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This Article is From Jan 07, 2026

राहत लेने वाले SC उम्मीदवार की अनारक्षित कैडर में नियुक्ति नहीं, आरक्षण पर SC का बड़ा फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने पुराने फैसले का हवाला देते हुए दोहराया कि यदि कोई आरक्षित श्रेणी का उम्मीदवार उम्र, कट-ऑफ या किसी अन्य रूप में रियायत लेता है, तो वह अनारक्षित श्रेणी में माइग्रेट नहीं कर सकता, जब तक कि नियम इसकी स्पष्ट अनुमति न दें.

राहत लेने वाले SC उम्मीदवार की अनारक्षित कैडर में नियुक्ति नहीं, आरक्षण पर SC का बड़ा फैसला
आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला.
  • SC ने कहा कि चयन प्रक्रिया में राहत लेने वाले अनुसूचित जाति के उम्मीदवार अनारक्षित रिक्तियों के लिए योग्य नहीं
  • कर्नाटक हाईकोर्ट का SC उम्मीदवार को अनारक्षित कैडर में नियुक्त करने का फैसला सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया
  • यह विवाद 2013 की इंडियन फॉरेस्ट सर्विस परीक्षा से जुड़ा था जिसमें SC और जनरल श्रेणी के कटऑफ में अंतर था
नई दिल्ली:

सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण को लेकर एक अहम फैसला दिया है. अदालत ने कहा कि अनुसूचित जाति (SC) श्रेणी का कोई उम्मीदवार अगर चयन प्रक्रिया के किसी भी चरण में छूट/रियायत का लाभ लेता है, तो उसे अनारक्षित (जनरल) श्रेणी की रिक्तियों के लिए नहीं माना जा सकता. जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस विजय बिश्नोई की पीठ ने केंद्र सरकार की अपील स्वीकार करते हुए कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले को रद्द कर दिया.

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रियायत लेने वाले उम्मीदवार पर SC का फैसला

हाईकोर्ट ने केवल इस आधार पर SC श्रेणी के उम्मीदवार को अनारक्षित कैडर में नियुक्त करने का निर्देश दिया था कि उसकी अंतिम रैंक जनरल श्रेणी के उम्मीदवार से अधिक थी. सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि एक बार आरक्षित श्रेणी का उम्मीदवार किसी भी स्तर पर रियायत ले लेता है, तो वह अनारक्षित रिक्तियों के लिए विचार योग्य नहीं रह जाता.

यह विवाद 2013 की इंडियन फॉरेस्ट सर्विस (IFS) परीक्षा से जुड़ा है, जो प्रारंभिक परीक्षा और मुख्य परीक्षा, इन दो अनिवार्य चरणों और इसके बाद साक्षात्कार को तहत आयोजित होती है. प्रारंभिक परीक्षा में जनरल कट-ऑफ 267 अंक था, जबकि SC श्रेणी के लिए रियायती कट-ऑफ 233 अंक तय किया गया था.

अंतिम मेरिट सूची में किरण को मिली19वीं रैंक 

 जी. किरण (SC) ने 247.18 अंक प्राप्त कर रियायती कट-ऑफ के आधार पर प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण की. वहीं एंटनी एस. मरियप्पा (जनरल) ने 270.68 अंक के साथ जनरल कट-ऑफ पर क्वालिफाई किया.हालांकि, अंतिम मेरिट सूची में किरण को 19वीं रैंक और एंटनी को 37वीं रैंक मिली.

कैडर आवंटन के समय कर्नाटक में केवल एक जनरल इनसाइडर सीट थी और SC इनसाइडर की कोई सीट नहीं थी. ऐसे में केंद्र सरकार ने जनरल इनसाइडर सीट एंटनी को दी और किरण को तमिलनाडु कैडर आवंटित किया. किरण ने इस फैसले को पहले CAT और फिर कर्नाटक हाईकोर्ट में चुनौती दी, जहां उसे राहत मिली. लेकिन केंद्र सरकार की अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने दोनों फैसलों को पलट दिया

कौन से उम्मीदवार अनारक्षित रिक्तियों के लिए विचार योग्य होंगे?

जस्टिस माहेश्वरी द्वारा लिखे गए फैसले में कहा गया कि IFS परीक्षा एक एकीकृत चयन प्रक्रिया है, जिसमें प्रारंभिक परीक्षा पास करना मुख्य परीक्षा में प्रवेश की अनिवार्य शर्त है. इसलिए, प्रारंभिक परीक्षा में ली गई कोई भी रियायत बाद के चरणों में नजरअंदाज नहीं की जा सकती. कोर्ट ने IFS परीक्षा नियम, 2013 के नियम 14(ii) की व्याख्या करते हुए कहा कि केवल वही आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवार अनारक्षित रिक्तियों के लिए विचार योग्य होंगे जिन्होंने परीक्षा के किसी भी चरण में कोई रियायत या छूट नहीं ली हो.

कोर्ट का पुराना फैसला जानें

कोर्ट ने पुराने फैसले का हवाला देते हुए दोहराया कि यदि कोई आरक्षित श्रेणी का उम्मीदवार उम्र, कट-ऑफ या किसी अन्य रूप में रियायत लेता है, तो वह अनारक्षित श्रेणी में माइग्रेट नहीं कर सकता, जब तक कि नियम इसकी स्पष्ट अनुमति न दें. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चूंकि संबंधित SC उम्मीदवार ने प्रारंभिक परीक्षा में रियायत का लाभ लिया था, इसलिए अंतिम रैंक अधिक होने के बावजूद वह जनरल कैडर/अनारक्षित इनसाइडर सीट का दावा नहीं कर सकता.

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