इस साल दक्षिण-पश्चिम मॉनसून सीजन के दौरान देशभर में औसत से 12 फीसद कम बारिश रिकॉर्ड की गई. कुछ राज्यों में बारिश की कमी ज्यादा है. इस वजह से वहां के कुछ हिस्सों में सूखे के हालात हैं. सरकार के मुताबिक इस वजह से खरीफ फसल की बुवाई औसत से सिर्फ एक फीसद ही कम हुई है. खराब मानसून की वजह से 16.32 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की बुवाई घटी है. वहीं बाढ़ और भारी बारिश की वजह से 6.11 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में लगी फसलें प्रभावित हुई हैं. इन सबके बाद भी इस सीजन में उड़द, बाजरा, ज्वार, तिल, सूरजमुखी और तुअर (अरहर) जैसी फसलों का रकबा बढ़ा है.
केंद्रीय कृषि मंत्री ने क्या बताया है
दिल्ली में रबी अभियान-2026 से जुड़े राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन में 18 राज्यों के कृषि मंत्रियों के साथ संवाद के बाद कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ये जानकारी दी. अभी तक कर्नाटक, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश का रायलसीमा इलाका, तेलंगाना और राजस्थान का भी कुछ हिस्सा सूखे से प्रभावित हुआ है. हालांकि कर्नाटक और महाराष्ट्र को छोड़कर दूसरे राज्यों से विस्तृत रिपोर्ट आना अभी बाकी है.
देश में सूखे के हालात पर शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को कहा,''कर्नाटक सरकार ने हमसे कहा है कि एक केंद्रीय टीम सूखा प्रभावित इलाकों के आंकलन के लिए भेजी जाए. हमने तीन अक्टूबर को एक केंद्रीय टीम कर्नाटक भेजने का फैसला किया है. केंद्रीय टीम महाराष्ट्र के सूखा प्रभावित इलाकों का भी दौरा करेगी. मैं स्वयं भी इन राज्यों का दौरा करुंगा. हम सूखा के संकट से निपटने के लिए राज्य सरकारों का पूरा सहयोग करेंगे.''
देश में सूखे का क्या असर पड़ा है
प्राकृतिक मार से प्रभावित क्षेत्र के बारे में शिवराज सिंह ने बताया कि कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, राजस्थान और गुजरात में भारी वर्षा, बाढ़ या सूखे से करीब 6,11,000 हेक्टेयर क्षेत्र में फसल प्रभावित होने की प्रारंभिक सूचना मिली है, जिसके नुकसान का विस्तृत वैज्ञानिक आकलन कराया जा रहा है.
कृषि मंत्रालय के मुताबिक, राष्ट्रीय आपदा मोचन निधि (एनडीआरएफ) के तहत केंद्रीय टीम के अंतिम सर्वे के बाद गृह मंत्री की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय समिति द्वारा नुकसान के आधार पर राज्यों को अतिरिक्त वित्तीय राहत पैकेज स्वीकृत किया जाएगा.
इस साल खरीफ सीजन के दौरान औसत से कम बारिश होने की वजह से खरीफ फसलों की बुआई पिछले साल के मुकाबले 13.54 लाख हेक्टेयर (-1.21 फीसद) कम इलाके में हुई है. कृषि मंत्रालय के मुताबिक, अल-नीनो और कम बारिश की चुनौती लगभग बेअसर है, क्योंकि देश में 163 लाख मीट्रिक टन खाद का मजबूत स्टॉक मौजूद है.
सरकार कबसे कर रही थी अल नीनो से निपटने की तैयारी
कृषि मंत्री के मुताबिक,''खरीफ सीजन पर अल नीनो के असर को लेकर आशंका थी. इसको देखते हुए अप्रैल से ही तैयारी शुरू की गई थी. इस साल दक्षिण पश्चिम मानसून सीजन के दौरान औसत से 12 फीसद कम बारिश हुई है. लेकिन खरीफ फसल की बुवाई औसत से सिर्फ एक फीसद कम रही है. 16.32 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की बुवाई घटी है और बाढ़, भारी बारिश की वजह से 6.11 lakh हेक्टेयर क्षेत्र में फसल प्रभावित हुई है.'' हालांकि इस सीजन के दौरान उड़द, बाजरा, ज्वार, तिल, सूरजमुखी और तुअर (अरहर) जैसी दलहन, तिलहन और मोटे अनाजों के रकबे में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
ये पूछे जाने पर कि खरीफ सीजन के दौरान बुआई में मामूली गिरावट का खाद्य उत्पादन पर कितना असर पड़ेगा, कृषि मंत्री ने दावा किया कि औसत से कम बारिश की वजह से खाद्य उत्पादन पर ज्यादा असर पड़ेगा, यह कहना सही नहीं होगा...उत्पादन कम होगा यह आशंका निर्मूल है!
नई दिल्ली में आयोजित दो-दिवसीय 'राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन– रबी अभियान 2026' में असल नीनो के बढ़ते खतरे से निपटने की रणनीति और जलवायु परिवर्तन, अनिश्चित बारिश और पानी की कमी जैसी चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा हुई.
रबी सीजन के लिए क्या है सरकार की तैयारी
रबी सीजन के दौरान इस खतरे को देखते हुए कौन सी फसल लगाना जरूरी होगा, इस पर केंद्र सरकार और राज्यों के बीच विस्तार से चर्चा हुई. शिवराज सिंह ने राज्यों के कृषि मंत्रियों को आश्वासन दिया कि विपरीत परिस्थितियों के बावजूद भी देश में खाद की कोई कमी नहीं है. उन्होंने कहा कि देश में उर्वरक की पर्याप्त उपलब्धता रबी सीजन में बनी रहेगी.
राज्यों से मिले इनपुट के आधार पर कृषि मंत्रालय ने 2026-27 में अल नीनो की स्थिति को देखते हुए 373.93 मिलियन टन अनाज उत्पादन का लक्ष्य तय किया है. इसमें रबी सीजन के लिए 177.72 मिलियन टन का टारगेट तय किया गया है.
देश में 22 अक्टूबर से 30 नवंबर 2026 तक 'खेत बचाओ अभियान' चलाया जाएगा. इस अभियान के दौरान आईसीएआर के वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्रों के विशेषज्ञ, आत्मा (ATMA) की टीमें, राज्य कृषि विभाग के अधिकारी और केंद्रीय और राज्यों के मंत्री सीधे गांवों और खेतों में किसानों के बीच जाएंगे.
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