रवेश पर कोई रोक नहीं है. सबरीमाला मामले की सुनवाई कर रही 9 न्यायाधीशों की संविधान पीठ के सामने बोर्ड की ओर से वरिष्ठ वकील एम.आर. शमशाद ने यह दलील रखी. मस्जिदों में महिलाओं के प्रवेश से जुड़ी याचिकाओं को भी सबरीमाला संदर्भ के साथ जोड़ा गया है, क्योंकि इनमें भी संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 से जुड़े सवाल उठते हैं.
AIMPLB की ओर से कहा गया कि मस्जिद में किसी पवित्र स्थल की अवधारणा नहीं होती, हालांकि यह दरगाहों में देखी जाती है. शमशाद ने कहा कि जब मस्जिद के भीतर कोई पवित्र स्थान नहीं है, तो कोई भी व्यक्ति किसी खास जगह पर खड़े होने या नमाज़ का नेतृत्व करने पर जोर नहीं दे सकता.
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सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने स्पष्टता के लिए पूछा कि क्या महिलाओं को मस्जिद में प्रवेश की अनुमति है. इस पर शमशाद ने कहा कि इस्लाम के सभी संप्रदाय इस बात पर सहमत हैं कि महिलाओं के मस्जिद में आने पर कोई प्रतिबंध नहीं है, हालांकि सामूहिक नमाज़ में महिलाओं की मौजूदगी अनिवार्य नहीं मानी जाती.
इसके बाद न्यायमूर्ति अमानुल्लाह ने कहा कि यह बात सभी के लिए साफ होनी चाहिए कि महिलाओं के मस्जिद में प्रवेश को लेकर कभी कोई विवाद रहा ही नहीं है और इसकी शुरुआत खुद पैगंबर मोहम्मद के समय से होती है.
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