विज्ञापन

Explainer: चुना जाता था PM और SC की नहीं चलती थी; कैसा था 1953 से पहले का जम्मू-कश्मीर, जिसके जिक्र पर बवाल

1953 से पहले जम्मू-कश्मीर की स्थिति स्वायत्त राज्य जैसी होती थी और उसका पीएम होने के अलावा सदर-ए-रियासत भी होता था. सदर-ए-रियासत राष्ट्रपति के समान पद था.

Explainer: चुना जाता था PM और SC की नहीं चलती थी; कैसा था 1953 से पहले का जम्मू-कश्मीर, जिसके जिक्र पर बवाल
  • विधानसभा में 1953 से पहले की स्थिति बहाल करने के प्रस्ताव पर भाजपा और नेशनल कॉन्फ्रेंस के बीच भारी विवाद हुआ
  • 1953 से पहले जम्मू-कश्मीर का पीएम चुना जाता था और केंद्र सरकार के अधिकार चार मामलों तक सीमित थे
  • 1954 के राष्ट्रपति आदेश से जम्मू-कश्मीर भारत के संविधान के दायरे में आया और आर्टिकल 370 तथा 35ए लागू हुए
नई दिल्ली:

जम्मू-कश्मीर विधानसभा में शुक्रवार को भारी बवाल मच गया. नेशनल कॉन्फ्रेंस और भाजपा के विधायक आमने-सामने आकर नारेबाजी करने लगे और झड़प जैसे हालात बन गए. इसकी शुरुआत एक प्रस्ताव से हुई, जिसे खुद सीएम उमर अब्दुल्ला ने पेश किया था. इस प्रस्ताव में जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग की गई और इसमें पहले आए प्रस्तावों का भी जिक्र किया गया था. इनमें से ही एक प्रस्ताव वर्ष 2000 में आया था. इसका भी जिक्र हुआ और उसी को लेकर भाजपा के विधायकों को ऐतराज हुआ और वे उबल पड़े. ऐसा इसलिए क्योंकि 26, 2000 के प्रस्ताव में 1953 से पहले वाले हालात बहाल करने की बात कही गई थी.

अब सवाल है कि 1953 से पहले जम्मू-कश्मीर में क्या स्थिति थी, जिसके जिक्र भर से भाजपा के विधायक भड़क गए. वहीं नेशनल कॉन्फ्रेंस की मांग थी कि वही स्थिति बहाल की जाए. दरअसल 1953 से पहले जम्मू-कश्मीर की व्यवस्था पूरी तरह अलग थी. वहां पीएम चुना जाता था और चुनाव आयोग एवं सुप्रीम कोर्ट जैसी अहम संस्थाओं के अधिकार क्षेत्र में जम्मू-कश्मीर नहीं आता था. इसका अलावा कैग यानी नियंत्रक एवं लेखा महापरीक्षक के पास यह अधिकार नहीं था कि वह जम्मू-कश्मीर की संस्था का ऑडिट कर सके. 

जम्मू-कश्मीर में चुना जाता था PM, सदर-ए-रियासत भी होता था

जम्मू-कश्मीर की स्थिति स्वायत्त राज्य जैसी होती थी और उसका पीएम होने के अलावा सदर-ए-रियासत भी होता था. सदर-ए-रियासत राष्ट्रपति के समान पद था. पीएम को वजीर-ए-आजम कहा जाता था, जो प्रधानमंत्री का उर्दू पर्यायवाची है.  इसके अतिरिक्त भारत सरकार सिर्फ 4 मामलों में ही जम्मू-कश्मीर के संबंध में फैसला ले सकती थी. ये मामले थे- रक्षा, विदेश मामले, संचार और वित्त विभाग. इसके अलावा नागरिकता और संपत्ति के अधिकार के मामलों में भी जम्मू-कश्मीर के लोगों पर शेष भारत में लागू नियम मान्य नहीं होते थे. 

जवाहर लाल नेहरू और शेख अब्दुल्ला

जवाहर लाल नेहरू और शेख अब्दुल्ला

1954 के राष्ट्रपति आदेश में क्या था, जिससे लागू हुए बदलाव

इस स्थिति में बदलाव अगस्त, 1953 से आना शुरू हुआ था. इसके अलावा 1954 में तो राष्ट्रपति की ओर से ही एक आदेश जारी किया गया. इसके तहत यह तय हुआ था कि भारत के संविधान के दायरे में ही जम्मू-कश्मीर भी आएगा. सभी केंद्रीय कानून जम्मू-कश्मीर में लागू होंगे. इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट के दायरे में भी वह आएगा. इसी आदेश में आर्टिकल 370 की पृष्ठभूमि में ही आर्टिकल 35ए लागू किया गया था. इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट, चुनाव आयोग के दायरे को जम्मू-कश्मीर तक बढ़ाया गया. हालांकि आर्टिकल 370 और आर्टिकल 35ए को लेकर भी काफी विवाद रहा और अंत में 5 अगस्त 2019 को इन्हें हटाया गया था. होम मिनिस्टर अमित शाह ने संसद में प्रस्ताव करके इन दोनों प्रावधानों को हटाया था. इसके अलावा लद्दाख को जम्मू-कश्मीर से अलग कर दिया गया. बचा हुआ जम्मू-कश्मीर भी केंद्र शासित प्रदेश घोषित हो गया था. अब फिर से जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा दिए जाने की मांग हो रही है. 

आर्टिकल 370 पर तो चुप ही हैं उमर अब्दुल्ला, महबूबा हमलावर

अब जम्मू-कश्मीर विधानसभा में जब 1953 वाले हालात फिर से बहाल करने के प्रस्ताव का जिक्र हुआ तो भाजपा उबल पड़ी. उसके विधायकों ने सीएम उमर अब्दुल्ला की ओर से पेश प्रस्ताव की कॉपियां ही फाड़ डालीं. बता दें कि 2019 के बाद से जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश है. तब से ही लगातार मांग की जा रही है कि फिर से पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल किया जाए. नेशनल कॉन्फ्रेंस ने तो इसी मुद्दे के साथ चुनाव भी लड़ा था. अब वह इसकी मांग भी कर रही है. हालांकि आर्टिकल 370 को लेकर उमर अब्दुल्ला चुप्पी साधे हुए हैं और इसी वजह से महबूबा मुफ्ती उन पर हमलावर रहती हैं.

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Jammu And Kashmir, Jammu And Kashmir BJP, Jammu And Kashmir News, Jammu And Kashmir News In Hindi, Jammu And Kashmir News Latest
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com