- जयशंकर ने चेतावनी दी कि अनाज की सप्लाई और खाद के उत्पादन में बड़ा संकट पैदा हो सकता है.
- उन्होंने याद दिलाया कि इतिहास गवाह है कि जब भी कहीं शासन-व्यवस्था चरमराई है, तो उसकी भारी कीमत चुकानी पड़ी है.
- शिवराज चौहान ने बताया कि अभी तक कर्नाटक, महाराष्ट्र सहित कई राज्य सूखे से प्रभावित हुए हैं.
तेल और गैस संकट के बाद क्या अब अनाज संकट दस्तक देने वाला है? ये कोई अफवाह नहीं, बल्कि भारत सरकार के दो वरिष्ठ मंत्रियों की चेतावनी है. दोनों ने साफ शब्दों में कहा है कि आने वाले महीनों में खाने-पीने के सामान का संकट हो सकता है. हालांकि, दोनों ने संकट के कारण अलग-अलग बताए हैं. मगर, दोनों ही कारण ठोस हैं और साफ दिखाई पड़ रहे हैं. ऐसे में इन चेतावनियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि अगले कुछ महीनों में अनाज का संकट दिखाई पड़ सकता है.
सबसे पहले विदेश मंत्री की बात समझिए
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने चेतावनी दी कि दुनिया भर में चल रहे झगड़ों और उनके कारण अनाज की सप्लाई और खाद के उत्पादन में आ रही रुकावटों से आने वाले महीनों में खाने-पीने की चीजों का बड़ा संकट पैदा हो सकता है, जिससे विकासशील देशों पर बहुत ज़्यादा दबाव पड़ेगा. न्यूयॉर्क में एशिया सोसाइटी के एक कार्यक्रम में बोलते हुए, विदेश मंत्री जयशंकर ने इन खतरों का सीधा संबंध ऊर्जा सप्लाई, अनाज के निर्यात, खाद और ग्लोबल फाइनेंस में आ रही भारी दिक्कतों से जोड़ा. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यूक्रेन संघर्ष और ईरान-खाड़ी संकट का गहरा असर उन देशों की सीमाओं से कहीं आगे तक महसूस किया जा रहा है, जो सीधे तौर पर इसमें शामिल हैं.
-
NDTV World Summit 2026: PM मोदी समेत शामिल होंगे ये बड़े दिग्गज, जानिए क्या कुछ होगा खास? -
NDTV World Summit 2026: दिल्ली में दो दिन दुनिया के दिग्गजों का महामंथन -
NDTV World Summit 2026 का काउंटडाउन शुरू, एक मंच पर जुटेंगे दुनिया के दिग्गज -
NDTV World Summit 2026: 22-23 अक्टूबर को फिर सजेगा दुनिया के दिग्गजों का महामंच, देखिए पहली झलक -
दुनिया की सबसे असरदार और सबसे दमदार आवाजों के साथ लौट रहा है NDTV World Summit, देखिए सिर्फ NDTV पर -
NDTV World Summit 2026: AI, कूटनीति और अर्थव्यवस्था पर चर्चा, आज एक मंच पर जमा होंगे दुनिया के दिग्गज -
भारत की आर्थिक बढ़त से मानवता पर AI के खतरों तक, NDTV World Summit 2026 के दूसरे दिन किन मुद्दों पर होगी बात -
NDTV World Summit 2026: दुनिया की पहली AI एक्ट्रेस टिली नॉरवुड होंगी शामिल, कृति सेनन भी बनेंगी हिस्सा -
डिजिटल इकोनॉमी, एनर्जी, ग्लोबल ट्रेड... NDTV World Summit में पहले दिन किन-किन मुद्दों पर होगी बात -
NDTV World Summit 2026: दुनिया भर में कैसे बदल रहा है भारतीय खाने का स्वाद? वीर सांघवी बताएंगे देसी शेफ्स का ज

