राजस्थान के श्रीगंगानगर में रेलवे ट्रैक पर हुए ब्लास्ट ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है. राजस्थान ATS, इंटेलिजेंस टीम, NIA, IB और मिलिट्री इंटेलिजेंस के अधिकारी फॉरेंसिक टीम के साथ घटनास्थल पर जांच में जुटे रहे. इसके अलावा दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और पंजाब पुलिस भी अपने स्तर पर इस पूरे मामले की पड़ताल कर रही हैं. इस ब्लास्ट को लेकर सबसे बड़ा सवाल इसके तरीके को लेकर है. शुरुआती जांच में घटनास्थल से ऐसा कोई विस्फोटक सामान बरामद नहीं हुआ है, जो आमतौर पर इस तरह के धमाकों में इस्तेमाल होता है. मौके से न कोई पाउडर मिला है, न कोई दूसरा केमिकल, न तार, न डेटोनेटर और न ही कील जैसी कोई चीज बरामद हुई है.
पैटर्न समझने में जुटी है जांच एजेंसी
यही वजह है कि जांच एजेंसियां इस ब्लास्ट के पैटर्न को समझने में जुटी हैं. क्या विस्फोट के लिए किसी अलग तकनीक का इस्तेमाल किया गया? क्या विस्फोटक का कोई ऐसा तरीका अपनाया गया, जिसके निशान घटनास्थल पर आसानी से नहीं मिले? फिलहाल इन सवालों के जवाब फॉरेंसिक जांच और तकनीकी पड़ताल के बाद ही सामने आ सकेंगे.
जहां धमाका हुआ, वहां पास में ही सड़क
जिस जगह रेलवे ट्रैक पर ब्लास्ट हुआ, वहां की भौगोलिक स्थिति भी जांच का अहम हिस्सा है. ट्रैक के एक तरफ सड़क है, जबकि दूसरी तरफ कुछ दूरी पर एक किसान परिवार का घर मौजूद है. आसपास कोई CCTV कैमरा नहीं है. जांच में सामने आया है कि जिस ट्रैक पर ब्लास्ट हुआ, वहां आखिरी ट्रेन धमाके से करीब 45 मिनट से एक घंटे पहले गुजरी थी. इसके बाद अगली ट्रेन अगले दिन सुबह गुजरनी थी.
श्रीगंगानगर रेलवे ट्रैक ब्लास्ट केस में कई सवाल
- यहीं से जांच एजेंसियों के सामने कई अहम सवाल खड़े हो रहे हैं. अगर मकसद किसी पैसेंजर ट्रेन को निशाना बनाना था, तो ट्रेन के गुजरने के वक्त विस्फोट क्यों नहीं किया गया? क्या धमाके का मकसद ट्रेन को उड़ाना नहीं, बल्कि रेलवे ट्रैक को नुकसान पहुंचाना या किसी बड़ी साजिश का परीक्षण करना था?
- क्या किसी नए स्लीपर सेल को अपनी मौजूदगी दर्ज कराने या किसी संगठन का भरोसा जीतने के लिए इस तरह का टास्क दिया गया था? क्या इस धमाके के जरिए सुरक्षा एजेंसियों को कोई संदेश देने की कोशिश की गई?
क्यों अहम है इस हमले की साजिश को समझना?
रेलवे ट्रैक को निशाना बनाने की साजिश का एंगल इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि इससे पहले पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के इशारे पर शहजाद भट्टी से जुड़े नेटवर्क पर रेलवे ट्रैक को निशाना बनाने की साजिश रचने के आरोप सामने आ चुके हैं. इसके अलावा आतंकी फरतुल्लाह गौरी भी पहले रेलवे ट्रैक को उड़ाने की धमकी दे चुका है.
पिछले साल खुरासान मॉड्यूल ने रची थी ऐसी ही साजिश
ऐसे में जांच एजेंसियां इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि श्रीगंगानगर ब्लास्ट का कहीं पाकिस्तान से संचालित आतंकी नेटवर्क या किसी पुराने मॉड्यूल से कोई कनेक्शन तो नहीं है. पिछले साल खुरासान मॉड्यूल से जुड़े लोगों की ओर से भी रेलवे ट्रैक को निशाना बनाने की साजिशों का मामला सामने आया था. इस मॉड्यूल के सिलसिले में मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में कई गिरफ्तारियां हुई थीं.
कुछ स्थानीय को हिरासत में लेकर पूछताछ
तेलंगाना पुलिस से मिले इनपुट के आधार पर भी इस नेटवर्क की जांच की गई थी. अब श्रीगंगानगर में रेलवे ट्रैक पर हुए ब्लास्ट के बाद एजेंसियां इस पुराने नेटवर्क और उससे जुड़े लोगों के कनेक्शन की भी पड़ताल कर सकती हैं. इस मामले में जांच एजेंसियों ने कुछ स्थानीय लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ भी की है. सूत्रों के मुताबिक, ये लोग पहले पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए राजस्थान में हथियार, ड्रग्स और गोला-बारूद की खेप पहुंचाने वाले नेटवर्क से जुड़े रहे हैं.

शहजाद के हैंडलर कुलवंत से भी पूछताछ
एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या इन स्थानीय लोगों का किसी ऐसे नेटवर्क से संपर्क था, जो रेलवे ट्रैक पर ब्लास्ट करने की साजिश में शामिल हो सकता है. पंजाब पुलिस द्वारा हाल ही में गिरफ्तार किए गए कुलवंत सिंह से भी पूछताछ कर रही है. जांच एजेंसियां उससे पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए आने वाली हथियारों और विस्फोटक सामग्री की सप्लाई को लेकर इनपुट जुटाने की कोशिश कर रही हैं.
दिवाली से पहले हमले की साजिश का मिला था इनपुट
सूत्रों के मुताबिक, अक्टूबर महीने में ड्रोन के जरिए श्रीगंगानगर में RDX और तुर्किये में बनी जिगाना पिस्टल की खेप पहुंचने की जानकारी भी जांच के दायरे में है. एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इस खेप का रेलवे ट्रैक ब्लास्ट से कोई संबंध है या नहीं. सूत्रों के मुताबिक, दीपावली से पहले पंजाब में एक महत्वपूर्ण सुरक्षा इनपुट जारी किया गया था. इस इनपुट में आशंका जताई गई थी कि ISI, सेना और अर्धसैनिक बलों के बड़े प्रतिष्ठानों के साथ-साथ उनके वाहनों और काफिलों को निशाना बनाने की कोशिश कर सकती है.
इस इनपुट के बाद सुरक्षा एजेंसियां पहले से सतर्क हैं. अब श्रीगंगानगर रेलवे ट्रैक ब्लास्ट के बाद राजस्थान और पंजाब से जुड़े सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय नेटवर्क की भी गहन जांच की जा रही है.
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