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फरवरी 2027 तक बना रह सकता है अल नीनो; रबी फसल पर खतरा, ICAR ने तैयार किए जिला स्तरीय कंटिजेंसी प्लान

रबी सीजन से पहले अल नीनो (El Nino) के बढ़ते खतरे को लेकर केंद्र सरकार अलर्ट हो गई है. राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन में कम बारिश, जल संकट और जलवायु परिवर्तन के असर पर चर्चा हुई. राज्यों को जल बजट और फसल रणनीति तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं.

फरवरी 2027 तक बना रह सकता है अल नीनो; रबी फसल पर खतरा, ICAR ने तैयार किए जिला स्तरीय कंटिजेंसी प्लान
रबी फसलों पर मंडराया अल नीनो का खतरा, कम बारिश और जल संकट से निपटने की तैयारी में जुटा कृषि मंत्रालय
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  • रबी सीजन पर अल नीनो का खतरा, किसानों के लिए बड़ी चेतावनी
  • जल संकट से निपटने की तैयारी में जुटा कृषि मंत्रालय, शिवराज सिंह चौहान बोले- हर जिले को बनाना होगा जल बजट
  • WMO का अलर्ट, फरवरी 2027 तक बना रह सकता है अल नीनो
नई दिल्ली:

खरीफ सीजन की चुनौतियों के बाद अब देश की नजर रबी फसलों पर टिक गई है, लेकिन इस बार अल नीनो (El Nino) का बढ़ता प्रभाव कृषि क्षेत्र के लिए नई चिंता बनकर उभर रहा है. दिल्ली में शुरू हुए राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन-रबी अभियान 2026 में मौसम वैज्ञानिकों, कृषि विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं ने कम बारिश, अनिश्चित मौसम, पानी की कमी और जलवायु परिवर्तन से पैदा होने वाली चुनौतियों पर मंथन किया. सरकार ने राज्यों को अभी से तैयारी तेज करने, जल उपलब्धता का आकलन करने और परिस्थितियों के अनुसार फसल रणनीति बनाने की सलाह दी है.

रबी सीजन की तैयारियों पर केंद्रित रहा राष्ट्रीय सम्मेलन

दिल्ली में सोमवार से शुरू हुए दो दिवसीय ‘राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन-रबी अभियान 2026' में देशभर के कृषि विभागों, वैज्ञानिक संस्थानों और राज्यों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया. बैठक में विशेष रूप से इस बात पर चर्चा हुई कि यदि अल नीनो का प्रभाव बढ़ता है और रबी सीजन के दौरान सामान्य से कम वर्षा होती है, तो किसानों और कृषि उत्पादन पर उसका क्या असर पड़ सकता है.

कृषि महोत्सव के दौरान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान

कृषि महोत्सव के दौरान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान

ICAR ने तैयार किए जिला स्तरीय कंटिजेंसी प्लान

बैठक के दौरान भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के महानिदेशक डॉ. मांगी लाल जाट ने कहा कि अल नीनो की परिस्थितियों को देखते हुए पहले से तैयारी करना आवश्यक है. उन्होंने कहा कि रबी सीजन में संभावित कम बारिश को ध्यान में रखते हुए जिला स्तर पर कंटिजेंसी प्लान तैयार किए गए हैं. इसके अलावा एक डायनामिक डैशबोर्ड भी विकसित किया गया है, जिसका उपयोग रबी सीजन के दौरान स्थिति की निगरानी और निर्णय लेने में किया जा सकेगा. डॉ. जाट के अनुसार मौसम संबंधी जोखिमों को देखते हुए कृषि क्षेत्र में पहले से रणनीति बनाना समय की आवश्यकता है.

WMO ने जारी की गंभीर चेतावनी

सम्मेलन ऐसे समय में आयोजित किया गया है जब विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने अल नीनो को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है. WMO के मुताबिक अल नीनो अब मजबूती से स्थापित हो चुका है और आने वाले महीनों में इसके और अधिक शक्तिशाली होने की संभावना है. संगठन ने आगाह किया है कि इसके कारण दुनिया भर में वर्षा और तापमान के पैटर्न में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं. संगठन का मानना है कि अत्यधिक बाढ़, सूखा और भीषण गर्मी जैसी चरम मौसमी घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है.

