- भोपाल नगर निगम ने SC के आदेश पर 62,500 से अधिक आवासीय भूखंडों में व्यावसायिक गतिविधियों की पहचान की.
- निगम ने अब तक 6,589 संपत्ति मालिकों को नोटिस जारी किए हैं, जिनमें से 750 को अंतिम अल्टीमेटम दिया गया है.
- व्यापारियों ने नगर निगम की कार्रवाई के विरोध में रोशनपुरा चौराहे पर प्रदर्शन कर मिक्स्ड लैंड यूज की मांग की.
भोपाल में आवासीय क्षेत्रों में चल रही दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर अब बड़ी कार्रवाई की तैयारी है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद नगर निगम ने ऐसे 62,500 से अधिक भूखंड चिन्हित किए हैं, जहां रहवासी उपयोग की अनुमति होने के बावजूद व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं. अब तक 6,589 संपत्ति मालिकों को नोटिस जारी किए जा चुके हैं, जबकि 750 लोगों को अंतिम अल्टीमेटम दिया है. कार्रवाई की आहट से व्यापारी सड़क पर उतर आए हैं और राहत की मांग कर रहे हैं, वहीं निगम सीलिंग और अन्य कार्रवाई की तैयारी में जुटा है.
निगम की कार्रवाई के खिलाफ सड़कों पर उतरे व्यापारी
नगर निगम की कार्रवाई के विरोध में व्यापारियों ने रोशनपुरा चौराहे पर जोरदार प्रदर्शन किया. करीब पौने दो घंटे तक चक्काजाम कर सरकार और प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई. प्रदर्शन में बड़ी संख्या में व्यापारी, महिलाएं और स्थानीय लोग शामिल हुए. प्रदर्शनकारियों ने पोस्टर और बैनर लेकर अपनी मांगें उठाईं तथा बाद में सीएम हाउस की ओर कूच करने की कोशिश भी की, जिसे पुलिस ने रोक दिया.
व्यापारियों की यह हैं प्रमुख मांगें
प्रदर्शन कर रहे व्यापारियों का कहना है कि वर्षों से रहवासी क्षेत्रों में व्यापारिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं और अब अचानक कार्रवाई से हजारों परिवारों की आजीविका प्रभावित होगी. उन्होंने भोपाल मास्टर प्लान-2031 को लागू कर मिक्स्ड लैंड यूज की अनुमति देने और गुजरात मॉडल-2022 की तर्ज पर नियमितीकरण का कानून बनाने की मांग की है.
62,500 से ज्यादा प्रॉपर्टी निगम के रडार पर
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद नगर निगम ने संपत्ति कर रिकॉर्ड का अध्ययन कर ऐसे 62,500 से अधिक भूखंडों की पहचान की है, जहां आवासीय नक्शे पर व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा है. इनमें दुकानें, क्लीनिक, शोरूम, होटल, बार, कैफे और अन्य कारोबारी प्रतिष्ठान शामिल हैं. निगम का मानना है कि सर्वे आगे बढ़ने पर यह संख्या और बढ़ सकती है.
नोटिसों की संख्या तेजी से बढ़ी
नगर निगम ने 5 अगस्त से पहले 1,018 नोटिस जारी किए थे. इसके बाद कार्रवाई की रफ्तार बढ़ी और 5 से 12 अगस्त के बीच 1,163, 13 अगस्त को 1,135 तथा 14 अगस्त को अकेले 1,478 नोटिस जारी किए गए. वर्तमान में नोटिस पाने वालों की संख्या 6,589 से अधिक हो चुकी है. इनमें से 750 लोगों को अंतिम अल्टीमेटम दिया.
इन विधानसभा क्षेत्रों में सबसे ज्यादा नोटिस
नगर निगम के आंकड़ों के अनुसार सबसे अधिक नोटिस नरेला विधानसभा क्षेत्र में जारी किए हैं. यहां 1,470 प्रकरण सामने आए हैं. इसके बाद गोविंदपुरा में 1,250, मध्य विधानसभा क्षेत्र में 1,093 और हुजूर विधानसभा क्षेत्र में 1,032 नोटिस जारी किए हैं. निगम अब अंतिम चेतावनी के बाद कार्रवाई की तैयारी कर रहा है.
याचिका से शुरू हुआ पूरा मामला
यह मामला तब शुरू हुआ जब अरेरा कॉलोनी, रोहित नगर और बावड़िया कलां के रहवासी विवेक त्रिपाठी और पूर्णेंदु शुक्ला ने हाईकोर्ट और बाद में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की. याचिका में कहा गया कि आवासीय कॉलोनियों में घरों के नक्शे पास कराकर मॉल, शोरूम, क्लीनिक, बार और कैफे संचालित किए जा रहे हैं, जिससे ट्रैफिक, पार्किंग, शोर और सुरक्षा जैसी समस्याएं बढ़ गई हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने दिखाई सख्ती
याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि आवासीय भूखंडों का व्यावसायिक उपयोग नियमों के खिलाफ है. कोर्ट ने नगर निगम को कार्रवाई कर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे. बाद में जब यह जानकारी सामने आई कि कुछ सील प्रतिष्ठान दोबारा खुल गए हैं, तो अदालत ने नाराजगी जताते हुए राज्य सरकार से भी सख्त सवाल पूछे.
हाईलेवल कमेटी पर भी लगी रोक
राज्य सरकार ने मामले के समाधान के लिए 10 सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति बनाई थी, लेकिन 6 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने इस समिति पर रोक लगा दी. अदालत ने कहा कि जब मामला उसके समक्ष विचाराधीन है तो समानांतर जांच प्रक्रिया नहीं चलाई जा सकती. साथ ही हाईकोर्ट से मिले राहत आदेश भी समाप्त कर दिए गए.
19 अगस्त से शुरू हो सकती है कार्रवाई
कोर्ट की सख्ती के बाद नगर निगम ने फिर कार्रवाई तेज कर दी है. नोटिस जारी करने का अभियान लगातार जारी है और अब 750 मामलों में अंतिम चेतावनी दी जा चुकी है. नगर निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी का कहना है कि बीच का रास्ता निकालने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन फिलहाल 19 अगस्त से सीलिंग सहित अन्य कार्रवाई शुरू करने की तैयारी है.
रहवासियों ने कार्रवाई का किया समर्थन
दूसरी ओर, इस मामले के याचिकाकर्ता और कई रहवासी चाहते हैं कि नियमों के अनुसार कार्रवाई जल्द शुरू की जाए. उनका कहना है कि आवासीय इलाकों में बढ़ती व्यावसायिक गतिविधियों ने ट्रैफिक, पार्किंग और सुरक्षा संबंधी समस्याओं को गंभीर बना दिया है. ऐसे में वे सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन कराने की मांग कर रहे हैं.
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