देश के कई हिस्सों में महत्वपूर्ण खरीफ फसलों की बुआई पर बारिश की कमी के असर को लेकर चिंता बढ़ गई है. भारत मौसम विभाग की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, सबसे ज्यादा कमी पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत में रिकॉर्ड की गई है, जहां 21 जुलाई तक औसत से 32 प्रतिशत कम बारिश रिकॉर्ड की गई है.
मॉनसून सीजन के दौरान बारिश की कमी 21 जुलाई तक 21% हुई, खरीफ फसलों का बुआई क्षेत्र पिछले साल से करीब 42 लाख हेक्टेयर तक घटा. इस साल दक्षिण-पश्चिम मॉनसून सीजन के दौरान 1 जून से 21 जुलाई 2026 के बीच बारिश की कमी 21% तक रिकॉर्ड की गई है.
उत्तर-पश्चिम भारत में बारिश की कमी 18 प्रतिशत
दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत (South Peninsula India) में बारिश औसत से 26% कम दर्ज की गई है, जबकि उत्तर-पश्चिम भारत में बारिश की कमी 18 प्रतिशत और मध्य भारत के इलाकों में 13 प्रतिशत आंकी गई है. मॉनसून की बारिश में 21 प्रतिशत की कमी ऐसे समय पर रिकॉर्ड की गई है, जब देश में महत्वपूर्ण खरीफ सीजन जारी है.
17 जुलाई तक फसलों की बुआई का आंकड़ा
कृषि मंत्रालय द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, 17 जुलाई 2026 तक देशभर में खरीफ सीजन के दौरान कुल 658.19 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में महत्वपूर्ण फसलों की बुआई हुई है, जो पिछले साल के मुकाबले 42.28 लाख हेक्टेयर (-06.04%) कम है. पिछले साल 17 जुलाई तक देश में कुल 700.47 लाख हेक्टेयर इलाके में खरीफ फसलों की बुआई हो चुकी थी.
इस दौरान अहम दलहन फसलों की बुआई में सबसे ज्यादा 12.29 लाख हेक्टेयर (-15.08%) की कमी रिकॉर्ड की गयी है, जबकि तिलहन फसलों की बुआई 8.63 लाख हेक्टेयर (-5.54%) इलाके में घट गई है. इस दौरान चावल की बुआई में 1.41 लाख हेक्टेयर (-0.84%) घटी है, जो राहत की बात है.
उत्तर-पश्चिम और उत्तर-पूर्व भारत में मॉनसून के सक्रिय रहने की संभावना
भारत मौसम विभाग ने अपनी ताजा पूर्वानुमान रिपोर्ट में कहा है कि अगले 3-4 दिनों में उत्तर-पश्चिम और उत्तर-पूर्व भारत में मॉनसून के सक्रिय रहने की संभावना है. मंगलवार को जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तर प्रदेश में कुछ जगहों पर भारी से बहुत भारी बारिश और कहीं-कहीं बहुत ज्यादा भारी बारिश होने की संभावना है. हालांकि, अगले 7 दिनों तक पश्चिम-मध्य और दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में बारिश की गतिविधियां कम रहने की संभावना है. जाहिर है कि मॉनसून की कमी से जूझ रहे पश्चिम-मध्य और दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में अगर बारिश की स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो इसका असर खरीफ फसलों की बुआई पर बढ़ता जाएगा.
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