- केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने आरक्षण का विरोध करने वालों के खिलाफ राजद्रोह का मामला दर्ज करने की मांग की
- अठावले ने कहा कि आरक्षण संविधान प्रदत्त अधिकार है और इसे समाप्त नहीं किया जा सकता
- उन्होंने आरक्षण विरोधी प्रदर्शन और सोशल मीडिया अभियानों को संविधान-विरोधी बताते हुए कड़ी कार्रवाई की वकालत की
केंद्रीय मंत्री एवं 'रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले)' के प्रमुख रामदास आठवले ने आरक्षण का विरोध करने वालों या इसे खत्म करने की मांग करने वालों के खिलाफ राजद्रोह का मामला दर्ज करने की रविवार को मांग की. उन्होंने कहा कि आरक्षण संवैधानिक अधिकार है.
आठवले ने एक बयान में कहा कि आरक्षण के खिलाफ प्रदर्शन (जिनमें दिल्ली के जंतर-मंतर पर घोषित प्रदर्शन भी शामिल हैं) ने इस मुद्दे को फिर से चर्चा में ला दिया है. उन्होंने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया पर भी आरक्षण व्यवस्था को खत्म करने या उसमें बदलाव की मांग को लेकर अभियान चलाए जा रहे हैं.
'आरक्षण का विरोध संविधान का विरोध है'
अठावले ने कहा, ‘आरक्षण का विरोध संविधान का विरोध है. जो लोग आरक्षण-विरोधी रुख अपनाते हैं, वे संविधान-विरोधी हैं और उनके खिलाफ राजद्रोह के तहत कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए.' उन्होंने कहा कि कुछ लोग आरक्षण खत्म करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन इसे समाप्त नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह संविधान प्रदत्त अधिकार है.
'जरूरतमंदों को इसका लाभ मिल रहा'
अठावले ने कहा कि आरक्षण का विस्तार अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) से लेकर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) तक हुआ है. उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था को खत्म करने की मांग का कोई औचित्य नहीं है, क्योंकि सभी जरूरतमंद वर्गों को इसका लाभ मिल रहा है. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 17 के तहत अस्पृश्यता पर रोक लगाई गई है, लेकिन ‘ग्रामीण भारत में अनुसूचित जाति समुदायों के खिलाफ जातिगत भेदभाव और अत्याचार अब भी जारी हैं.'
अठावले ने कहा, ‘हमारा रुख बिल्कुल स्पष्ट है. जो लोग आरक्षण खत्म करने की मांग कर रहे हैं, उन्हें पहले जाति व्यवस्था समाप्त करनी चाहिए. जब जाति व्यवस्था खत्म हो जाएगी, तब हम आरक्षण पर जोर नहीं देंगे.' उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार आरक्षण की रक्षा करने और सभी को न्याय दिलाने के लिए काम कर रही है.
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