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ममता बनर्जी के राज में बांग्लादेश बन जाएगा बंगाल... NDTV से एक्‍सक्‍लूसिव बातचीत में बरसे सुकांत मजूमदार

सुकांत मजूमदार ने कहा कि पश्चिम बंगाल में चुनाव के दौरान भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती तृणमूल कांग्रेस नहीं, बल्कि प्रशासन है. उन्‍होंने कहा कि अगर प्रशासन को तृणमूल के प्रभाव से अलग कर दिया जाए, तो कई इलाकों में पार्टी के दफ्तर तक खोलने वाले लोग नहीं मिलेंगे.

ममता बनर्जी के राज में बांग्लादेश बन जाएगा बंगाल... NDTV से एक्‍सक्‍लूसिव बातचीत में बरसे सुकांत मजूमदार
  • सुकांत मजूमदार ने तृणमूल कांग्रेस सरकार और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तीखे हमले किए हैं.
  • सुकांत मजूमदार ने कहा कि चुनाव के दौरान भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती तृणमूल कांग्रेस नहीं, बल्कि प्रशासन है.
  • उन्‍होंने कहा कि ममता बनर्जी को न तो चुनाव आयोग पर भरोसा है और न ही न्यायपालिका पर.
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नई दिल्‍ली:

देश भर में नजरें पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव पर टिकी हैं. जैसे‑जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, राज्य की राजनीति में बयानबाजी तेज होती जा रही है. भाजपा ने एक बार फिर दावा किया है कि वह इस बार पश्चिम बंगाल में सरकार बनाएगी. केंद्रीय राज्य मंत्री और पश्चिम बंगाल भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और बालुरघाट से सांसद सुकांत मजूमदार ने तृणमूल कांग्रेस सरकार और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तीखे हमले किए हैं. एनडीटीवी से लंबी बातचीत में सुकांत मजूमदार ने चुनाव आयोग, प्रशासन, जनसांख्यिकीय बदलाव, केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई, पीएफआई, घुसपैठ, धार्मिक मुद्दों और आगामी चुनावी रणनीति पर खुलकर अपनी बात रखी. साथ ही कहा कि यदि ममता बनर्जी की सरकार रही तो बंगाल को बांग्‍लादेश बनने से कोई नहीं रोक सकता है. 

सुकांत मजूमदार ने कहा कि पश्चिम बंगाल में चुनाव के दौरान भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती तृणमूल कांग्रेस नहीं, बल्कि प्रशासन है. उन्‍होंने कहा कि अगर प्रशासन को तृणमूल के प्रभाव से अलग कर दिया जाए, तो कई इलाकों में पार्टी के दफ्तर तक खोलने वाले लोग नहीं मिलेंगे. साथ ही आरोप लगाया कि राज्य का प्रशासन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के इशारों पर काम करता है और इसी वजह से चुनावों में हिंसा की स्थिति बनती है. उन्होंने पंचायत चुनावों का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौरान कई लोगों की जान गई, जिसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए. मजूमदार ने कहा कि निर्वाचन आयोग का दायित्व है कि वह हिंसा‑मुक्त और निष्पक्ष चुनाव कराए और इसी दिशा में आयोग ने प्रशासनिक फेरबदल जैसे कदम उठाए हैं.

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चुनाव आयोग और न्यायालय पर भरोसे का दावा

तृणमूल कांग्रेस द्वारा चुनाव आयोग पर पक्षपात के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए सुकांत मजूमदार ने कहा कि ममता बनर्जी को न तो चुनाव आयोग पर भरोसा है और न ही न्यायपालिका पर. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि अदालत ने चुनाव आयोग से जुड़े मामलों में ममता सरकार की दलीलों को स्वीकार नहीं किया है.

मजूमदार ने तीखे शब्दों में कहा कि अगर किसी को भारत के चुनाव आयोग और सर्वोच्च न्यायालय पर भरोसा नहीं है, तो सवाल उठता है कि वह देश के लोकतांत्रिक ढांचे को कैसे स्वीकार करता है.

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SIR और मतदाता सूची विवाद पर भी बोले 

विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चल रहे विवाद पर सुकांत मजूमदार ने कहा कि मतदाता सूची से फर्जी नाम हटाना चुनाव आयोग का संवैधानिक दायित्व है. उन्‍होंने कहा कि फर्जी वोटिंग रोकने के लिए अगर आयोग कदम उठा रहा है, तो उस पर सवाल खड़े करना गलत है. 

उन्होंने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस को डर है कि निष्पक्ष प्रक्रिया से उसका चुनावी गणित बिगड़ सकता है, इसलिए वह SIR का विरोध कर रही है.

