विज्ञापन

बघेल का जाना और पायलट का आना, तभी फाइनल हो गई थी वडिंग के जाने की पटकथा

वहीं इसे लेकर कांग्रेस आलाकमान की ओर से यह संदेश दिया जा रहा है कि राजा वाडिंग को हटाया नहीं गया है, बल्कि उन्होंने पार्टी हित में स्वयं इस्तीफा देने की पेशकश की है.

बघेल का जाना और पायलट का आना, तभी फाइनल हो गई थी वडिंग के जाने की पटकथा
पंजाब में कांग्रेस राजा वाडिंग के इस्तीफे के बाद कई सवाल खड़े हो रहे हैं.
  • चरणजीत सिंह चन्नी की लोकप्रियता के कारण राजा वाडिंग की स्थिति कमजोर हुई और कांग्रेस में गुटबाजी बढ़ी थी
  • सचिन पायलट ने नए प्रभारी के रूप में नेताओं से बातचीत कर रिपोर्ट आलाकमान को सौंप दी है, निर्णय जल्द होगा
  • नए प्रदेश अध्यक्ष को संगठन पर पकड़ बनाने के लिए समर्थकों के साथ काम या नया संगठन स्थापित करना होगा

पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वाडिंग ने आलाकमान को अपना इस्तीफा देने की पेशकश की है. अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पंजाब का अगला प्रदेश अध्यक्ष कौन होगा. कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, पंजाब के प्रभारी सचिन पायलट ने अपनी रिपोर्ट कांग्रेस आलाकमान को सौंप दी है और वही इस पर अंतिम फैसला करेंगे. माना जा रहा है कि अगले 48 घंटों में पंजाब कांग्रेस को नया प्रदेश अध्यक्ष मिल सकता है. मगर उससे पहले यह जानना जरूरी है कि राजा वाडिंग क्यों कमजोर पड़े और क्या उनके हटने से कांग्रेस की गुटबाजी खत्म हो जाएगी.

राजा वाडिंग क्यों हो गए पावरलेस?

पंजाब कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष होने के नाते राजा वाडिंग के पास संगठन की सारी शक्तियां थीं. आमतौर पर प्रदेश अध्यक्ष को ही मुख्यमंत्री पद का संभावित चेहरा माना जाता है. मगर वाडिंग के रहते हुए भी चरणजीत सिंह चन्नी लगातार मुख्यमंत्री पद के लिए अपना दावा पेश करते रहे.

कांग्रेस आलाकमान इस दुविधा में रहा कि जब एक बार चन्नी के नेतृत्व में चुनाव हार चुके हैं तो उन्हें दोबारा चेहरा कैसे बनाया जाए. इसलिए दिल्ली लगातार राजा वाडिंग को आगे करती रही. बाद में अजय माकन की अगुवाई में तीन सदस्यीय समिति बनाई गई. समिति ने पाया कि प्रदेश अध्यक्ष भले राजा वाडिंग हैं, लेकिन सबसे अधिक लोकप्रियता चन्नी के पास है. इसके बाद कांग्रेस आलाकमान ने चन्नी को प्रचार समिति का अध्यक्ष बना दिया.

चन्नी-रंधावा की चुनौती और बदला समीकरण

मामला यहीं नहीं रुका. चन्नी और सुखजिंदर सिंह रंधावा ने वाडिंग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. हालांकि वाडिंग तब तक मजबूत बने रहे क्योंकि तत्कालीन प्रभारी भूपेश बघेल का समर्थन उन्हें प्राप्त था. लेकिन जैसे ही बघेल प्रभारी पद से हटे, वाडिंग की स्थिति कमजोर होने लगी. नए प्रभारी के तौर पर सचिन पायलट ने जिम्मेदारी संभालते ही जिला स्तर के नेताओं, युवा नेताओं और छात्र नेताओं से बातचीत शुरू की और अपनी रिपोर्ट आलाकमान को सौंप दी. अब प्रदेश अध्यक्ष ने स्वयं इस्तीफे की पेशकश कर दी है.

क्या नए अध्यक्ष से सुधरेगी कांग्रेस की स्थिति?

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रदेश अध्यक्ष बदलने से पंजाब कांग्रेस की स्थिति बेहतर हो जाएगी. सबसे पहले कांग्रेस को यह तय करना होगा कि अगला प्रदेश अध्यक्ष जट्ट सिख होगा या हिंदू. दोनों विकल्पों के अपने राजनीतिक फायदे और नुकसान हैं. पंजाब की राजनीति में माना जाता है कि पार्टी अध्यक्ष कोई भी हो, मुख्यमंत्री का चेहरा अक्सर जट्ट सिख ही होता है. यहां तक कि हिंदू वोट बैंक की राजनीति करने वाली भाजपा ने भी केवल सिंह ढिल्लों को प्रदेश अध्यक्ष बनाया है.

नए अध्यक्ष के सामने क्या होंगी चुनौतियां?

कांग्रेस के सामने दूसरा बड़ा सवाल यह है कि नए प्रदेश अध्यक्ष को संगठन पर पकड़ बनाने के लिए कितना समय मिलेगा. राजा वाडिंग ने अपने चार साल के कार्यकाल में पंचायत से लेकर जिला स्तर तक अपने समर्थकों को संगठन में स्थापित किया है.

ऐसे में नए अध्यक्ष को या तो उन्हीं लोगों के साथ काम करना होगा या फिर अपना नया संगठन खड़ा करना होगा. एक संभावना यह भी है कि ऐसा नेता चुना जाए जो दिल्ली के निर्देशों के अनुसार काम करे. क्योंकि उम्मीदवारों के टिकट वितरण में प्रदेश अध्यक्ष की अहम भूमिका होती है. टिकट बंटवारा लंबे समय से कांग्रेस के अंदरूनी विवादों की प्रमुख वजह रहा है. अब यह चर्चा भी है कि टिकट वितरण में प्रभारी की रिपोर्ट को विशेष महत्व दिया जाएगा. हालांकि सवाल यह भी है कि क्या राजा वाडिंग पूरी तरह शांत बैठ जाएंगे या संगठन में अपनी पकड़ के कारण नए अध्यक्ष के लिए चुनौती बने रहेंगे.

आलाकमान नहीं करना चाहता वाडिंग को नाराज

कांग्रेस आलाकमान की ओर से यह संदेश दिया जा रहा है कि राजा वाडिंग को हटाया नहीं गया है, बल्कि उन्होंने पार्टी हित में स्वयं इस्तीफा देने की पेशकश की है. इससे साफ है कि कांग्रेस नेतृत्व उन्हें नाराज या अलग-थलग नहीं करना चाहता.

राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी है कि भविष्य में उन्हें दिल्ली में कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जा सकती है. ऐसे में पंजाब कांग्रेस का नेतृत्व बदलने के साथ-साथ यह भी देखने वाली बात होगी कि पार्टी राजा वाडिंग की भूमिका को किस तरह आगे बढ़ाती है.

यह भी पढ़ें- सचिन पायलट की रिपोर्ट, हाईकमान को मैसेज और पंजाब में यूं बदल गया कांग्रेस अध्यक्ष

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Punjab Congress, Amarinder Singh Raja Warring, Sachin Pilot
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com