गुजरे जमाने की बॉलीवुड सुपरस्टार और दिवंगत अभिनेत्री श्रीदेवी की 2.7 एकड़ जमीन को लेकर नया कानूनी विवाद छिड़ गया है. ये सौदा 37 साल पहले हुए था लेकिन अब एक महिला और उसके भाई ने दावा किया है कि वे इस जमीन में 1/5 हिस्से के हकदार हैं. जिस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बोनी कपूर, जाह्नवी कपूर, खुशी कपूर और अन्य पक्षों को नोटिस जारी किया है. साथ ही अगली सुनवाई तक जमीन की मौजूदा स्थिति बरकरार रखने का आदेश दिया है. इसके साथ ही सर्वोच्च अदालत ने आपसी सहमति से भी मामले को सुलझाने की कोशिश करने को भी कहा है. अदालत ने संकेत दिया है कि विवाद सुलझाने के लिए एक सेवानिवृत्त हाईकोर्ट जज को मध्यस्थ नियुक्त किया जाएगा. मामले की अगली सुनवाई 18 दिसंबर को होगी, जब मध्यस्थता की प्रगति पर रिपोर्ट पेश की जाएगी.
क्या है जमीन का पूरा विवाद?
यह मामला 2.7 एकड़ जमीन से जुड़ा है, जिसे 19 अप्रैल 1988 को श्रीदेवी के परिवार को बेचा गया था. अब एम.सी. शिवाकामी नाम की महिला और उनके भाई का दावा है कि वे जमीन बेचने वाले परिवार से जुड़े कानूनी वारिस हैं और संपत्ति में उनका भी हिस्सा बनता है. महिला ने इसी दावे के आधार पर बोनी कपूर, जाह्नवी कपूर, खुशी कपूर और अन्य संबंधित पक्षों के खिलाफ मुकदमा दायर किया था. उनका कहना है कि उन्हें संपत्ति का कानूनी हिस्सा मिलना चाहिए.
हाईकोर्ट के आदेश पर क्यों उठे सवाल ?
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील राजू रामचंद्रन और वकील बालाजी श्रीनिवासन ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि ट्रायल कोर्ट ने शुरुआती स्तर पर महिला के मुकदमे को सुनवाई योग्य माना था. उनका कहना था कि ट्रायल कोर्ट ने माना था कि मुकदमा दायर करने की पर्याप्त वजह मौजूद हैं और मामला समय सीमा के भीतर है. इसलिए मुकदमे को आगे बढ़ना चाहिए था.
महिला की ओर से दलील दी गई कि मद्रास हाईकोर्ट ने यह भी जांचने की कोशिश की कि वह वास्तव में कानूनी वारिस हैं या नहीं और संबंधित पूर्व पत्नी की शादी वैध थी या नहीं. याचिकाकर्ता का कहना है कि यह सब मुकदमे की शुरुआती सुनवाई के दौरान नहीं किया जाना चाहिए था. उनके मुताबिक, 2023 में संपत्ति के पट्टा रिकॉर्ड में नाम बदलने के लिए आवेदन किया गया था और उसी के बाद विवाद सामने आया.
कपूर परिवार ने क्या कहा?
कपूर परिवार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने महिला के दावों का विरोध किया. उन्होंने अदालत को बताया कि जमीन की बिक्री 19 अप्रैल 1988 को हुई थी और कई दशक बाद इस सौदे को चुनौती दी जा रही है. सिंघवी ने कहा कि श्रीदेवी के निधन के बाद 2023 में नाम बदलने के लिए आवेदन किया गया और फिर 2025 में मुकदमा दायर कर दिया गया. उनके मुताबिक, करीब तीन दशक पुरानी बिक्री को अब चुनौती देना कानूनन स्वीकार नहीं किया जा सकता. उन्होंने यह भी कहा कि संबंधित याचिकाकर्ता 1995 और 1999 में वयस्क हो गए थे, लेकिन मुकदमा 2025 में दायर किया गया. इसलिए उनका दावा समय सीमा से बाहर है.
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने क्या पूछा?
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने अहम सवाल उठाए. अदालत ने पूछा कि जमीन बेचने वाले एम.सी. चंद्रशेखरन का संपत्ति में 1/5 हिस्सा था या नहीं. पीठ ने यह भी जानना चाहा कि क्या इस बात पर कोई विवाद है कि दावा करने वाले वास्तव में एम.सी. चंद्रशेखरन की संतान हैं. इस पर कपूर परिवार की ओर से कहा गया कि यदि किसी हिस्से का अधिकार बनता भी है तो वह संबंधित हिस्सेदार के हिस्से तक ही सीमित होगा.
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अदालत अब समझौते की राह क्यों तलाश रही है?
मामले में दोनों पक्ष अपने-अपने दावे कर रहे हैं. ऐसे में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पहले यह देखा जाना चाहिए कि क्या विवाद को आपसी सहमति से सुलझाया जा सकता है. इसी उद्देश्य से अदालत एक सेवानिवृत्त हाईकोर्ट जज को मध्यस्थ नियुक्त करेगी. सभी पक्ष उनके सामने बैठकर समाधान निकालने की कोशिश करेंगे. तब तक जमीन की मौजूदा स्थिति में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा. अब 18 दिसंबर को होने वाली अगली सुनवाई में अदालत मध्यस्थता की प्रगति की समीक्षा करेगी.
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