अल नीनो का खेती पर खतरा

अल नीनो का खेती पर खतरा

फरवरी 2027 तक बने रहने की संभावना

WMO के अनुमानों के अनुसार अल नीनो के फरवरी 2027 तक बने रहने की लगभग 100 प्रतिशत संभावना है. विशेषज्ञों का कहना है कि प्रशांत महासागर के उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों का असामान्य रूप से गर्म होना अल नीनो को और अधिक मजबूत बना सकता है. इसका असर केवल दक्षिण एशिया ही नहीं बल्कि दुनिया के कई हिस्सों में कृषि, जल संसाधन और खाद्य सुरक्षा पर भी पड़ सकता है.

खरीफ सीजन की चुनौतियों की हुई समीक्षा

सम्मेलन में इस वर्ष के खरीफ सीजन की स्थिति की भी समीक्षा की गई. केंद्रीय कृषि सचिव अतिश चंद्रा ने कहा कि बीता खरीफ सीजन विशेष रूप से वर्षा आधारित कृषि क्षेत्रों के लिए काफी चुनौतीपूर्ण रहा. उन्होंने बताया कि कई राज्यों को पहले फसल कवरेज सुनिश्चित करने और बाद में फसल बचाने के लिए संघर्ष करना पड़ा. उपलब्ध आंकड़े संकेत दे रहे हैं कि कृषि उत्पादन पर असर पड़ने की संभावना है.

रेनफेड क्षेत्रों के लिए बढ़ी चिंता

अतिश चंद्रा ने कहा कि आने वाला रबी सीजन भी वर्षा आधारित क्षेत्रों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है. उन्होंने कहा कि कई स्थानों पर बारिश समय से अलग हुई, जबकि कुछ क्षेत्रों में अत्यधिक वर्षा दर्ज की गई, जिससे फसलें प्रभावित हुईं. उन्होंने जलवायु परिवर्तन के तेज असर की ओर इशारा करते हुए कहा कि मौसम अब पहले की तुलना में कहीं अधिक तेजी से बदल रहा है और इसका असर खेती-किसानी पर साफ दिखाई दे रहा है.

शिवराज सिंह चौहान ने दिया ‘जल बजट' पर जोर

सम्मेलन का उद्घाटन केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किया. उन्होंने रबी सीजन की तैयारियों में ‘जल बजट' को सबसे महत्वपूर्ण आधार बताया. उन्होंने कहा कि प्रत्येक राज्य और जिले को यह आकलन करना होगा कि उसके पास सिंचाई के लिए कितना पानी उपलब्ध है. कृषि मंत्री ने कहा कि जहां पानी कम है, वहां दलहन और तिलहन जैसी कम पानी वाली फसलों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, जबकि सिंचाई सुविधाओं वाले क्षेत्रों में अन्य फसलों की योजना बनाई जा सकती है.

पानी की उपलब्धता का अभी से आकलन जरूरी

शिवराज सिंह चौहान ने राज्यों के कृषि मंत्रियों और अधिकारियों से कहा कि पानी की उपलब्धता, मिट्टी में नमी और सिंचाई संसाधनों का तत्काल आकलन किया जाए. उन्होंने चेतावनी दी कि रबी बुवाई का समय नजदीक है और तैयारियों में किसी भी प्रकार की देरी किसानों के लिए मुश्किलें बढ़ा सकती है. कृषि मंत्री ने कहा कि वर्तमान में वर्षा औसत से कम रही है, हालांकि स्थिति इतनी गंभीर नहीं है कि पूरे देश में जल संकट पैदा हो जाए. फिर भी कुछ राज्यों में पानी की कमी चिंता का विषय बनी हुई है. कृषि मंत्री ने राज्यों के कृषि मंत्रियों से कहा कि देश के जिन हिस्सों में कम पानी है, वहां पानी की कितनी उपलब्धता है, मिट्टी में नमी कितनी है, इस सबका आकलन करके सिंचाई के पानी के लिए अभी से प्रबंध करना जरूरी होगा. चौहान ने चेतावनी दी कि तैयारियों में देर नहीं करनी चाहिए, क्योंकि रबी की बुवाई शुरू होने वाली है.

मौसम, बीज और उर्वरक पर समीक्षा

सम्मेलन के दूसरे दिन रबी सीजन के लिए मौसम पूर्वानुमान, उर्वरकों की उपलब्धता, उनके संतुलित उपयोग और बीजों की उपलब्धता की विस्तार से समीक्षा हुई. इसके अलावा राज्यों से जमीनी स्तर की तैयारियों की जानकारी भी ली गई, ताकि संभावित जलवायु चुनौतियों के बीच रबी उत्पादन को सुरक्षित रखा जा सके.

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