जनसांख्यिकीय बदलाव गंभीर मुद्दा: मजूमदार 

सुकांत मजूमदार ने पश्चिम बंगाल में जनसांख्यिकीय बदलाव को गंभीर मुद्दा बताया. उन्होंने दावा किया कि राज्य में मुस्लिम आबादी तेजी से बढ़ रही है और आने वाले समय में राजनीतिक संतुलन पूरी तरह बदल सकता है. उन्‍होंने कहा कि इस बार बंगाल में एक नई बनी पार्टी का एजेंडा है कि एक मुस्लिम उपमुख्यमंत्री हमें चाहिए, अगर यहां की जनसांख्यिकी में इस तरह से बदलाव होता रहा तो उनका सपना सच हो जाएगा. मजूमदार ने इस बदलाव के लिए ममता बनर्जी सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए आरोप लगाया कि सीमावर्ती इलाकों में घुसपैठ को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए.  

हम देश को नहीं बेच सकते: मजूमदार

बीएसएफ के अधिकार क्षेत्र और भूमि अधिग्रहण जैसे मुद्दों पर बोलते हुए सुकांत मजूमदार ने कहा कि हम देश को नहीं बेच सकते. चुनाव हारे या जीते कोई फर्क नहीं पड़ता, लेकिन देश सबसे पहले है. उनके अनुसार, तृणमूल कांग्रेस परोक्ष रूप से राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों से समझौता करने को तैयार रहती है.

ईडी और अन्य केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई को लेकर विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे आरोपों पर मजूमदार ने कहा कि ये एजेंसियां अदालतों के निर्देश पर काम करती हैं, न कि भाजपा के कहने पर. उन्होंने कहा कि अगर कार्रवाई होती है तो उसे राजनीति से प्रेरित बताया जाता है और अगर नहीं होती तो सेटिंग का आरोप लगाया जाता है. उनका कहना था कि आखिरकार अदालत तय करती है कि कौन दोषी है और कौन नहीं.

पीएफआई को लेकर गंभीर आरोप

सुकांत मजूमदार ने प्रतिबंधित संगठन पीएफआई को लेकर भी ममता सरकार पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में पीएफआई के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई और कई मामलों में तृणमूल नेताओं की मौजूदगी में गतिविधियां हुईं. उन्होंने केरल का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां पीएफआई से जुड़े लोगों की गिरफ्तारी हुई, जबकि बंगाल में ऐसा नहीं हुआ.

वहीं बाबरी मस्जिद और जगन्नाथ मंदिर से जुड़े सवालों पर सुकांत मजूमदार ने कहा कि सरकार का काम मंदिर बनाना नहीं है. उनके अनुसार, राम मंदिर का निर्माण हिंदू समाज ने किया है, न कि सरकार ने. उन्होंने ममता सरकार पर धार्मिक प्रतीकों के राजनीतिक इस्तेमाल का आरोप लगाया.

सोशल मीडिया पर फैल रहे राजनीतिक कंटेंट को लेकर मजूमदार ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस प्रोपेगेंडा फैलाने की कोशिश कर रही है, लेकिन जनता सब समझती है. उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा पर खान‑पान पर रोक लगाने जैसे आरोप पूरी तरह निराधार हैं.

चुनावी गणित और भाजपा का दावा

आगामी चुनाव को लेकर सुकांत मजूमदार ने दो टूक कहा कि पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार बनेगी. सीटों की संख्या पर उन्होंने स्पष्ट आंकड़ा देने से बचते हुए कहा कि पार्टी स्पष्ट बहुमत के साथ सत्ता में आएगी.

उन्होंने कहा कि इस बार भाजपा की रणनीति अलग है, संगठन मजबूत है और उम्मीदवारों की सूची में बाहरी चेहरों की जगह स्थानीय नेताओं को तरजीह दी गई है.

बंगाल को बचाने की लड़ाई

इंटरव्यू के अंत में सुकांत मजूमदार ने कहा कि बंगाल की मौजूदा स्थिति को देखते हुए यह सिर्फ सत्ता परिवर्तन की लड़ाई नहीं, बल्कि राज्य को असफलता से बाहर निकालने की चुनौती है. उन्‍होंने कहा कि ममता बनर्जी की सरकार एक बार फिर आती है तो आने वाले समय में बंगाल को बांग्लादेश बनने से कोई नहीं रोक सकता है. साथ ही उन्‍होंने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी को बांग्‍लादेश की भारत विरोधी ताकतें मदद करती हैं.

भाजपा नेता के इन बयानों पर तृणमूल कांग्रेस की ओर से पहले भी पलटवार होता रहा है और पार्टी लगातार आरोपों को खारिज करती रही है. ऐसे में आने वाले दिनों में जैसे‑जैसे चुनाव नजदीक आएंगे, बंगाल की राजनीति में बयानबाजी और तेज होने के आसार हैं.

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