- रिंकू सिंह के पिता खचंद्र सिंह का नोएडा के यथार्थ अस्पताल में लिवर कैंसर के कारण निधन हुआ है.
- खचंद्र सिंह अलीगढ़ में गैस सिलेंडर सप्लाई का काम करते थे और बेटे के क्रिकेट सपनों का पूरा समर्थन करते थे.
- पिता की सख्ती जीवन की तैयारी के लिए थी जिससे रिंकू ने मेहनत और अनुशासन को अपनाया और सफलता पाई.
आज सुबह आई एक खबर ने खेल जगत ही नहीं, हर उस इंसान को भावुक कर दिया जो संघर्ष की कहानियों में भरोसा रखता है. रिंकू सिंह के पिता खचंद्र सिंह का आज सुबह निधन हो गया. यह सिर्फ एक पिता के जाने की खबर नहीं है, बल्कि उस इंसान की विदाई है जिसने अपनी पूरी जिंदगी बेटे के सपनों के नाम कर दी. खान चंद्र सिंह उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में एलपीजी गैस सिलेंडर सप्लाई करने का काम करते थे. सीमित आमदनी, बड़ा परिवार और रोजमर्रा की जद्दोजहद के बावजूद उन्होंने कभी मेहनत से समझौता नहीं किया. कई बार हालात इतने कठिन हो गए कि रिंकू को भी पिता के साथ सिलेंडर पहुंचाने में मदद करनी पड़ी. इसके बावजूद उन्होंने बेटे के क्रिकेट के जुनून को पूरी तरह रोका नहीं. सख्त शब्द जरूर थे, लेकिन सपनों को तोड़ने वाली सख्ती कभी नहीं रही.
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सख्त पिता, गहराई से जुड़ा रिश्ता
रिंकू और उनके पिता का रिश्ता भावनाओं से भरा था, लेकिन दिखावे से दूर था. कई इंटरव्यू में क्रिकेटर रिंकू ने बताया है कि पिता खुलकर तारीफ नहीं करते थे, मैदान में बैठकर मैच देखने भी कम ही जाते थे. उनकी सख्ती दरअसल जीवन की तैयारी थी, ताकि बेटा हालात से डरना न सीखे.
रिंकू सिंह खुद कई इंटरव्यू में बता चुके हैं कि उनके पिता चाहते थे कि वह चाहे क्रिकेट खेले या कुछ और करे, लेकिन मेहनत और अनुशासन कभी न छोड़े. यही वजह है कि आज रिंकू के खेल में जो संयम, विनम्रता और संघर्ष दिखाई देता है, उसकी जड़ें उसी पिता की सीख में हैं.
'लौंडे ने तबीयत खुश कर दी'
कुछ महीनों पहले रिंकू सिंह के पिता ने ANI से बातचीत में कहा था कि बेटे को मैच को देखकर उनकी तबीयत ठीक हो गई. दरअसल एशिया कप में रिंकू सिंह ने धमाकेदार प्रदर्शन किया था. मैच के दौरान अलीगढ़ में पिता की तबीयत खराब थी. लेकिन उन्होंने बताया कि मैं खराब तबीयत में भी मैच देख रहा था और बेटे को अच्छा खेलते देख मैं स्वस्थ महसूस कर रहा हूं. रिंकू सिंह के पिता ने कहा था, 'लौंडे ने तबीयत खुश कर दी'.

आज जब नाम रोशन है, साया चला गया
जब रिंकू सिंह के बल्ले से बड़े-बड़े शॉट निकलते हैं और पूरा देश तालियां बजाता है, तो उन तालियों के पीछे एक पिता की चुप मेहनत छिपी है. आज वही पिता इस दुनिया में नहीं रहा, लेकिन उसकी तपस्या, उसके संस्कार और उसका विश्वास रिंकू के साथ हमेशा रहेगा.
खचंद्र सिंह का जाना उस पीढ़ी के जाने जैसा है जो अपने सपने खुद छोड़कर अगली पीढ़ी के सपनों को सच करने में लग जाती है.
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वेंटिलेटर सपोर्ट पर थे रिंकू सिंह के पिता
बता दें कि रिंकू सिंह के पिता खचंद्र सिंह पिछले कई दिनों से अस्पताल में मैकेनिकल वेंटिलेटर सपोर्ट पर थे और उन्हें लगातार रीनल रिप्लेसमेंट थेरेपी दी जा रही थी. खचंद्र सिंह को लिवर कैंसर के चौथे स्टेज में भर्ती कराया गया था. उनकी स्थिति गंभीर होने के कारण तत्काल उपचार की जरूरत थी. यथार्थ अस्पताल के डॉक्टरों की टीम उनकी निगरानी कर रही थी. हाल ही में रिंकू सिंह अपने पिता से मिलने के लिए नोएडा पहुंचे थे.
रिंकू सिंह ने छोड़ा था प्रैक्टिस सेशन
मंगलवार 24 फरवरी को चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम में टीम इंडिया का प्रैक्टिस सेशन था, लेकिन इसमें रिंकू सिंह ने हिस्सा नहीं लिया था और वह पिता से मिलने के लिए नोएडा पहुंचे थे. उनके अलावा बाकी खिलाड़ी अभ्यास करते नजर आए. इसके बाद ही खबर आई कि उनके पिता काफी बीमार हैं और जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं. 28 साल के रिंकू सिंह उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ के रहने वाले हैं.
जिंबाब्वे के खिलाफ मुकाबले के लिए प्लेइंग XI का हिस्सा नहीं थे रिंकू सिंह
रिंकू सिंह को टी20 वर्ल्ड कप 2026 में ग्रुप स्टेज के सभी मैचों में खेलने का मौका मिला था. वह सुपर-8 स्टेज में साउथ अफ्रीका के खिलाफ मैच का भी हिस्सा थे. लेकिन पिता की खराब तबीयत के चलते उन्हें टूर्नामेंट छोड़ बीच में घर लौटना पड़ा और इसके चलते वो जिंबाब्वे के खिलाफ मैच से दूर रहे.
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