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आवारा कुत्तों में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की कही बड़ी बातें

SC की पीठ ने आवारा कुत्तों के खतरे को लेकर स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह अनुमान लगाना संभव नहीं है कि कोई कुत्ता कब काटने के मूड में होगा और कब नहीं. कोर्ट ने जोर देते हुए कहा, 'Prevention is always better than cure (इलाज से बेहतर रोकथाम है). सड़कों को कुत्तों से साफ और सुरक्षित किया जाना चाहिए. भले ही वे काटें नहीं, लेकिन दुर्घटनाओं का कारण जरूर बनते हैं.'

आवारा कुत्तों में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की कही बड़ी बातें
  • सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों की सड़कों पर मौजूदगी और उससे होने वाली दुर्घटनाओं पर गंभीर चिंता जताई है.
  • कोर्ट ने बताया कि कुत्तों का काटना ही नहीं बल्कि उनका पीछा करना भी सड़क सुरक्षा के लिए खतरनाक है.
  • वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल की दलीलों पर कोर्ट ने सख्त प्रतिक्रिया देते हुए उनकी जानकारी पुरानी बताई है.

सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान सड़कों पर उनकी मौजूदगी और उससे पैदा हो रहे खतरों पर अहम और सख्त टिप्पणियां कीं. कोर्ट ने साफ कहा कि समस्या केवल कुत्तों के काटने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके पीछा करने और दौड़ने की वजह से सड़क दुर्घटनाएं भी होती हैं, जो चलती गाड़ियों वाली सड़कों पर एक बड़ी चुनौती बन चुकी हैं.

कपिल सिब्बल को लगाई फटकार

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने दलील दी कि कुत्ते सड़कों पर नहीं, बल्कि परिसरों में पाए जाते हैं. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'क्या आप गंभीर हैं? आपकी जानकारी पुरानी लगती है.'

पीठ ने आवारा कुत्तों के खतरे को लेकर स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह अनुमान लगाना संभव नहीं है कि कोई कुत्ता कब काटने के मूड में होगा और कब नहीं. कोर्ट ने जोर देते हुए कहा, 'Prevention is always better than cure (इलाज से बेहतर रोकथाम है). सड़कों को कुत्तों से साफ और सुरक्षित किया जाना चाहिए. भले ही वे काटें नहीं, लेकिन दुर्घटनाओं का कारण जरूर बनते हैं.'

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सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया कि सड़कों, स्कूलों और संस्थागत परिसरों में कुत्तों की मौजूदगी की जरूरत ही क्या है. कोर्ट ने संकेत दिया कि यह केवल पशु कल्याण का नहीं, बल्कि आम लोगों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर सार्वजनिक मुद्दा है.

'कुत्तों को काउंसलिंग देना बाकी रह गया'

सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने यह भी कहा कि यदि कोई कुत्ता उग्र है या उसके काटने की आशंका होती है, तो उसे सेंटर बुलाकर पकड़ा जाता है, नसबंदी की जाती है और फिर उसी इलाके में छोड़ दिया जाता है. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने व्यंग्यात्मक टिप्पणी करते हुए कहा, 'अब बस कुत्तों को काउंसलिंग देना ही बाकी रह गया है, ताकि वापस छोड़े जाने के बाद वह काटे नहीं.'

'इस मुद्दे को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता'

हालांकि सिब्बल ने इस टिप्पणी को हल्के-फुल्के अंदाज में कही गई बात बताया, लेकिन कोर्ट ने गंभीर चिंता जताते हुए दोहराया कि मुद्दा केवल काटने का नहीं है. कोर्ट के मुताबिक, कुत्तों का सड़कों पर दौड़ना और वाहनों का पीछा करना दुर्घटनाओं की बड़ी वजह बन रहा है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.

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सुप्रीम कोर्ट की इन टिप्पणियों से साफ है कि आवारा कुत्तों का मुद्दा अब केवल मानवीय संवेदना नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा और सार्वजनिक हित से जुड़ा गंभीर सवाल बन चुका है.

'अगर एक बाघ आदमखोर हो जाए तो हम सभी बाघों को नहीं मारते'

सुप्रीम कोर्ट में डॉग लवर्स की ओर से बहस करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि आवारा कुत्तों की समस्या का समाधान हत्या नहीं, बल्कि वैज्ञानिक तरीका है. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर एक बाघ आदमखोर हो जाए तो हम सभी बाघों को नहीं मारते. इसी तरह कुत्तों के लिए CSVR मॉडल अपनाना चाहिए. Capture, Sterilise, Vaccinate, Release. सिब्बल ने बताया कि उत्तर प्रदेश में इस मॉडल से आवारा कुत्तों की संख्या लगभग शून्य तक लाई गई है. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर रैबीज़ संक्रमित और असंक्रमित कुत्तों को एक ही शेल्टर में रखा गया तो सभी संक्रमित हो जाएंगे.

गेटेड सोसइटी में कुत्तों के होने पर बहस

कोर्ट को बताया गया मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक और पंजाब जैसे राज्यों ने अभी तक पिछले आदेश के अमल को लेकर जवाब दाखिल नहीं किया है. इस पर SG मेहता ने कहा कि क्या गेटेड सोसाइटी में कुत्ते होने चाहिए, इसके लिए कोई ऐसा प्रोविजन होना चाहिए कि RWA वोट के आधार पर फैसला करे? क्योंकि सभी जानवर प्रेमी हैं लेकिन हम इंसान प्रेमी भी हैं, एक दिन कोई भैंस का दूध पीने के लिए भैंस लाना चाहेगा, क्या इसकी इजाज़त दी जा सकती है? दूसरों को दिक्कत होगी.

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