एशियाई खेलों के सेमीफाइनल में श्रीलंका के खिलाफ ईशान किशन ने भारत के लिए बेहद मुश्किल हालात में अपनी सबसे अच्छी T20 पारी खेली, लेकिन खुद झारखंड के इस शानदार बल्लेबाज ने माना कि गुरुवार को श्रीलंका के बेहतरीन स्पिन अटैक का सामना करते हुए पिच पर पड़ी दरारों को देखकर उन्हें ज्यादा भरोसा नहीं हो रहा था. लगातार बारिश और उसके बाद तेज धूप की वजह से पिच की ग्राउंड के नीचे ह्यूमिडिटी रह गई थी, जिससे बड़ी-बड़ी दरारें पड़ गईं और गेंद कभी ऊंची-नीची तो कभी तेजी से घूमकर आ रही थी. कोरोगी एथलेटिक पार्क में किशन ने 46 गेंदों पर नाबाद 80 रनों की शानदार पारी खेली, पूरी श्रीलंकाई टीम कुल मिलाकर सिर्फ़ 45 रन ही बना पाई.
टीम मीटिंग में बना था प्लान
मैच के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में ईशान ने कहा, 'सच कहूं तो, हालात बहुत मुश्किल थे.' उन्होंने अकेले दम पर भारत को अपने कड़े प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान के खिलाफ गोल्ड मेडल के मुकाबले तक पहुंचाया. 'मैदान पर मुझे ज्यादा भरोसा नहीं हो रहा था, लेकिन हमारी टीम मीटिंग में एक प्लान बना था. जो भी बल्लेबाज क्रीज पर जम जाए, उसे वहीं टिके रहना चाहिए और पूरे 20 ओवर खेलने चाहिए, क्योंकि ज्यादा रन बनाने और टीम को एक अच्छे स्कोर तक पहुंचाने का यही सबसे अच्छा तरीका है.'
किशन ने कहा कि उन पर पारी को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी थी, क्योंकि नए बल्लेबाज के लिए स्पिनरों पर अटैक करना कभी आसान नहीं होता. 'मुझे लगा कि अगर कोई नया खिलाड़ी आता है और आप उससे तुरंत बड़े शॉट खेलने को कहते हैं, तो उसके लिए ज्यादा रन बनाना बहुत मुश्किल होता है. साथ ही, जैसा कि हमने बात की थी, अगर कोई बल्लेबाज क्रीज पर जम गया है, तो उसे ज्यादा रन बनाने की कोशिश करनी चाहिए.'
बाएं हाथ के इस बल्लेबाज ने कहा कि उनका पहला लक्ष्य भारत को 150 रन के आसपास पहुंचाना था, क्योंकि उन्हें लगा कि उस पिच पर यह स्कोर टीम को सुरक्षित स्थिति में पहुंचा देगा. आखिरकार भारत ने 169 रन बनाए, जो उस पिच के हिसाब से काफी अच्छा स्कोर साबित हुआ. किशन ने कहा, 'मुझे लगता है कि हमारे लिए उस स्कोर तक पहुंचना बहुत जरूरी था. जब आप मैदान पर उतरते हैं, तो आप एक लक्ष्य तय करते हैं; आपको पता होता है कि इस तरह की पिच पर कितने रन बनाने की जरूरत है.'
पाकिस्तान के खिलाफ फाइनल को लेकर भी बोले किशन
किशन ने इस बात पर जोर दिया कि हालात कैसे होंगे या पाकिस्तान के खिलाफ फाइनल में वे भारत पर कैसा असर डालेंगे, इस बारे में चिंता करने के बजाय वर्तमान में रहना चाहिए. उन्होंने कहा कि, 'मुझे लगता है कि चीजों को सरल रखना चाहिए, ज्यादा सोचना नहीं चाहिए. हमने आज खेला, हमें पता है कि हालात इतने आसान नहीं होंगे. खासकर इसलिए भी क्योंकि वे (पाकिस्तान) स्पिनरों के अनुकूल खेलने वाली टीम हैं. साथ ही, आप दो दिन बाद क्या होगा, इसके बारे में नहीं सोचते. आप बस शांत रहते हैं, अपने शॉट्स खेलते हैं, वर्तमान पल में रहते हैं और उन अहम पलों का आनंद लेते हैं.'
लोगों से मिले प्यार और मदद ने जीता दिल
28 वर्षीय खिलाड़ी ने कहा,'मुझे लगता है कि आपको एहसास होता है कि यह कुछ अलग है, भले ही हमारी टीम बहुत अच्छी हो और हमारे पास बेहतरीन गेंदबाज और बल्लेबाज हों. लेकिन फिर भी, सच कहूं तो मुझे लगता है कि यहां थोड़ा ज़्यादा दबाव होता है.' भाषा की रुकावट के बावजूद, जापान के स्थानीय लोगों से मिले प्यार और मदद से भारतीय बल्लेबाज बहुत प्रभावित हुए हैं.
ईशान ने कहा कि, 'मुझे लगता है कि अनुभव बहुत अच्छा रहा है. हर कोई बहुत प्यारा है. वे बहुत मददगार रहे हैं, खासकर जब हम यहां-वहां घूमते हैं, भले ही भाषा की रुकावट हो.' 'लेकिन मैंने देखा है कि यहां के सभी स्थानीय लोग हमें वहां पहुंचने में मदद करने की कोशिश करते हैं जहां हम जाना चाहते हैं; वे हमेशा मदद के लिए तैयार रहते हैं और मैच के दौरान भी हमें जिस चीज की जरूरत होती है, उसमें मदद करते हैं.' 'जब आप लोगों को यहां अपनी मदद करते हुए देखते हैं, तो बहुत अच्छा लगता है, खासकर तब जब आप किसी दूसरे देश में हों.'
उन्होंने कहा, 'और कभी-कभी यह उनका काम भी नहीं होता, फिर भी वे हमारी मदद करने की कोशिश करते हैं. तो यह हमारे लिए बहुत बड़ी बात है.' जब उनसे जापान के बारे में उनकी राय पूछी गई, तो किशन ने हल्के-फुल्के अंदाज में बात खत्म करते हुए कहा कि वह अपने परिवार के साथ यहां वापस आना चाहेंगे. उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि मैंने तय कर लिया है कि शादी के बाद मैं अपने परिवार के साथ यहां आऊंगा.'
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