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प्रयागराज की IIIT में छात्रों ने ERP सिस्टम हैक कर बढ़ाए मार्क्स, हुए सस्पेंड

ईआरपी सिस्टम जैसे संवेदनशील और अति गोपनीय सॉफ्टवेयर की हैकिंग करना इतना आसान नहीं होता है. छात्रों ने जिस तरीके से सिस्टम को हैक कर अपने मार्क्स बढ़ा लिए उससे संस्थान की सुरक्षा पर भी सवाल खड़ा हो गया है.

प्रयागराज की IIIT में छात्रों ने ERP सिस्टम हैक कर बढ़ाए मार्क्स, हुए सस्पेंड

देश के सबसे प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थान में छात्रों द्वारा संस्थान के ईआरपी सिस्टम को हैक कर अपनी मार्कशीट में नंबर बढ़ाने का मामला सामने आया है. ये मामला प्रयागराज के झलवा स्थित ट्रिपल आईटी यानी इंडियन इंस्टीट्यट ऑफ इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी का है. दिसंबर 2024 में संस्थान के ईआरपी सिस्टम (Enterprise Resource Planning) को बीटेक द्वितीय वर्ष के आठ छात्रों ने किसी तरह हैक कर लिया था और उसके बाद अनधिकृत रूप से सिस्टम के जरीए अपनी मार्कशीट में मार्क्स बढ़ा लिए थे.

इस घटना का खुलासा अब तीन महीने बाद होने से संस्थान में हड़कंप मच गया है. ईआरपी सिस्टम जैसे संवेदनशील और अति गोपनीय सॉफ्टवेयर की हैकिंग करना इतना आसान नहीं होता है. छात्रों ने जिस तरीके से सिस्टम को हैक कर अपने मार्क्स बढ़ा लिए उससे संस्थान की सुरक्षा पर भी सवाल खड़ा हो गया है. इस घटना के बाद संस्थान ने बड़ी कार्यवाई करते हुए आरोपी सभी छात्रों को एक साल के लिए निलंबित कर दिया है. यही नहीं सभी पर दस-दस हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है.

वहीं, इस मामले में ट्रिपल आईटी के पीआरओ पंकज मिश्रा ने बताया कि ईआरपी पोर्टल (इंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग) से छेड़छाड़ कर कुछ छात्रों ने अपनी मार्कशीट में मार्क्स बढ़ाने की कोशिश की थी. संस्थान को जब इस घटना का पता चला तो सिस्टम पर अपलोड मार्क्स का उनकी हार्ड कॉपी से मिलाए गए जिसके बाद ये खुलासा हुआ कि छात्रों ने सिस्टम को हैक कर अपने मार्क्स बढ़ाए थे. सभी की सस्पेंशन की कार्यवाई की गई है और दस हजार फाइन भी लगाया गया है.

वहीं, आरोपी छात्रों के परिजनों द्वारा संस्थान से उनके भविष्य को देखते हुए उनके खिलाफ सस्पेंशन की कार्यवाई पर रोक लगाने की गुजारिश भी की गई है. पीआरओ का कहना है कि सीनेट अब कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद निर्णय लेगी की आगे क्या करना है.

बता दें कि प्रयागराज का ट्रिपल आईटी देश में अपने नाम से जाना जाता है. विदेश और देश दोनों ही जगह से यहां हर साल हजारों बच्चे पढ़ने आते है. इसकी स्थापना 12 अगस्त 1999 में हुई थी और साल 2000 में इसे 'डीम्ड यूनिवर्सिटी' का दर्जा भी दिया गया था. इतिहास में ये पहली बार हुआ है जब इस संस्थान के सिस्टम से छेड़छाड़ कर छात्रों ने अपने नंबर बढ़ा लिए हो.

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