इंडियन ओवरसीज कांग्रेस के प्रमुख सैम पित्रोदा ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) द्वारा विपक्षी नेताओं से मिलने से इनकार किए जाने के फैसले का समर्थन करते हुए कहा है कि यह पूरी तरह उनका अधिकार है और न्यायिक प्रक्रिया के अनुरूप है. उन्होंने स्पष्ट कहा कि अदालत में मामले ले जाने वाले लोगों से सीजेआई का मुलाकात न करना असामान्य नहीं है और उन्होंने इस फैसले का सम्मान किया है.
आईएएनएस को दिए विशेष साक्षात्कार में पित्रोदा ने कहा कि विपक्षी नेताओं की भावना अपनी जगह सही हो सकती है, लेकिन सीजेआई का यह कहना भी उचित है कि संबंधित पक्ष अपनी बात लिखित रूप में रखें या अदालत में याचिका दायर करें. उन्होंने कहा, "मेरे विचार से उनके नजरिए से यह सही है कि वह उन लोगों से नहीं मिलते, जो अदालत में मुकदमे दायर कर रहे हैं. ऐसा नहीं किया जाता. यह पूरी तरह ठीक है और मैं उनके फैसले का सम्मान करता हूं."
'इसे अपमान या बाधा के रूप में नहीं देखता'
पित्रोदा ने कहा कि वह उन लोगों की भावनाओं का भी सम्मान करते हैं, जो सीजेआई से मिलना चाहते थे, लेकिन न्यायपालिका की अपनी प्रक्रिया होती है और उसका सम्मान किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा, "लोगों ने कहा कि वे उनसे मिलना चाहते हैं और उन्होंने कहा कि अपनी बात लिखित में दीजिए या अदालत में याचिका दायर कीजिए. अब ऐसा ही किया जा रहा है. यह सामान्य प्रक्रिया है. मैं इसे किसी का अपमान नहीं मानता और न ही इसे कोई बाधा समझता हूं."
छात्र आंदोलनों और सीजेपी की भी की सराहना
साक्षात्कार में पित्रोदा ने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) और छात्र आंदोलनों को देश में चल रही व्यापक राजनीतिक और सामाजिक प्रक्रियाओं का हिस्सा बताया. उन्होंने कहा कि युवाओं ने निडर होकर अपनी बात रखने और जिम्मेदारी लेने का साहस दिखाया है. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि आंदोलन के दौरान कुछ लोगों की भाषा उचित नहीं रही, लेकिन इसके बावजूद इसने उन लोगों को आवाज उठाने का अवसर दिया, जो पहले अपनी बात कहने से हिचकते थे.
लोकतंत्र, शिक्षा और रोजगार पर उठाए सवाल
पित्रोदा ने लोकतंत्र, चुनावी व्यवस्था, शिक्षा, रोजगार और आर्थिक असमानता जैसे मुद्दों पर भी चिंता व्यक्त की. उनका कहना था कि युवाओं के सामने बेहतर शिक्षा और रोजगार सबसे बड़े सवाल हैं तथा इन मुद्दों पर गंभीर चर्चा की जरूरत है. हालांकि सीजेआई और विपक्ष के विवाद पर उनका रुख साफ रहा. उन्होंने कहा कि न्यायपालिका को अपने निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं के तहत काम करने का पूरा अधिकार है और इस मामले में अपनाई गई प्रक्रिया का सम्मान किया जाना चाहिए.
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