- दिल्ली में भारी और हल्के कमर्शियल वाहनों का पर्यावरण कंपनसेशन शुल्क अप्रैल 2026 से बढ़ा दिया जाएगा.
- सुप्रीम कोर्ट ने लाइट कमर्शियल वाहनों का शुल्क ₹1400 से ₹2000 और बड़े ट्रकों का ₹2600 से ₹4000 किया.
- ECC में हर वर्ष 5 प्रतिशत की वृद्धि होगी, जिसका प्रभाव अप्रैल 2027 से शुरू होगा.
दिल्ली में प्रवेश करने वाले भारी और हल्के कमर्शियल वाहनों जैसे ट्रक, वैन और डम्पर को अब 1 अप्रैल 2026 से ज्यादा पर्यावरण कंपनसेशन शुल्क (ECC) देना होगा. सुप्रीम कोर्ट ने CAQM के प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए यह बढ़ोतरी लागू कर दी है, ताकि राजधानी को ट्रांजिट रूट की तरह इस्तेमाल करने वाले वाहनों को हतोत्साहित किया जा सके.
कितना बढ़ा ECC?
सुप्रीम कोर्ट की बेंच- मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली ने चार्ज बढ़ाने पर सहमति जताई है.
- लाइट कमर्शियल वाहन व दो-एक्सल ट्रक: ₹1,400 से बढ़ाकर ₹2,000
- तीन-एक्सल व चार या अधिक एक्सल वाले ट्रक: ₹2,600 से बढ़ाकर ₹4,000
ये नई दरें 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगी. कोर्ट ने यह भी तय किया कि ECC दरों में हर वर्ष 5% की बढ़ोतरी होगी, जिसकी शुरुआत 1 अप्रैल 2027 से होगी.
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CJI की टिप्पणी: 'रिंग रोड बड़ा फ्लॉप साबित हुआ'
दिल्ली ट्रैफिक और प्रदूषण पर चर्चा के दौरान CJI सूर्यकांत ने कड़ी टिप्पणी की. उन्होंने कहा, 'रिंग रोड का कॉन्सेप्ट पूरी तरह फेल हो चुका है. 2002 में मैंने कहा था कि यह असफल होगा, लेकिन मेरी बात नहीं मानी गई.' इस पर ASG ऐश्वर्या भाटी ने जवाब दिया, 'अब आप ही इसे सुधार सकते हैं.'
कोर्ट ने क्यों बढ़ाए चार्ज?
कोर्ट का कहना है कि यह बढ़ोतरी तर्कसंगत है क्योंकि 2015 में ECC लागू होने के बाद से इसमें कोई बढ़ोतरी नहीं हुई थी. EPE और WPE पर टोल लगातार बढ़ा, जिससे दिल्ली से गुजरना फिर से सस्ता हो गया. ट्रक दिल्ली में घुसकर ट्रैफिक और प्रदूषण बढ़ा रहे थे. CAQM ने बताया कि ECC की वर्तमान दरें डर पैदा करने वाले प्रभाव (deterrence value) खो चुकी थीं और अब उन्हें सुधारना ज़रूरी हो गया था.
2015 में क्यों लगाया गया था ECC?
MC Mehta बनाम Union of India केस में सुप्रीम कोर्ट ने 2015 में ECC लागू किया था. क्योंकि ट्रक टोल बचाने के लिए दिल्ली में घुस जाते थे. इससे प्रदूषण और ट्रैफिक बढ़ता था. ECC से मिलने वाला पैसा पब्लिक ट्रांसपोर्ट और सड़क सुरक्षा सुधार पर खर्च किया जाना था.
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टेक्नोलॉजी से भी कम होगा जाम
CAQM ने सुझाव दिया है कि MCD अक्टूबर 2026 तक 126 एंट्री पॉइंट पर RFID आधारित MLFF (Multi-Lane Free Flow) सिस्टम, ANPR कैमरे स्थापित करे. ताकि टोल और ECC वसूली बिना रुके हो सके और बॉर्डर जाम कम हो.
दिल्ली में प्रदूषण और ट्रांजिट ट्रैफिक को नियंत्रित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला बड़ा कदम माना जा रहा है. बढ़ा हुआ ECC भारी वाहनों को EPE/WPE का उपयोग करने के लिए मजबूर करेगा और राजधानी की हवा और ट्रैफिक पर दबाव कम करने में मदद करेगा.
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