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हाथापाई की नौबत, विधायक को मार्शल ने किया बाहर... J-K विधानसभा में ऐसा क्या हुआ कि मच गई अफरा-तफरी?

जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने का एक प्रस्ताव पेश किया गया, जिसके बाद जमकर हंगामा मच गया.

जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पूर्ण राज्य के मसले पर जमकर हंगामा हुआ.
PTI
श्रीनगर:

जम्मू-कश्मीर विधानसभा में शुक्रवार को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने का प्रस्ताव पेश होते ही जमकर हंगामा हो गया. स्थिति हाथापाई तक पहुंच गई, जिसके बाद स्पीकर को सदन की कार्यवाही 30 मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी.

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पूर्ण राज्य का दर्जा तत्काल बहाल करने की मांग वाला प्रस्ताव पेश किया. सत्ता पक्ष के सदस्यों ने मेज थपथपाकर इसका स्वागत किया, लेकिन भाजपा विधायकों ने इसका जोरदार विरोध शुरू कर दिया. विरोध करते हुए भाजपा सदस्य आसन के पास पहुंच गए और सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायकों से उनकी तीखी बहस हो गई.

हंगामा करने पर भाजपा विधायक विक्रम रंधावा को मार्शल के जरिए सदन से बाहर निकाल दिया गया.

2000 के प्रस्ताव का जिक्र बना हंगामे की वजह

दरअसल, भाजपा ने प्रस्ताव में जून 2000 के स्वायत्तता प्रस्ताव का उल्लेख होने पर आपत्ति जताई। प्रस्ताव में कहा गया है, '26 जून 2000 और 6 नवंबर 2024 को इस सदन से पारित प्रस्तावों के साथ, सदन भारत सरकार से जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा तत्काल और शीघ्र बहाल करने का आह्वान करता है और इस प्रस्ताव को भारत सरकार को भेजने का निर्णय करता है.'

26 जून 2000 को फारूक अब्दुल्ला सरकार ने 9 अगस्त 1953 से पहले वाली स्वायत्तता बहाल करने का प्रस्ताव पास किया था, जबकि 6 नवंबर 2024 को विधानसभा ने विशेष दर्जा बहाल करने की मांग वाला प्रस्ताव पारित किया था.

उमर अब्दुल्ला ने पेश किया था प्रस्ताव

प्रस्ताव पर बोलते हुए मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि सदन को एक आवाज में इस प्रस्ताव पर बहस करनी चाहिए और इसे पारित करना चाहिए, क्योंकि राज्य का दर्जा न होने से जम्मू-कश्मीर को बहुत नुकसान हुआ है. 

उन्होंने कहा, 'जम्मू-कश्मीर के लोगों से एक वादा किया गया था. संसद में, सुप्रीम कोर्ट में और कई सार्वजनिक मंचों पर यह वादा किया गया था कि तीन चरणों वाली प्रक्रिया लागू की जाएगी. पहले परिसीमन, फिर चुनाव और उसके बाद राज्य का दर्जा बहाल करना.'

अब्दुल्ला ने कहा कि परिसीमन हुआ और चुनाव भी हुए, जिनमें लोगों ने उत्साह और खुशी-खुशी हिस्सा लिया, लेकिन राज्य का दर्जा बहाल नहीं किया गया.

अब्दुल्ला ने कहा, 'हम इंतजार करते रहे. सार्वजनिक रूप से, निजी तौर पर, हर बैठक में और हर मंच पर हमने भारत सरकार को जम्मू-कश्मीर के लोगों से किए गए उसके वादे की याद दिलाई. लेकिन वह वादा पूरा नहीं हुआ. आज, इस सदन के माध्यम से, हम भारत सरकार को याद दिलाना चाहते हैं कि उसके वादों के बारे में आखिरकार कुछ तो किया जाना चाहिए.'

उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री ने भी वादा किया था. उन्होंने सवाल किया कि फिर इसे पूरा क्यों नहीं किया जा रहा है?

बीजेपी विधायकों ने किया हंगामा

अब्दुल्ला का भाषण खत्म होते ही बीजेपी विधायक अपनी जगह से उठ खड़े हुए और विरोध करने लगे. बीजेपी के बलवंत सिंह मनकोटिया ने कहा कि सरकार लोगों के मुद्दों पर चर्चा नहीं कर रही है, बल्कि स्वायत्तता पर चर्चा करना चाहती है.

नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस के विधायक भी अपनी जगह से उठ खड़े हुए और 'अपना हक लेकर रहेंगे', 'जो राज्य का दर्जा न दे सके, वह सरकार निकम्मी है' और 'छीन कर लेंगे अपना हक' जैसे नारे लगाने लगे.

मनकोटिया ने जवाब में कहा, 'वे जम्मू-कश्मीर के लोगों के दुश्मन हैं.' 

वहीं, भाजपा विधायक आरएस पठानिया ने कहा, 'हम सदन में स्वायत्तता के मुद्दे पर चर्चा नहीं होने देंगे.' जिसके बाद सदन में अफरा-तफरी का माहौल बन गया.

बीजेपी विधायकों ने भी नारे लगाए, जैसे 'स्वायत्तता का प्रस्ताव नहीं चलेगा', 'जो कश्मीर हमारा है, वह पूरा का पूरा है', 'जहां मुखर्जी ने बलिदान दिया, वह कश्मीर हमारा है', 'अली बाबा के चालीस चोर', और 'भारत माता की जय.'

बीजेपी के आरएस पठानिया ने स्पीकर से पूछा कि किस नियम के तहत प्रस्ताव को मंज़ूरी दी गई थी? इस पर मंत्री सकीना इत्तू ने बीजेपी से पूछा कि किस कानून के तहत अनुच्छेद 370 और राज्य का दर्जा छीना गया था.

बीजेपी विधायक फिर से वेल में आ गए और 'राष्ट्र-विरोधी एजेंडा नहीं चलेगा' जैसे नारे लगाने लगे.

हंगामा जारी रहने के दौरान, बीजेपी विधायक विक्रम रंधावा ने कुर्सी पकड़ने की कोशिश की, लेकिन उन्हें मार्शलों ने बाहर निकाल दिया. 

इसके बाद स्पीकर ने शुक्रवार की नमाज के कारण सदन की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित कर दी.

सदन के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए विपक्ष के नेता सुनील शर्मा ने कहा कि बीजेपी ऑटोनॉमी या अनुच्छेद 370 पर बहस या प्रस्ताव को मंज़ूरी नहीं देगी.

पूर्ण राज्य का क्या है मामला?

अगस्त 2019 से पहले जम्मू-कश्मीर पूर्ण राज्य हुआ करता था. लेकिन 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को खत्म कर दिया गया. 

इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर को दो हिस्सों में बांटकर जम्मू-कश्मीर और लद्दाख बना दिया गया. दोनों ही केंद्र शासित प्रदेश हैं. जम्मू-कश्मीर में विधानसभा तो है लेकिन केंद्र शासित प्रदेश होने के कारण कई सारे मामलों में फैसले के लिए केंद्र पर निर्भर रहना पड़ता है.

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला लंबे समय से पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग कर रहे हैं. उनका दावा है कि केंद्र सरकार ने पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने का वादा किया था

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