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तस्वीर ममता-स्टालिन की, निशाना राहुल गांधी पर! अखिलेश के 'वायरल संदेश' के मायने समझिए

अखिलेश यादव ने बिना नाम लिए कांग्रेस पर टीएमसी के खिलाफ रुख को लेकर निशाना साधा है. अखिलेश यादव और ममता बनर्जी के रिश्ते काफी घनिष्ठ माने जाते हैं.

तस्वीर ममता-स्टालिन की, निशाना राहुल गांधी पर! अखिलेश के 'वायरल संदेश' के मायने समझिए
  • अखिलेश यादव ने ममता बनर्जी और एम. के. स्टालिन की तस्वीर साझा कर एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश दिया है.
  • अखिलेश यादव ने कहा कि वे मुश्किलों में साथ छोड़ने वाले नहीं हैं, जिससे कांग्रेस के लिए संकेत माना जा रहा है.
  • सपा और कांग्रेस उत्तर प्रदेश में इंडिया गठबंधन के तहत सहयोगी हैं, लेकिन सीट बंटवारे को लेकर मतभेद जारी हैं.
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समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए गए एक पोस्ट के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है. सवाल यह उठ रहा है कि अखिलेश यादव का यह संदेश आखिर किसके लिए है. पोस्ट में अखिलेश यादव ने पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन की तस्वीर साझा करते हुए लिखा, “हम वो नहीं हैं, जो मुश्किलों में साथ छोड़ दें.” इसके बाद से अटकलें लगाई जा रही हैं कि क्या यह संदेश कांग्रेस के लिए है.

समाजवादी पार्टी और कांग्रेस उत्तर प्रदेश में इंडिया गठबंधन के तहत सहयोगी दल हैं. पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के चुनाव नतीजों के बाद अखिलेश यादव ने चुनाव में धांधली के आरोप लगाए थे. इतना ही नहीं, वह कोलकाता जाकर टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी से मिले, उनका सम्मान किया और यह कहते हुए उनका समर्थन जताया कि, “आप हारी नहीं हैं.”

क्या सोच‑समझक दिया गया ये बयान?

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि “हम वो नहीं हैं, जो मुश्किलों में साथ छोड़ दें” वाला बयान सोच‑समझकर दिया गया है. इसकी वजह यह है कि पश्चिम बंगाल के चुनाव के दौरान कांग्रेस ने ममता बनर्जी और टीएमसी के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाया था. खुद राहुल गांधी ने नतीजों से पहले बीजेपी की बढ़त के लिए टीएमसी को जिम्मेदार ठहराकर एक अलग बहस छेड़ दी थी.

अगले साल उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं. फिलहाल सपा और कांग्रेस इंडिया गठबंधन के तहत साथ हैं. लेकिन सीट बंटवारे को लेकर दोनों दलों के नेताओं के अलग‑अलग दावे सामने आते रहते हैं. सपा नेताओं का मानना है कि 403 सीटों वाली विधानसभा में कांग्रेस को अधिकतम 50 सीटें दी जानी चाहिए, जबकि कांग्रेस का कहना है कि 150 से कम सीटों पर गठबंधन टिक पाना मुश्किल होगा.

अखिलेश यादव और ममता बनर्जी के रिश्ते काफी घनिष्ठ

इन दावों के बीच अखिलेश यादव ने बिना नाम लिए कांग्रेस पर टीएमसी के खिलाफ रुख को लेकर निशाना साधा है. अखिलेश यादव और ममता बनर्जी के रिश्ते काफी घनिष्ठ माने जाते हैं. लोकसभा चुनाव में भी सपा ने अपने कोटे से एक सीट टीएमसी को देकर यह संकेत दिया था. अब कांग्रेस द्वारा ममता बनर्जी पर लगातार हमलों के बाद सवाल उठ रहा है कि क्या अगले साल के चुनाव तक इंडिया गठबंधन एकजुट रह पाएगा.

यदि लोकसभा चुनाव की बात करें तो यूपी में इंडिया गठबंधन ने 80 में से 43 सीटें जीतकर बीजेपी को बड़ा झटका दिया था. इनमें से अकेले सपा ने 37 और कांग्रेस ने 6 सीटों पर जीत दर्ज की थी. बीजेपी 33 सीटों पर सिमट गई थी, जबकि उसके सहयोगी राष्ट्रीय लोकदल को दो और अपना दल (सोनेलाल) को एक सीट मिली थी. इन अप्रत्याशित नतीजों के बावजूद सपा और कांग्रेस अब तक एक‑दूसरे के साथ बनी हुई हैं.

फिलहाल, सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने बिना नाम लिए ही कांग्रेस को अपना संदेश दे दिया है. इस बीच अखिलेश यादव अपने पीडीए एजेंडे के साथ ज़ोर‑शोर से चुनाव अभियान में जुटे हुए हैं, जबकि कांग्रेस के बड़े नेता अभी तक उत्तर प्रदेश में सक्रिय नज़र नहीं आ रहे हैं. ऐसे में सवाल यही है कि क्या कांग्रेस वाक़ई यूपी चुनाव को लेकर गंभीर है और क्या इंडिया गठबंधन अगले साल तक टिका रह पाएगा.

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