खेती-बाड़ी से जुड़ी दिक्कतों की गंभीरता बताते हुए उन्होंने कहा, "हम पहले ही खाद की भारी कमी देख रहे हैं." साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि अनाज निर्यात करने वाले मुख्य देशों को शिपमेंट भेजने में, खासकर अहम ब्लैक सी कॉरिडोर के ज़रिए, भारी रुकावटों का सामना करना पड़ेगा. हालात की गंभीरता को देखते हुए विदेश मंत्री जयशंकर ने चेतावनी दी, "तो शायद आने वाले महीनों में खाने-पीने की चीजों का एक बड़ा संकट पैदा हो सकता है." उनकी बातों से पता चलता है कि यह स्थिति सिस्टम से जुड़ा खतरा है, न कि कोई ऐसा नतीजा जो पहले ही हो चुका है.
एस जयशंकर ने इतिहास याद दिलाया
ऊर्जा सुरक्षा भी चिंता का एक और बड़ा कारण बनी हुई है. जयशंकर ने ये बताते हुए कि ग्लोबल मार्केट में सप्लाई की स्थिति तंग है, उन्होंने चेतावनी दी कि तेल की सप्लाई पर असर डालने वाले राजनीतिक फैसलों से कीमतें कृत्रिम रूप से बढ़ सकती हैं, ऐसे समय में जब देशों को मैक्रो-इकोनॉमिक स्थिरता की बहुत जरूरत है; उन्होंने सप्लाई सुरक्षा और उससे जुड़े भू-राजनीतिक दखल को आपस में गहराई से जुड़े दबाव बताया. इसके असर सिर्फ महंगाई बढ़ने तक ही सीमित नहीं हैं.
कृषि मंत्री ने इन राज्यों में सूखे का ऐलान किया
दिल्ली में रबी अभियान-2026 से जुड़े राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन में 18 राज्यों के कृषि मंत्रियों के साथ संवाद के बाद कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि अभी तक कर्नाटक, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश का रायलसीमा इलाका, तेलंगाना और राजस्थान का भी कुछ हिस्सा सूखे से प्रभावित हुआ है. हालांकि, कर्नाटक और महाराष्ट्र को छोड़कर दूसरे राज्यों से विस्तृत रिपोर्ट आना अभी बाकी है.

क्यों सूखे की स्थिति आई
इस साल दक्षिण-पश्चिम मॉनसून सीजन के दौरान देशभर में औसत से 12 फीसद कम बारिश रिकॉर्ड की गई. कुछ राज्यों में बारिश की कमी ज्यादा है. इस वजह से वहां के कुछ हिस्सों में सूखे के हालात हैं. सरकार के मुताबिक, इस वजह से खरीफ फसल की बुवाई औसत से सिर्फ एक फीसद ही कम हुई है. खराब मानसून की वजह से 16.32 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की बुवाई घटी है. वहीं बाढ़ और भारी बारिश की वजह से 6.11 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में लगी फसलें प्रभावित हुई हैं. इन सबके बाद भी इस सीजन में उड़द, बाजरा, ज्वार, तिल, सूरजमुखी और तुअर (अरहर) जैसी फसलों का रकबा बढ़ा है.

देश में सूखे का क्या असर पड़ा है?
प्राकृतिक मार से प्रभावित क्षेत्र के बारे में शिवराज सिंह ने बताया कि कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, राजस्थान और गुजरात में भारी वर्षा, बाढ़ या सूखे से करीब 6,11,000 हेक्टेयर क्षेत्र में फसल प्रभावित होने की प्रारंभिक सूचना मिली है, जिसके नुकसान का विस्तृत वैज्ञानिक आकलन कराया जा रहा है.

सरकार के मुताबिक, इस साल कम बारिश की वजह से खरीफ फसल की बुवाई औसत से सिर्फ एक फीसद ही कम हुई है. इस साल 16.32 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की बुवाई घटी है और बाढ़ और भारी बारिश की वजह से 6.11 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में लगी फसलें प्रभावित हुईं हैं.
यह भी पढ़ें-
यूपी में 100 से ज्यादा विधायकों के टिकट काट सकती है बीजेपी, सिर्फ एक शर्त पर मिलेगा सिंबल
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं