CBSE Digital Marking Scam : CBSE (Central Board of Secondary Education) ने डिजीटल मार्किंग यानि OSM करने के लिए पिछले साल टेंडर निकाला लेकिन उसे दो बार रद्द करना पड़ा. तीसरी बार तीन कंपनियों ने टेंडर डाला, जिसमें से पहली टाटा कंसल्टंसी सर्विसेस (Tata Consultancy Services) दूसरी कंपनी रंकगुरु टेक्नोलॉजी सॉल्यूशंस (Rankguru Technology Solutions) और तीसरी कंपनी कोएंप्ट एड्यू टेक (Coempt Edu Tech) थी. लेकिन अब टेंडर देने की प्रक्रिया में Coempt कंपनी को कथित फायदा पहुंचाने के आरोप लग रहे हैं. इसको लेकर सार्थक सिद्धांत नाम के छात्र का दावा है कि COEMPT कंपनी को फायदा देने के लिए बड़ी सफाई से Request For Proposal यानि RFC के नियमों में बदलाव कर दिए गए.
टेंडर के नियम बदले गएसार्थक का पहला आरोप है कि दो बार टेंडर रद्द होने के बाद बड़ी सफाई से इसके नियमों में बदलाव किए गए जिसका फायदा Coempt कंपनी को पहुंचा. सार्थक सिद्धांत छात्र ने आरोप लगाया कि RFP यानि Request For Proposal में कहा गया कि तीन साल का औसत कंपनी का टर्न ओवर 50 करोड़ के आसपास होना चाहिए. ये नियम भी Coempt कंपनी का फाइनेंशियल लॉग शीट (financial log sheet) देखकर पता चलता है. मसलन TCS हजारों करोड़ की मल्टीनेशनल कंपनी है, दूसरा रंकगुरु टेक्नोलॉजी सॉल्यूशंस (Rankguru Technology) का सालाना टर्न ओवर 117.56 करोड़ का है जबकि Coempt कंपनी की शीट से पता चलता है कि मार्च 2023 में कंपनी का सालाना टर्न ओवर 32.1 करोड़ और मार्च (march) 2024 में 52.7 करोड़.
पहला आरोपNDTV पर सार्थक सिद्धांत ने OSM सिस्टम पर उठाए बड़े सवाल, फाइनलाइजेशन में लूपहोल्स का लगाया आरोप#CBSE | #OSM | @tabishh_husain | @TanushkaDutta pic.twitter.com/LL7tzmk6ud
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वहीं, मार्च 2025 में 67.8 करोड़ थी. तीनों साल का मिलाने पर औसत टर्नओवर 50.86 हो रहा था. यानि बहुत कम अंतर से ये कंपनी बिड के लिए क्वालिफाई कर पाई थी. जबकि इससे पहले वाली RFP में एक दूसरी कंपनी Shree Info Solution ने CBSE से 30 करोड़ रुपए सलाना टर्नओवर रखने को कहा था, लेकिन ये मांग खारिज कर दी गई थी.
दूसरा आरोपदूसरा गंभीर आरोप सार्थक सिद्धांत ने लगाया कि Coempt कंपनी को फायदा देने के लिए RFP की शर्तों में Record Of Poor Performance को कथित तौर पर हटा दिया गया. सार्थक ने लिखा कि पहला बार जब टेंडर प्रक्रिया 4 फरवरी 2025 में निकाला गया तब ये शर्त थी कि टेंडर भरने वाली कंपनी Record for poor performance such as abandoning work वाली शर्त रखी गई थी.
अगर से शर्त रहती तो तेलांगाना में में ब्लैकलिस्ट के चलते ये कंपनी बिड की शर्त नहीं पूरी कर पाती, लिहाजा इस शर्त को जब अगस्त 2025 में तीसरी बार टेंडर निकाला गया तब इसको बदलकर केवल poor performance or black listed earlier के सफाई से जोड़ दिया गया.
सार्थक का आरोप है कि black listed earlier इसलिए जोड़ा गया क्योंकि Coempt कंपनी का पहले नाम Globarena था, जिसको तेलांगाना शिक्षा बोर्ड ने 2019 में ब्लैक लिस्टेड कर दिया गया था. अगर अरलियर (Earlier) न लिखा जाता तो ये कंपनी टेंडर भर ही नहीं पाती.
सार्थक ने ये भी आरोप लगाया कि कि CMMI यानि Capabilitiy Maturity Model Integration level को भी 5 से कम करके 3 कर दिया गया. आसान शब्दों में समझा जाए तो इसका मतलब ये है कि कंपनी कितनी कुशल और व्यवस्थित तरीके से काम करती है. चूंकि COEMPT कंपनी का लेवल-3 है इसलिए सीबीएसई (CBSE) पर ये आरोप लग रहे हैं.
17-year-old Sarthak Sidhant has exposed how CBSE manipulated its own selection process to benefit COEMPT, using CBSE's own documents.
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) May 29, 2026
The details in his blog reveal how CBSE changed the RFP to unduly benefit COEMPT, at the cost of TCS.
He has revealed the hollowness of… https://t.co/g7YSYIxDrh
यही नहीं सार्थक ने आरोप लगाया की पहले के RFP में कंपनी के पास डेटा सेंटर (data centre) और Disaster Recovery Centre होने की भी शर्त रोकी गई थी. जिससे TCS कंपनी के क्वालिफाई होने की संभावना बढ़ती. लेकिन इसे बदलकर लचीली शर्त रखी गई कि खुद का डाटा सेंटर बनाने या खरीदने के बजाए कंपनी किसी तीसरे पक्ष यानि AWS, Azure या google cloud के डाटा सेंटर का उपयोग कर सकती है.
सार्थक के इन आरोपों को राहुल गांधी ने रिट्विट करते लिखा कि सार्थक ने उजागर कर दिया कि कैसे CBSE ने अपने ही चयन प्रक्रिया को हेरफेर करके COEMPT कंपनी को फायदा पहुंचाया है. हालांकि इन आरोपों पर CBSE की प्रवक्ता नीति प्रकाश से संपर्क किया गया लेकिन अभी तक इन आरोपों पर उनकी ओर से कोई जवाब नहीं आया है.
IIT मद्रास और IIT कानपुर की टीम कर रही जांचशिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पहले ही बोल चुके हैं कि अगर किसी व्यक्ति की कोई गलती दिखेगी तो उस पर कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने ये भी माना कि 40 करोड़ पन्नों को स्कैन करने में विसंगतियां सामने आई है. इस बाबत IIT मद्रास और IIT कानपुर की विशेषज्ञों की टीम पहले से ही दिल्ली में मौजूद है.
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