नई दिल्ली. इंडियन ओवरसीज कांग्रेस के प्रमुख सैम पित्रोदा ने गुरुवार को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) और बदलाव लाने की उसकी क्षमता पर भरोसा जताया. उन्होंने कहा कि युवाओं के इस छोटे से समूह ने आवाज उठाने और जिम्मेदारी लेने का साहस दिखाया है. भले ही कुछ मौकों पर उनकी भाषा उचित नहीं रही हो, लेकिन उन्होंने दूसरों के लिए भी अपनी बात रखने के अवसर खोले हैं. आईएएनएस को दिए विशेष साक्षात्कार में पित्रोदा ने छात्र आंदोलनों, लोकतंत्र, चुनावी व्यवस्था, शिक्षा, रोजगार और विपक्षी राजनीति जैसे कई मुद्दों पर अपनी राय रखी. इसी दौरान उन्होंने भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) द्वारा विपक्षी नेताओं से मिलने से इनकार किए जाने के फैसले का भी समर्थन किया.
उन्होंने कहा, "मेरे विचार से उनके नजरिए से यह सही है कि वह उन लोगों से नहीं मिलते, जो अदालत में मुकदमे दायर कर रहे हैं. ऐसा नहीं किया जाता. यह पूरी तरह ठीक है और मैं उनके फैसले का सम्मान करता हूं. मैं उनसे मिलने की इच्छा रखने वाले लोगों की भावना का भी सम्मान करता हूं. दोनों बातें ठीक हैं. लोगों ने कहा कि वे उनसे मिलना चाहते हैं और उन्होंने कहा कि अपनी बात लिखित में दीजिए या अदालत में याचिका दायर कीजिए. अब ऐसा ही किया जा रहा है. यह सामान्य प्रक्रिया है. मैं इसे किसी का अपमान नहीं मानता और न ही इसे कोई बाधा समझता हूं. यह वह प्रक्रिया है, जिसका पालन वह करना चाहते हैं. मैं उसका सम्मान करता हूं."
छात्र आंदोलन को बताया व्यापक बदलाव का हिस्सा
पित्रोदा ने कहा कि सीजेपी और छात्र आंदोलन को किसी एक घटना तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए. उनके मुताबिक यह देश में चल रही व्यापक राजनीतिक और सामाजिक प्रक्रियाओं का हिस्सा है. उन्होंने दावा किया कि युवाओं ने परीक्षा अनियमितताओं, पेपर लीक, बढ़ती फीस, शिक्षा व्यवस्था की चुनौतियों और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को लेकर निडर होकर अपनी बात रखी.
उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने आंदोलन के दौरान तीखी भाषा का प्रयोग किया, जिसका वह समर्थन नहीं करते, लेकिन युवाओं ने समाज में संवाद और जागरूकता बढ़ाने का काम किया है. उनके अनुसार, इस आंदोलन ने उन लोगों को भी अपनी आवाज उठाने का साहस दिया जो पहले बोलने से हिचकते थे.
शिक्षा, रोजगार और आर्थिक असमानता पर चिंता
सैम पित्रोदा ने शिक्षा और रोजगार को युवाओं के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताया. उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में भारतीय छात्र उच्च शिक्षा के लिए विदेश जा रहे हैं, जबकि देश में बेहतर गुणवत्ता वाली शिक्षा और अवसरों की जरूरत है. उन्होंने आर्थिक असमानता, रोजगार सृजन और सरकारी प्रदर्शन को भी महत्वपूर्ण मुद्दा बताया. पित्रोदा ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में युवाओं की सक्रिय भागीदारी और मुद्दों पर आधारित जनदबाव भविष्य में सकारात्मक बदलाव का कारण बन सकता है.
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