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राम मंदिर दान चोरी के बाद सबरीमाला मंदिर सोना चोरी कांड पर भी लगी मुहर, भ्रष्टों ने ऐसे दिखाई हाथ की सफाई

राम मंदिर दान विवाद के बाद अब केरल का प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर एक बड़े घोटाले को लेकर चर्चा में है. मंदिर से सोना गायब होने के मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने केरल हाईकोर्ट में बेहद चौंकाने वाली रिपोर्ट पेश की है. खुलासे के मुताबिक, एक सोची-समझी साजिश के तहत मंदिर के गर्भगृह के बाहर स्थित दो द्वारपाल मूर्तियों से असली सोना उतारकर चोरी कर लिया गया. (अश्विन नंदकुमार की रिपोर्ट)

राम मंदिर दान चोरी के बाद सबरीमाला मंदिर सोना चोरी कांड पर भी लगी मुहर, भ्रष्टों ने ऐसे दिखाई हाथ की सफाई
राम मंदिर दान चोरी के बाद सबरीमाला मंदिर सोना चोरी कांड का खुलासा
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Sabarimala temple gold theft case: राम मंदिर (Ram Mandir) दान चोरी का मामला अभी ठंडा भी नहीं हुआ है कि अब केरल के सबरीमाला मंदिर में सोने की चोरी पर एसआईटी ने अपनी मुहर लगा दी है. दरअसल, सबरीमाला मंदिर सोना चोरी कांड की जांच के लिए गठित की गई SIT ने केरल हाईकोर्ट में बड़ा खुलासा किया है. एसआईटी ने बताया कि भ्रष्ट मूर्तियों से सोना उतारकर चोरी को अंजाम दिया और अपनी करतूत को छिपाने के लिए नकली प्लेटिंग कर दी गई. 

केरल की प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर से सोना गायब होने के मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने केरल हाईकोर्ट में एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा किया है. जस्टिस राजा विजयराघवन वी और जस्टिस केवी जयकुमार की खंडपीठ के सामने पेश की गई रिपोर्ट के मुताबिक मंदिर के गर्भगृह के बाहर स्थित दो द्वारपालों यानी रक्षक मूर्तियों पर चढ़ाए गए असली सोने को सोची-समझी साजिश के तहत उतारकर चोरी कर लिया गया था. इस बड़ी चोरी को छिपाने के लिए बाद में मूर्तियों पर सोने के पानी की एक पतली परत चढ़ा दी गई थी, ताकि किसी को शक न हो.

तांबे की प्लेट बताकर चेन्नई भेजने की चालाकी

SIT की जांच और अदालत की टिप्पणियों के मुताबिक, इन दोनों द्वारपाल मूर्तियों को साल 1998 में मूल रूप से सोने से मढ़ा गया था. इसके बाद साल 2019 में एक स्पॉन्सर उन्नीकृष्णन पोट्टी के कहने पर इन मूर्तियों को चेन्नई भेजा गया था. इस दौरान ये सबसे बड़ी गड़बड़ी की गई . त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड के अधिकारियों ने मूर्तियों के असली सोने को छिपाने के लिए आधिकारिक कागजात में इन्हें महज 'तांबे की प्लेट' के रूप में दर्ज कर के मंजूरी दी थी.

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चोरी छिपाने के लिए रची गई नई साजिश

अदालत ने नोट किया कि आरोपियों की यह चालाकी ज्यादा दिनों तक टिक नहीं सकी और कुछ ही महीनों के भीतर मूर्तियों की वह पतली प्लेटिंग पूरी तरह घिस गई, जिससे अंदर का तांबा साफ दिखाई देने लगा. इस पुरानी चोरी पर पर्दा डालने के लिए आरोपियों ने एक बार फिर से नई साजिश रची और 13 नवंबर 2023 को जब देवस्वम बोर्ड के नए अध्यक्ष सीपीएम सदस्य पीएस प्रशांत ने पदभार संभाला, तब स्पॉन्सर ने उनका भरोसा जीतकर देवस्वम मैनुअल और हाईकोर्ट के पुराने निर्देशों का उल्लंघन करते हुए मूर्तियों को दोबारा 'सोने का काम ठीक कराने' के बहाने चेन्नई भेजने का फैसला पास करवा लिया था.

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